मोदी और योग का रिश्ता जिसके सहारे हर कठिनाई को दूर करते हैं पीएम

By: | Last Updated: Monday, 22 September 2014 3:58 PM

नई दिल्ली : नरेंद्र मोदी और आध्यात्म का रिश्ता बहुत पुराना है. मोदी ने तीन साल हिमालय पर बिताए हैं. 

एम वी कामथ ने द मैन ऑफ द मोमेंट में लिखा है कि 18 साल की उम्र में नरेंद्र मोदी ने आध्यात्मिक ज्ञान की तलाश में अपना घर छोड दिया था लेकिन घर छोड़ने के बाद वो कहां गए, कहां रहे और उन्होंने क्या हासिल किया इस बारे में बहुत कम जानकारी है लेकिन खुद नरेंद्र मोदी का कहना है कि वो तीन सालों के लिए हिमालय पर चले गए थे.

 

नरेंद्र मोदी ने 2007 में कहा था कि कुछ बातें ऐसी है जिसको ये समय नहीं है कहने के लिए. लेकिन मेरे विद्यार्थी काल के बाद स्कूल जीवन के बाद मैं हिमालय पर चला गया. हिमलाय की मेरी जिंदगी के जो तीन साल है करीब करीब वहां  की बहुत सी घटनाएं हैं कहने के लिए लेकिन उसके लिए अभी समय नहीं हुआ है. कभी कहूंगा.

 

नरेंद्र मोदी का ये भी कहना है कि अपनी इस हिमायल यात्रा के दौरान उन्होंने पश्चिम बंगाल के बेलूर मठ में भी लंबा वक्त गुजारा था और बेलूर मठ से अपने इसी लगाव की वजह से ही चौथी बार गुजरात का मुख्यमंत्री बनने के बाद भी वो यहां आए थे.

 

नरेंद्र मोदी ने 2013 में कहा था कि यहां मैं बहुत बार आता था. आज लंबे समय के बाद आया. वही पुरानी अनुभूतियां जागृत हुई. मन मंदिर को बहुत ही समाधान हुआ आनंद हुआ. मैं मां काली के चरणों में प्रणाम करता हूं.

 

 

नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद के बीजेपी उम्मीदवार बनने के बाद हमारे खास कार्यक्रम घोषणापत्र में कहा था कि वैसे अभी भी कुछ मेरे साथी स्वामी जी जो हैं अभी भी हैं वंहा वो भी बताएंगे आपको स्वामी आत्मष्ठानंद जी हैं अब तो आयु भी बहुत हो गई अभी मैं उनके पास गया था लंबे अर्से तक उनके पास रहा था उनके गुरुबंधु थे उनके पास भी मैं कॉफी रहा था तो चाहे वो एक अलग दुनिया है.  

 

बेलूर मठ के सहायक सचिव स्वामी सुबीरानंद के मुताबिक करीब 45 साल पहले नरेंद्र मोदी मठ में संन्यासी बनने के लिए आए थे. उन दिनों बेलूर मठ के मुख्य व्यक्ति स्वामी माधवानंद जी महाराज हुआ करते थे. 

 

रामकृष्ण मठ एंव मिशन के सहायक सचिव स्वामी सुबीरानंद ने बताया कि माधवानंद जी महाराज नरेंद्र भाई को बोला कि तुम्हारा उमर बहुत कम है. औऱ पढ़ो औऱ उसके बाद आओ. लेकिन नरेंद्र भाई के मन में एक तीव्र गहरा वैराग्य था. सन्यासी बनने के लिए उनके अंदर में एक अदभुद उनमादना था.

 

एम वी कामथ ने भी अपनी किताब द मैन ऑफ द मोमेंट में लिखा है कि स्वामी विवेकानंद ने हिमालय में कुछ समय बिताया था ये बात नरेंद्र मोदी भी जानते थे और इसीलिए वो बेलूर मठ से निकलने के बाद हिमालय की ओर चले गए थे.

 

नरेंद्र मोदी ने 2007 में बताया था कि मेरे मन पर प्रभाव पैदा किया स्वामी विवेकानंद ने बाल्यकाल्य से. बहुत छोटे उम्र में विवेकानंद जी को पढ लिया. और हो सकता है कि मेरा नाम नरेंद्र होने की वजह से भी उनके प्रति मुझे लगाव हो गया. हर चीज उनकी मेरे मन को छू जाती थी. और आज भी मेरे मन पर उसका प्रभाव है.

 

हीरा बेन के मुताबिक नरेंद्र मोदी दो साल बाद वडनगर लौटे थे लेकिन सिर्फ एक दिन और एक रात ही वो घर में रुके क्योंकि उन्होंने ने एक बार फिर वडनगर छोड़ने का फैसला कर लिया था.

 

दरअसल बचपन से ही नरेंद्र मोदी का मन धार्मिक बातों में ज्यादा रमता था. वडनगर की जिस गली में उनका परिवार रहता था उसके दूसरे छोर पर गिरपुर महादेव का मंदिर है. नरेंद्र मोदी हर दिन इस मंदिर की पहले परिक्रमा करते और फिर एक जगह बैठ कर जप करते थे. इस गिरपुर महादेव मंदिर में रोज सुबह मत्था टेकने के बाद ही बालक नरेंद्र मोदी की दिन चर्चा शुरु होती थी.

 

 

 

 

 

 

 

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