भारतीय मुसलमानों की देशभक्ति पर सवाल नहीं उठाया जा सकता: नरेंद्र मोदी

By: | Last Updated: Saturday, 20 September 2014 5:46 AM

नई दिल्ली: पीएम बनने के बाद अपने पहले इंटरव्यू में नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत के मुसलमानों की देशभक्ति पर सवाल नहीं उठाया जा सकता है. सीएनएन को दिए इस इंटरव्यू में उन्होंने कहा है, “भारत का मुसलमान देश के लिए अपनी जान भी दे सकता है. अल-कायदा को इसका भ्रम है कि भारतीय मुसलमान उसके बहकावे में आएगा.”

इसी महीने अमेरिका के दौरे पर जाने वाले मोदी ने भारत और अमेरिका के रिश्तों पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक समानताएं हैं.

 

‘मोदी ने जो कहा है वो सत्य वचन है, मुसलमानों के दिल की बात कही’ 

हालांकि भारतीय प्रधानमंत्री ने यह बात स्वीकारी कि बीते समय में दोनों देशों के रिश्तों में बहुत उतार-चढ़ाव आए हैं. साथ ही उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों देशों के रिश्तों ने इक्कीसवीं सदी में एक नया आकार लिया है. उन्होंने कहा, “मुझे विश्वास है भारत और अमेरिका वास्तविक सामरिक साझेदारी विकसित कर सकते हैं.”

 

उन्होंने आगे कहा, “भारत-अमेरिका संबंधों को दिल्ली और वाशिंगटन के सीमित दायरे में नहीं देखा जाना चाहिए: दोनो देशों को पता है कि उनके संबंधों का दायरा बहुत बड़ा है.”

 

जानें मोदी ने मुसलमानों के लेकर कब-कब क्या-क्या कहें हैं 

इंटरव्यू से जुड़े सवाल-जवाब

सवाल: अमेरिका में बहुत से लोग और भारत में भी कुछ लोग ऐसा चाहते हैं कि भारत और अमेरिका एक दूसरे के और मजबूत सहयोगी होते- एक दुनिया का सबसे पुराना (अमेरिका) लोकतंत्र है तो दूसरा सबसे बड़ा (भारत). लेकिन ऐसा कभी संभव नहीं हो पाया और इसमें हमेशा से कोई न कोई दिक्कत आती रही है. क्या आपको ऐसा लगता है कि दोनों देशों के बीच वास्तविक सामरिक संबंध विकसित होने की संभावना है?

 

पीएम मोदी: मेरे पास इसके लिए सिर्फ एक शब्द का जवाब है और मैं पूरे आत्मविश्वास के साथ कहता हूं, हां. मैं बतात हूं कैसे. भारत और अमेरिका के बीच कई समानताएं हैं. पिछली कुछ शताब्दियों पर नजर डालें तो दो बातें सामने आती हैं. अमेरिका ने पूरी दुनिया के लोगों को अपनाया है और दुनिया के हर हिस्से में भारतीयों को अपनाया गया है. इससे दोनों देशों के समाज की विशेषता का पता चलता है. मिल-जुल कर रहना भारत और अमेरिका के लोगों के व्यवहार में है. हां यह भी सच है कि बीते समय में हमारे रिश्तों में उतार-चढ़ाव आया है. लेकिन बीसवीं सदी के अंत से लेकर इक्कीसवीं सदी के पहले दशक तक हमने रिश्तों में बड़ा बदलाव देखा है. हमारे रिश्ते गहरे हुए हैं. भारत और अमेरिका इतिहास और संस्कृति से एक दूसरे से जुड़े हुए हैं.  दोनों के रिश्ते अभी और मजबूत होने हैं.

 

सावल: अभी तक ओबामा प्रशासन से बातचीत में उनके कई कैबिनेट मंत्रियों का यहां आना जाना हुआ है. क्या आपको लगता है कि अमेरिका वास्तविकता में भारत के साथ संबंध विस्तार करना चाहता है?

 

पीएम मोदी: भारत-अमेरिका संबंधों को दिल्ली और वाशिंगटन के सीमित दायरे में नहीं देखा जाना चाहिए. दोनो देशों को पता है कि उनके संबंधों का दायरा बहुत बड़ा है. अच्छी बात यह है कि दोनों देशों का मूड में इस समझ को लेकर सद्भाव से भरा है. दोनो पक्षों ने इसमें अपना योगदान दिया है. 

 

सवाल: अल-कायदा प्रमुख ने एक वीडियो जारी किया है जिसमें उसने भारत और साउथ एशिया में अल-कायदा के विस्तार की अपील की है. उसमें उसने कहा है कि वो कश्मीर के मुस्लमानों को अत्याचार से मुक्ति दिलवाना चाहता है. यही बात उसने गुजरात के मुस्लमानों के लिए भी कही है. क्या आपको इस बात का डर है कि वो ऐसा करने में सफल होगा?

 

पीएम मोदी: मुझे ऐसा लगता है कि वो भारतीय मुसलमनों के साथ अन्याय कर रहा है. अगर किसी को भी ऐसा लगता है कि भारतीय मुसलमान ऐसी बातों पर ध्यान देता तो यह उनका भ्रम है. भारत का मुसलमान देश के लिए अपनी जान भी दे सकता है. वो कभी देश का बुरा नहीं सोचेंगे.

 

सावल: आपके देश में 170 मीलीयन मुस्लमान हैं पर ऐसा कैसे संभव है कि उनमें से कुछ या विल्कुल ही ना के बराबर अल-कायदा के सदस्य हैं. जबकि अल-कायदा अफगानिस्तान और पाकिस्तान में अपनी जोरदार उपस्थिति बनाए हुए है. भारत में ऐसा क्या है जिसने इस समुदाय को इतना अतिसंवेदनशील नहीं बनने दिया है?

 

पीएम मोदी: मैं इस विषय पर मनोवैज्ञानिक और धार्मिक विश्लेषण का अधिकारी नहीं हूं, पर सवाल यह है कि क्या दुनिया में मानवता की रक्षा की जानी चाहिए या नहीं. मानवता में विश्वास करने वालों को एकजुट होना चाहिए या नहीं. यह दिक्कत पूरी मानव सभ्यात के खिलाफ है ना कि किसी एक देश या समुदाय के खिलाफ. हमें इसका मुकाबला मानवता के साथ और उसके विरोधियों से जमकर करना होगा, इसके अलावा कोई चारा नहीं है.