कल रेडियो से मोदी करेंगे 'मन की बात', कहां से आया आइडिया?

By: | Last Updated: Thursday, 2 October 2014 3:25 PM
Modi to share his ‘Man ki Baat’ via radio

नई दिल्ली : आम लोगों से सीधे जुड़ने के लिए नरेंद्र मोदी अब रेडियो का रुख कर रहे हैं. कल नरेंद्र मोदी रेडियो पर करेंगे अपने मन की बात. आल इंडिया रेडियो को इस प्रसारण का जिम्मा मिला है लेकिन देश के एफएम चैनल, दूरदर्शन और कम्युनिटी रेडियो को भी निर्देश दिए गए हैं कि वह प्रधानमंत्री की इस नई शुरुआत को हर भारतीय तक पहुंचाने में मदद करें.

 

नरेंद्र मोदी सेल्फी के जमाने के प्रधानमंत्री हैं, ट्विटर जैसे सबसे आधुनिक सोशल मीडिया पर लगातार आते रहते हैं मोदी के ट्वीट. फेसबुक की दुनिया में भी मोदी के चाहने वालों की तादाद लाखों में है. लेकिन लोगों से जुड़ने की और लगातार जुड़े रहने की मोदी की चाह उन्हें अब उस रेडियो पर ले आई है.

 

रेडियो अमीर गरीब, शहर-गांव की सरहद नहीं देखता. अब हर जगह रेडियो होगा और रेडियो पर होंगे मोदी. कहा जा रहा है कि रेडियो की कमजोर पड़ती सांसों को मोदी की मौजूदगी ऑक्सीजन देगी वहीं सबका साथ सबका विकास का नारा देने वाले मोदी कर पाएंगे देश के 99 फीसदी लोगों से बात.

 

नरेंद्र मोदी की इस पहल प्रचार भी शुरू हो चुका है. रेडियो की इस दुनिया में नरेंद्र मोदी ने कदम क्यों रखा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दशहरे के दिन यानी 3 अक्टूबर को सुबह 11 बजे देश के लोगों से रेडियो के जरिए बातचीत की शुरुआत करेंगे. प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम का नाम होगा मन की बात. कार्यक्रम को प्रसारित करने की जिम्मेदारी ऑल इंडिया रेडियो को दी गई है. दूरदर्शन, प्राइवेट टीवी चैनल और प्राइवेट एफएम चैनल भी इसे प्रसारित कर सकेंगे. नरेंद्र मोदी मन की बात कार्यक्रम में देश से सीधा संवाद करेंगे.

 

अब तक की योजना के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर 15 दिन में एक बार रेडियो के जरिए देश से जुड़ेंगे. हर कार्यक्रम के बाद ये इंतजाम भी है कि हिंदी में मोदी की बातचीत के बाद ऑल इंडिया रेडियो के स्थानीय स्टेशन स्थानीय भाषा में इसका अनुवाद भी प्रसारित करें. दूरदर्शन भी भाषण के मुद्दे से जुड़ी तस्वीरों के साथ मोदी की आवाज प्रसारित करेगा.

 

इंतजार और प्रचार

 

नरेंद्र मोदी के इस शो को कई प्राइवेट एफएम चैनल भी प्रसारित करेंगे लेकिन अपने अंदाज में. मनोरंजन के लिए जाने जाने वाले ये एफएम चैनल नरेंद्र मोदी को कामयाब ब्रांड मानते हैं और वो भी तैयार हैं मोदी को एक अलग अंदाज में पेश करने के लिए. दशहरे का मौका है और प्राइवेट एफएम चैनलों के लिए विज्ञापनों से कमाई का मौका होता है लेकिन वह भी कह रहे हैं कि मोदी के मन की बात से बड़ा कुछ नहीं है.

 

देश के कोने-कोने में लोगों को इंतजार है जब मोदी रेडियो पर आएंगे. लेकिन सवाल है कि ट्विटर फेसबुक के इस दौर में कितना कामयाब होगा रेडियो-मोदी कनेक्शन?

 

रेडियो की दुनिया दो हिस्सों में बंटी हुई – एक वह जिनके लिए रेडियो मजबूरी है यानी वो लोग जिनके पास मनोरंजन का कोई दूसरा साधन नहीं है. वह सरकारी रेडियो यानी ऑल इंडिया रेडियो के भरोसे हैं.

 

सरकारी रेडियो की पहुंच की बात करें तो देश के 92 फीसदी इलाके में प्रसारण होता है. और देश की करीब 99.20 फीसदी लोगों तक पहुंचता है ऑल इंडिया रेडियो कुल 413 स्टेशन मोदी का कार्यक्रम प्रसारित करेंगे.

 

दूसरी तरफ वे लोग हैं जिनके लिए रेडियो का मतलब सिर्फ मनोरंजन है यानी बड़े शहरों के वो लोग जो एफएम से जुड़े हुए हैं. मोदी का कार्यक्रम एफएम पर भी प्रसारित होगा और एफएम के दीवाने भी कम नहीं हैं.

 

रेडियो की अपनी एक ताकत भी है जिसे नरेंद्र मोदी और उनकी कम्युनिकेशन टीम ने बखूबी पहचाना है बस इंतजार है नतीजों का.

 

कहां से आया आइडिया?

 

एक अरसे के बाद देश के सर्वोच्च राजनेता ने रेडियो को अपना साथी बनाने की पहल की है ताकि वो देश के हर शख्स को साथ चलने के लिए तैयार कर सकें. अगर इतिहास को खंगालें तो रेडियो पर साल 1930 में महात्मा गांधी का अहिंसा का मंत्र सुनाई देता है.

 

रेडियो ने ही 14 अगस्त 1947 की शाम संविधान सभा में पंडित नेहरू के चंद घंटों बाद आने वाली आजादी के ऐलान को देश तक पहुंचाया था.

 

करीब करीब हर माध्यम पर प्रसारित होने वाले 15 अगस्त को प्रधानमंत्री के भाषणों को छोड़ दें तो आखिरी अहम मौका था देश में इमरजेंसी के एलान का. उस वक्त की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 को इमरजेंसी का ऐलान सीधे आल इंडिया रेडियो पर किया था.

 

इंदिरा सत्ता में लौटीं लेकिन रेडियो इस तरह सत्ता का साथी बनकर नहीं लौटा. साल 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या हो गई. इंदिरा गांधी के बाद सत्ता और रेडियो के रिश्ता टूट सा गया. उसी टूटे सिलसिले को जोड़ने और रेडियो के जरिए देश से जुड़ने की पहल कर रहे हैं नरेंद्र मोदी. दरअसल लोगों से सीधी बातचीत का ये तरीका नया नहीं है.

 

अमेरिका के राष्ट्रपति फ्रैंकलिन रूजवेल्ट ने साल 1962 में फायरसाइड के नाम से एक सीरीज शुरू की थी. ये दूसरे विश्वयुद्ध के बाद का दौर था और युद्द ने अमेरिका की कमर तोड़ दी थी. अमेरिका निराशा में डूबा था जब रूजवेल्ट ने रेडियो की ताकत को पहचाना और अमेरियों पर इसका असर भी हुआ था.

 

रूजवेल्ट की विरासत को 1982 में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने संभाला और छोटे छोटे लेकिन अहम मुद्दों पर जनता से बातचीत करना शुरू किया था. नरेंद्र मोदी भी कुछ ऐसा ही करने जा रहे हैं. नरेंद्र मोदी भी एकतरफा संदेशा नहीं देंगे बल्कि देश के साथ दिल की बात करेंगे.

 

नरेंद्र मोदी हाल ही में अमेरिका से लौटे हैं और रेडियो पर उनका मन की बात कार्यक्रम इसके बाद शुरू हो रहा है. दरअसल बराक ओबामा भी हर हफ्ते रेडियो पर भाषण देते हैं जिसके बाद प्रमुख विपक्षी दल के किसी नेता की प्रतिक्रिया प्रसारित की जाती है लेकिन अमेरिका में ये बहुत कम केंद्रों से प्रसारित होता है और इसकी पहुंच बेहद सीमित मानी जाती है लेकिन मोदी अब पूरे भारत के दिल में रेडियो के जरिए उतरना चाहते हैं.

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