चीन के साथ मोदी ने सीमा पर शांति और आतंकवाद का मुद्दा उठाया

By: | Last Updated: Friday, 15 May 2015 1:34 AM
Modi visits Xi’an City Wall_takeup_border_issue

शियान: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी तीन दिनों की चीन यात्रा उत्तर पश्चिम शहर शियान से शुरू की जो चीनी राष्ट्रपति शी चिनपिंग का गृह नगर है और इस दौरान दोनों नेताओं के बीच आपसी विश्वार्सं को मजबूत बनाने और सीमा मुद्दे पर चर्चा हुई.

 

प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली चीन यात्रा पर मोदी का चीनी राष्ट्रपति ने शानदार स्वागत किया. चीनी राष्ट्रपति शी सामान्य प्रोटोकाल से हटकर बीजिंग से बाहर अपने गृह नगर शियान में मोदी के साथ बैठक कर रहे हैं. आम तौर से चीनी राष्ट्रपति राजधानी बीजिंग में ही विदेशी मेहमानों से मिलते हैं. इसे चीनी नेता की ओर से उस आचार व्यवहार का प्रत्युत्तर माना जा रहा है जैसा शी की भारत यात्रा के दौरान मोदी ने अहमदाबाद में उनकी मेजबानी करते हुए किया था.

 

दोनों के रिश्तों में आपसी गर्माहट दिखने के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से होते हुए आर्थिक कारिडोर के निर्माण में चीन की ओर से 46 अरब डालर के निवेश के विषय को भी उठाया. इस बारे में भारत अपना विरोध दर्ज करा चुका है. इस निवेश की घोषणा पिछले महीने शी की पाकिस्तान यात्रा के दौरान हुई थी.

 

समभा जाता है कि मोदी ने चीन की ओर से अरूणाचल प्रदेश के निवासियों को नत्थी वीजा जारी करने का विषय भी उठाया. चीन अरूणाचलप्रदेश को दकि्षण तिब्बत का हिस्सा बताता है जबकि भारत उसके इस दावे को सिरे से खारिज करता है.

 

मोदी और शी के बीच शियान शहर में विस्तृत चर्चा हुई . पहली बार किसी चीनी राष्ट्रपति ने बीजिंग से बाहर इस स्तर की चर्चा की है. इस बैठक के दौरान विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई जिसमें राजनीतिक, आर्थिक, आतंकवाद, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार और परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत की सदस्यता जैसे वैश्विक मुद्दे शामिल हैं. जयशंकर ने कहा, राजनीतिक क्षेत्र में विश्वास को मजबूत बनाने और नजदीकियां बढ़ाने के बारे में कापी चर्चा हुई र्.र्ं उन्होंने मीडिया को 90 मिनट तक चली शिष्टमंडल स्तरीय वार्ता के बारे में जानकारी दी हालांकि कोई सवाल नहीं लिए.

 

विदेश सचिव ने बताया कि दोनों नेताओं ने सीमा मुद्दों के बारे में चर्चा की जिसमें शांति एवं स्थिरता का विषय शामिल है. इसके अलावा सीमा के आरपार बहने वाली नदियों के बारे में भी चर्चा हुई .

 

उल्लेखनीय है कि सीमा मुद्दा एशिया के इन दो महत्वपूर्ण देशों के बीच बाधाकारी बिन्दु रहा है और दोनों देश विशेष प्रतिनिधि स्तारीय वार्ता के जरिये इसे सुलभाने का प्रयास कर रहे हैं. विशेष प्रतिनिधियों के बीच अब तक 18 दौर की वार्ता हो चुकी है.

 

बैठक के माहौल का जिक्र करते हुए जयशंकर ने कहा, माहौल कापी सहज था. इसलिए एक तरह से यह दोनों नेताओं के बीच आपसी समभ तैयार करने का हिस्सा है जो पिछले वर्ष सितंबर में शुरू हुआ हैर्.र्ं प्रधानमंत्री मोदी तीन दिनों की चीन यात्रा के पहले पड़ाव पर आज सुबह प्राचीन शहर शियान पहुंचे और यहां उनका शानदार स्वागत किया गया.

 

आर्थिक मोर्चे पर मोदी और शी ने व्यापार घाटे के मुद्दे पर चर्चा की जो अभी चीन के पक्ष में करीब 38 अरब डालर का है. इस विषय को सुलभाने के रास्तों के बारे में भी चर्चा की गई.

 

जयशंकर ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच निवेश के माहौल एवं सुधार से जुड़ी चुनौतियों के बारे में भी चर्चा हुई.

 

बैठक के दौरान अपने शुरूआती संबोधन में शी ने मोदी से कहा, यह पहला मौका है जब मैंने किसी विदेशी नेता का स्वागत अपने गृह नगर में किया हैर्.र्ं उन्होंने उम्मीद जतायी कि भारतीय नेता द्विपक्षीय सामरिक गठजोड़ को नयी प्रगति हासिल करने के लिए आगे बढ़ायेंगे जिसमें वृहद विकास की क्षमता है. चीनी राष्ट्रपति ने कहा, चीन.भारत संबंधों में स्थिर विकास अनुभव किया गया है और इसमें कापी संभावनाएं हैं.

 

शी ने पिछले सितंबर में भारत की यात्रा के दौरान गर्मजोशी से स्वागत करने के लिए मोदी का धन्यवाद किया. उन्होंने कहा, इसका मेरे ऊपर गहरा और अच्छा प्रभाव पड़ा. शी ने कहा कि दोनों पक्षों ने नियमित रूप से उच्चस्तरीय सम्पर्क और आदान प्रदान करने, रेलवे और औद्योगिक पार्क समेत प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में सहयोग को प्रोत्साहित करने और सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति नियंत्रित करने के साथ अंतरराष्ट्रीय तथा क्षेत्रीय मामलों में बेहतर सम्पर्क व्यवस्था बनाने जैसे विषयों पर चर्चा की.

 

मोदी ने कहा कि वह चीन की यात्रा पर आकर हर्षित है. उन्होंने कहा कि शियान में कुछ ऐतिहासिक महत्व के स्थान हैं और दोनों प्राचीन सभ्याताओं के बीच सांस्कृतिक आदान प्रदान के विषय का जिक्र किया.

 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनपिंग आज प्रख्यात विशाल हंस पैगोर्डां गए . इसका निर्माण 652 इस्वी में जाने माने भिक्षु ह्वेन सांग की रेशम मार्ग से होते हए भारत की 17 साल लम्बी भारत यात्रा और चीन में बौद्ध धर्म को लोकप्रिय बनाने के संदर्भ में उनके प्रयासों को मान्यता प्रदान करते हुए किया गया था.

 

प्रधानमंत्री ने इस मंदिर को बोधीवृक्ष का एक पौधा भेंट किया. इस पर मंदिर के महंत ने भी मोदी को ह्वेन सांग की छोटी मूर्ति भेंट की जिसे यूयान सांग के रूप में जाना जाता है. मोदी और शी ने यहां एक दूसरे से हाथ मिलाते हुए पोटो भी खिंचवाए.

 

उल्लेखनीय है कि यह हंस पैगोडा दक्षिणी शियान में स्थित एक बौद्ध पैगोडा है. इसका निर्माण 652 इस्वी में सांग राजवंश ने कराया था और मूल रूप में यह पांच मंजिल का था.

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अपनी चीन यात्रा की शुरूआत मशहूर टैराकोटा वॉरियर्स म्यूजियम का दौरा करके की. इस संग्रहालय में चीन के पहले बादशाह किन शी ह्वेन की सेनाओं को दर्शाने वाली मूर्तियों का एक बड़ा संग्रह है. प्रधानमंत्री ने संग्रहालय में लगभग एक घंटे का समय बिताया जो संयुक्त राष्ट्र विश्व धरोहर स्थल भी है. उन्होंने यहां किए जा रहे खुदाई कार्य के बारे में भी जानकारी ली.

 

विजिटर बुक में मोदी ने लिखा कि जिस अद्भुत तरीके से संग्रहालय का संरक्षण किया गया है उससे वह ‘‘बेहद प्रभावित’’ हैं.

 

मोदी ने अतिथि पुस्तिका में लिखा, ‘‘ टेराकोटा के सैनिक दुनिया के धरोहर हैं..यह चीन की स5यता से जुड़ी उपलब्धियों का गवाही है.’’

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