पीएम मोदी ने आदिल जैनुलभाई को 'क्वॉलिटी काउंसिल ऑफ इंडिया' का चेयरमैन बनाया

By: | Last Updated: Thursday, 18 September 2014 3:05 PM
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नई दिल्ली: सरकारी कंपनियों को मजबूत बनाने और देश में कारोबारी माहौल को बेहतर करने की दिशा में प्रधानमंत्री ने एक और फैसला किया है. कॉरपोरेट जगत के जाने-माने दिग्गज और मैकेंजी इंडिया के पूर्व चेयरमैन आदिल जैनुलभाई को ‘क्वॉलिटी काउंसिल ऑफ इंडिया’ का चेयरमैन बनाया गया है.

 

ये मोदी की उस पैकेजिंग का हिस्सा है जिसके जरिए वह अपने ‘मेक इन इंडिया’ के सपने को पूरा करना चाहते हैं.

 

दिल्ली के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स में नरेंद्र मोदी ने देश को शानदार पैकेजिंग का सपना दिखाया था. सरकार बनने के बाद से तलाश थी एक ऐसे चेहरे की जो कारोबारी दुनिया से भी नाता रखता हो और देश की उम्मीदों पर भी खरा उतरे.

 

आखिर ये चेहरा उन्हें मिल गया है. दुनिया भर के बड़ी कंपनियों, कारोबारियों और यहां तक कि सरकारों को सलाह देने वाली अंतराष्ट्रीय कंपनी मैक्किन्से के पूर्व चेयरमैन आदिल जैनुलभाई अब क्वालिटी कौंसिल ऑफ इंडिया के नए चेयरमैन होंगे.

 

क्या है क्वालिटी कौंसिल ऑफ इंडिया?

 

1997 में बनाई गई थी क्वालिटी कौंसिल ऑफ इंडिया. अंतराष्ट्रीय मानकों के हिसाब से घरेलू उत्पादन की जिम्मेदारी है .क्यूसीआई में सरकार के औद्योगिक नीति और प्रसार विभाग के सदस्य होते हैं. इसके अलावा फिक्की, एसोचैम और सीआईआई के भी सदस्य होते हैं. कारोबारियों और सरकार के बीच पुल की तरह काम करती है क्यूसीआई.

 

मोदी ने ‘मेक इन इंडिया’ का नारा दिया है. इसके साथ ही सरकारी नियंत्रण से मुक्त रहने वाली क्यूसीआई की भूमिका और अहम हो गई है. ऐसे में मोदी सरकार ने कारोबारी दुनिया से आदिल जैनुलभाई को क्यूसीआई में लाकर नई पैकेजिंग शुरू कर दी है.

 

कौन हैं आदिल जैनुलभाई?

 

आईआईटी मुंबई से बीटेक और फिर हॉर्वर्ड यूनिवर्सिटी से पोस्टग्रेजुएशन करने वाले जैनुलभाई की असली ताकत है उनकी पॉजीटिव सोच .

 

आदिल जैनुलभाई ने मैक्किन्से में 25 साल लगातार काम किया और इस दौरान वह अमेरिका में ही रहे. भारत आने के बाद से उन्होंने रिलायंस, अमेरिकन इंडिया फाउंडेशन और सैफी समूह समेत कई बड़ी कंपनियों को ना सिर्फ सलाह देने का काम जारी रखा बल्कि नए उद्यमियों को आगे बढ़ाने का काम भी शुरू कर दिया.

 

नाकामियां जैनुलभाई के लिए ताकत बन जाती हैं और यही वजह है कि खुद उनके साथ काम करने के लिए पूरी तैयारी जरूरी है. एक कारोबारी को तो आदिल ने 75 बार मुलाकात के बाद हां की थी.

 

गुजरात के रहने वाले आदिलभाई को मोदी सरकार की पहली पसंद बने हैं तो उसकी वजह है आदिल भाई की पॉजीटिव सोच.

 

भारत को उम्मीदों का देश मानने वाले आदिल भाई अब मोदी सरकार की उम्मीदों पर कितना खरे उतरते हैं ये तो वक्त ही बताएगा.

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