टोक्यो में छात्रों से मिले पीएम मोदी, भारत में महिलाओं की बढ़ती ताकत औऱ पर्यावरण  के बारे में बताया

By: | Last Updated: Tuesday, 2 September 2014 2:02 AM
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नई दिल्ली: पीएम नरेंद्र मोदी के जापान दौरे का आज चौथा दिन है. आज पमोदी ने जापान की सैक्रेड हार्ट यूनिवर्सिटी में छात्रों को संबोधित किया. मोदी ने छात्रों को भारत में महिलाओं की बढ़ती ताकत और पर्यावरण के बारे में बताया.

 

पीएम ने भारत में महिलाओं की बढ़ती ताकत के बारे में जापानी छात्रों को बताया. उन्होंने कहा कि मेरी कैबिनेट में 25 प्रतिशत मंत्री महिलाएं हैं. पीएम ने अपने गुजरात के सीएम रहते हुए महिलाओं के किए गए विकास की भी बात की. उन्होंने बताया कि गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए अपने तोहफों की नीलामी से उन्हें 78 करोड़ रुपए मिले थे. ये 78 करोड़ रुपए उन्होंने महिलाओं की शिक्षा पर खर्च किए.

 

इसके साथ ही पीएम ने जापानी छात्रों से क्लाइमेट चेंज के बारे में भी बात की. उन्होंने कहा कि दुनिया में क्लाइमेट चेंज की बात हो रही है. क्लाइमेट चेंज के लिए इंसान जिम्मेदार है. लोगों ने प्रकृति को नुकसान पहुंचाया है. प्रकृति से प्यार हमारी संस्कृति में है.

 

पीएम नरेंद्र मोदी ने जापानी छात्रों को उनसे सोशल मीडिया पर जुड़ने की सलाह भी दी. उन्होंने कहा कि मैं सोशल मीडिया पर बहुत एक्टिव रहता हूं एक पीएम होते हुए भी मैं हमेशा सोशल मीडिया से जुड़ा रहता हूं. आप मुझसे जुड़े रहने के लिए सोशल मीडिया पर जुड़ सकते हैं.उन्होंने कहा कि कि मैं और जापान के पीएम ऑफलाइन और ऑनलाइन भी अच्छे दोस्त हैं.

 

परमाणु अप्रसार संधि पर भारत के हस्ताक्षर न करने की वजह से अंतरराष्ट्रीय समुदाय में व्याप्त चिंता को दूर करने की कोशिश करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि शांति और अहिंसा के लिए देश की प्रतिबद्धता ‘‘भारतीय समाज के डीएनए’’ में रची बसी है जो किसी भी अंतरराष्ट्रीय संधि या प्रक्रियाओं से बहुत उपर है.

 

मोदी ने यहां सैक्रेड हार्ट यूनिवर्सिटी में एक छात्र के प्रश्न के जवाब में कहा, ‘‘भारत भगवान बुद्ध की धरती है. बुद्ध शांति के लिए जिये और हमेशा शांति का पैगाम दिया तथा यह संदेश भारत में गहराई तक व्याप्त है.’’ संवाद के दौरान उनसे पूछा गया था कि परमाणु अप्रसार संधि पर अपना रूख बदले बिना भारत अंतरराष्ट्रीय समुदाय का विश्वास कैसे हासिल करेगा. परमाणु हथियार रखने के बावजूद भारत इस संधि पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर चुका है.

जापान दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जहां परमाणु बम गिराया गया था. फिलहाल जापान की यात्रा पर यहां आए मोदी ने इस अवसर का उपयोग करते हुए तोक्यो के साथ असैन्य परमाणु करार करने के प्रयासों के बीच इस मुद्दे पर अपना यह संदेश दिया. भारत ने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया है क्योंकि वह इसे खामीयुक्त मानता है.

 

प्रधानमंत्री ने कहा कि अहिंसा के लिए भारत की पूर्ण प्रतिबद्धता है और यह ‘‘भारतीय समाज के डीएनए में रची बसी है तथा यह किसी भी अंतरराष्ट्रीय संधि से बहुत उपर है.’’ उनका संदर्भ भारत के, परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर करने से इनकार की ओर था.

 

मोदी ने संधियों से उपर उठने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा, ‘‘अंतरराष्ट्रीय मामलों में, कुछ प्रक्रियाएं होती हैं. लेकिन समाज की प्रतिबद्धता सबसे उपर है.’’ अपनी बात पर बल देते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि महात्मा गांधी के नेतृत्व में पूरे समाज के साथ अहिंसा के लिए प्रतिबद्ध रहते हुए भारत ने इस तरह स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया कि पूरी दुनिया आश्चर्यचकित रह गई.

 

उन्होंने कहा कि हजारों साल से भारत की आस्था सूत्र वाक्य ‘‘वसुधव कुटुम्बकम’’ (पूरी दुनिया एक परिवार है) में रही है. ‘‘जब हम पूरी दुनिया को एक परिवार मानते हैं तो हम ऐसा कुछ करने की कैसे सोच सकते हैं जिससे किसी को नुकसान हो.’’ भारत ने हाल ही में आईएईए के साथ हस्ताक्षरित ‘‘सुरक्षा करार पर अतिरिक्त प्रोटोकॉल’’ (एडीशनल प्रोटोकॉल ऑन सैफेगार्डस एग्रीमेंट) की अभिपुष्टि की है. इस संदर्भ में प्रधानमंत्री से पूछा गया था कि क्या भारत परमाणु निगरानी एजेंसी के निरीक्षकों को भारत के असैन्य परमाणु संयंत्रों की आसानी से निगरानी की अनुमति देगा.

 

संवाद सत्र के दौरान, एक अन्य छात्र ने मोदी से पूछा कि चीन के ‘‘विस्तारवादी’’ प्रयासों के बावजूद एशिया में शांति कैसे रह सकती है. इस पर मोदी ने कहा, ‘‘ऐसा लगता है कि आप चीन से परेशान हैं.’’ हालांकि छात्रों को संबोधित कर रहे मोदी की राय थी कि छात्र पत्रकारों की तरह सवाल पूछ रहे थे

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