दो राज्यों के चुनाव नतीजों में मोदी लहर बरकरार, जम्मू-कश्मीर और झारखंड में कौन बनेगा मुख्यमंत्री?

By: | Last Updated: Wednesday, 24 December 2014 1:51 AM
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रांची/नई दिल्ली: नई दिल्ली: दो राज्यों के चुनाव नतीजों के बाद अब सरकार बनने की बारी है. झारखंड में जहां बीजेपी सरकार बनाएगी वहीं जम्मू-कश्मीर में सरकार को लेकर सस्पेंस बना हुआ है. झारखंड और जम्मू कश्मीर में भी पीएम मोदी की लहर कायम है. जम्मू-कश्मीर में भी बीजेपी अच्छा प्रदर्शन कर रही है.

 

चुनाव नतीजों के बाद आज सुबह साढ़े ग्यारह बजे बीजेपी संसदीय दल की बैठक है. इस बैठक में झारखंड में मुख्यमंत्री के नाम और जम्मू-कश्मीर में सरकार को लेकर चर्चा होगी. झारखंड में लोकसभा चुनाव के बाद मोदी का जादू फिर चला है. झारखंड में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी है और कोई भी पार्टी बीजेपी के आस-पास भी नहीं पहुंच पाया.

 

जम्मू कश्मीर में पीडीपी को 28, बीजेपी को 25, नेशनल कान्फ्रेंस को 15 और कांग्रेस को 12 सीटें मिली. वहीं अन्य को 7 सीटें मिलीं.

 

झारखंड में कौन बनेगा मुख्यमंत्री?

सूत्रों के मुताबिक झारखंड में सीएम की रेस में रघुवर दास सबसे आगे बने हुए हैं. इसके अलावा जयंत सिन्हा और सुदर्शन भगत भी सीएम पद की रेस में शामिल हैं. इनके अलावा गणेश मिश्रा और सीपी सिंह के नाम की पर भी संसदीय दल की बैठक में चर्चा की जाएगी. झारखंड में बीजेपी की शानदार जीत पर रांची में बीजेपी कार्यकर्ताओं का जश्न. रांची में जमकर आतिशबाजी हुई और मिठाई बांटी गई.

 

झारखंड में सीएम के बड़े दावेदार बीजेपी के अर्जुन मुंडा चुनाव हार गए. झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और जेवीएम अध्यक्ष बाबू लाल मरांडी गिरिडीह और धनवार दोनों सीटों से चुनाव हार गये. तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री रह चुके अर्जुन मुंडा भी खरसांवा से चुनाव हार गए.

 

झारखंड में पहली बार बनेगी बहुमत की सरकार

वर्ष 2000 में झारखंड राज्य के निर्माण के बाद पहली बार विधानसभा चुनावों में बीजेपी को अपने चुनाव पूर्व गठबंधन साथी आल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन के साथ पूर्ण बहुमत मिला है जिससे यहां एक स्थिर सरकार बनने की संभावना बलवती हुई है.

 

झारखंड के वर्ष 2000 में गठन के बाद कुल नौ सरकारें बन चुकी हैं और तीन बार यहां राष्ट्रपति शासन लग चुका है. राजनीतिक अस्थिरता के बीच पहली बार विधानसभा चुनावों में बीजेपी को अपने गठबंधन सहयोगी आज्सू के साथ बहुमत मिला है. उसे 81 सदस्यीय विधानसभा में 42 सीटें मिली हैं. बीजेपी को 37 और आज्सू को पांच सीटों पर सफलता मिली है.

 

झारखंड में 2000 में बीजेपी के खाते में बिहार से विभाजन के समय 33 सीटें थीं जबकि 2005 के विधानसभा चुनावों में उसे 30 और फिर 2009 में सिर्फ 18 सीटें हासिल हुई थीं.

 

सभी विधानसभा चुनावों में बीजेपी अब तक सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के रूप में उभरी है लेकिन कभी भी उसे अकेले अथवा अपने गठबंधन सहयोगियों के साथ पूर्ण बहुमत नहीं प्राप्त हुआ था.

 

आज्सू को बीजेपी का स्वाभाविक गठबंधन सहयोगी माना जाता है क्योंकि राज्य में जब भी बीजेपी की सरकार बनी है तो उसमें आज्सू भी शामिल रही है. इतना ही नहीं जनवरी, 2013 में राज्य में जब अजरुन मुंडा के नेतृत्व की गठबंधन सरकार से हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झामुमो ने समर्थन वापसी किया था तो आज्सू ने बीजेपी का साथ दिया था और मंत्रिमंडल की बैठक में शामिल होकर विधानसभा भंग करने की अनुशंसा की थी.

 

बीजेपी ने भी अपनी दोस्ती का निर्वाह करते हुए डूबती आज्सू को गठबंधन का सहारा दिया और आज्सू ने सिर्फ आठ सीटें भी लड़कर पांच सीटें जीत लीं जो उसकी 2009 विधानसभा चुनावों की सफलता के बराबर थी.

 

आज्सू ने बाद में हटिया उपचुनाव में जीत दर्ज कर अपनी संख्या छह कर ली थी. इस बार यहां से बीजेपी के उम्मीदवार मैदान में थे. उल्लेखनीय है कि आज्सू प्रमुख सुदेश महतो स्वयं रांची की सिल्ली सीट पर अपनी जीत नहीं कायम रख सके और वह बीजेपी के पूर्व प्रत्याशी और झामुमो की टिकट पर मैदान में उतरे अमित महतो से हार गए जिससे राज्य की नयी सरकार में उनकी दावेदारी को गहरा आघात लगा है.

 

आखिरकार हटिया सीट भी बीजेपी नहीं जीत सकी और उसकी उम्मीदवार सीमा शर्मा को पराजित कर नवीन जयसवाल ने झाविमो के टिकट पर अपनी सीट बरकरार रखी.

 

इससे पूर्व राज्य में बीजेपी ने चार बार सरकार बनायी थी जिसमें बाबूलाल मरांडी के बाद तीन बार उसकी सरकारों का नेतृत्व अजरुन मुंडा ने किया था लेकिन इस बार स्वयं अजरुन मुंडा खरसांवा से चुनाव हार गये.

 

इसके अलावा राज्य में तीन बार जेएमएम प्रमुख शिबू सोरेन मुख्यमंत्री बने लेकिन वह एक बार भी अपना कार्यकाल नहीं पूरा कर सके. 13 जुलाई, 20013 को अंतिम बार जेएमएम के हेमंत सोरेन के नेतृत्व में वर्तमान सरकार का गठन हुआ.

 

इस बीच वर्ष 2006 में दो वर्षों के लिए निर्दलीय मधु कोड़ा के नेतृत्व में कांग्रेस और आरजेडी के समर्थन से सरकार बनी. इस सरकार के दौरान भ्रष्टाचार के कई आरोप लगे.

 

राजनीतिक उठापटक के चलते पिछले 14 वर्षों में राज्य में तीन बार राष्ट्रपति शासन भी लगाना पड़ा है. लेकिन इस बार राज्य को अस्थिरता की समस्या से निजात मिलने की पूरी संभावना है.

 

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जम्मू कश्मीर में कैसे बनेगी सरकार ?

जम्मू कश्मीर में पीडीपी को सबसे ज्यादा 28 सीटें मिली हैं और ऐसा लगता है कि पार्टी ने सरकार बनाने को लेकर सारे विकल्प खुले रखे हैं, ठीक उसी तरह बीजेपी को 25 सीटें मिली हैं और जम्मू क्षेत्र में मिली इस अभूतपूर्व सफलता के साथ पार्टी ने राज्य में अब तक का बेहतरीन प्रदर्शन किया है.

 

जम्मू कश्मीर की 87 सदस्यीय विधानसभा के लिए बीजेपी ने मिशन 44प्लस को लेकर ऐड़ी चोटी का जोर लगा दिया था और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वहां जमकर प्रचार किया, लेकिन घाटी और लद्दाख के मतदाताओं को लुभाने में नाकाम रहे, जहां की 50 सीटों पर पार्टी के हाथ कुछ नहीं लगा.

 

हालांकि पार्टी ने 2008 की 11 सीटों के मुकाबले 25 सीटें जीतीं और उसके लिए सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाने की संभावनाएं खुली हैं. पीडीपी की सीटों की संख्या 21 से बढ़कर 28 हो गई.

 

सत्तारूढ़ नेशनल कांफ्रेंस को चुनाव परिणामों से तगड़ा झटका लगा. पार्टी को पिछले चुनाव में 28 सीटें मिली थीं, जो घटकर 15 रह गईं. मुख्यमंत्री और एनसी के अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला सोनावार सीट से चुनाव हार गए और बीरवाह सीट जैसे तैसे बचाने में कामयाब रहे उन्हें 1000 से कुछ अधिक वोट से जीत मिली.

 

जम्मू कश्मीर में एनसी के साथ सत्ता में भागीदार कांग्रेस 12 सीटों के साथ चौथे स्थान पर सरक गई है. पार्टी के पास पिछली विधानसभा में 17 सीटें थीं. पूर्व पृथकतावादी सज्जाद लोन की जम्मू कश्मीर पीपुल्स कांफ्रेंस ने दो सीटें जीती हैं, जबकि जेकेपीडीएफ (सेक्यूलर) और सीपीआईएम को एक-एक सीट मिली है. निर्दलीय उम्मीदवार तीन स्थानों पर विजयी रहे हैं. नतीजों के बाद विभिन्न दलों की स्थिति साफ हो गई है और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का कहना है कि उनकी पार्टी के लिए सभी तीनों विकल्प खुले हैं.

 

उन्होंने दिल्ली में संवाददाताओं से बात करते हुए कहा, ‘‘सरकार बनाने का विकल्प, सरकार को समर्थन देने का विकल्प और सरकार में शामिल होने का विकल्प, सभी खुले हैं.’’ अन्य सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि अब यह कयास मीडिया को लगाना है कि बीजेपी क्या करेगी. स्थिति पर विचार के लिए पार्टी के संसदीय बोर्ड की कल बैठक होगी.

 

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श्रीनगर में पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने भी सबको अटकलों के बीच छोड़ दिया. उन्होंने कहा, ‘‘हमारी प्राथमिकता जोड़ तोड़ करके सरकार बनाना नहीं है. संभावनाओं का पता लगाने और सरकार बनाने में समय लगेगा ताकि लोगों की आकांक्षाओं को पूरा किया जा सके. यह कहना मुश्किल है कि ऐसा कब होगा.’’ निवर्तमान मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी अपने पत्ते नहीं खोले और सिर्फ इतना दावा किया कि मौजूदा हालात में नेशनल कांफ्रेंस की अनदेखी नहीं की जा सकती. आने वाले कुछ दिनों में जम्मू और कश्मीर में जो कुछ भी होगा एनसी उसमें एक बड़ी खिलाड़ी होगी.

 

उन्होंने सरकार बनाने में अपनी धुर विरोधी पीडीपी का समर्थन करने की पेचीदा संभावना के भी संकेत दिए, जिससे राज्य की चुनावी तस्वीर में एक और रंग उभर आया. उमर ने कहा कि पीडीपी को उनसे संपर्क करना होगा, ‘‘फिलहाल मैं किसी तरह का इंकार या इकरार नहीं कर रहा.’’

 

यह जानना दिलचस्प होगा कि जम्मू कश्मीर में वोटों के बंटवारे के लिहाज से बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है. घाटी और लद्दाख में भले ही पार्टी का खाता नहीं खुल पाया, लेकिन पार्टी 23 प्रतिशत वोट लेकर सबसे आगे रही. पीडीपी को 22.7 प्रतिशत, नेशनल कांफ्रेंस को 20.8 प्रतिशत और कांग्रेस को 18 प्रतिशत वोट मिले.

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