PM मोदी को ममता ने दिया झटका, कहा- जमीन बिल का समर्थन के लिए हरगिज तैयार नहीं

By: | Last Updated: Tuesday, 12 May 2015 2:08 AM

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पश्चिम बंगाल यात्रा से बेअसर राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भूमि अधिग्रहण विधेयक का समर्थन न करने के अपने रूख पर कायम हैं. उन्होंने दो टूक कहा कि वह मोदी सरकार के भूमि अधिग्रहण विधेयक का कतई समर्थन नहीं करेंगी.

तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी का केंद्र के भूमि अधिग्रहण बिल को समर्थन से फिर इनकार कर दिया है. ममता का कहना है कि वो जमीन बिल पर कोई समझौता नहीं करेंगे.

 

बनर्जी ने कहा, ‘‘हम भूमि विधेयक का समर्थन क्यों करें? भूमि विधेयक, कोई समझौता नहीं.’’ तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने कहा, ‘‘यह माटी से जुड़ा है. यह हमारे संघर्ष से जुड़ा है.’’

 

दरअसल विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि ममता ने अंदरखाते नरेन्द्र मोदी के साथ गठजोड़ कर लिया है क्योंकि नरेन्द्र मोदी की कोलकाता यात्रा के दौरान विभिन्न कार्यक्रमों में ममता और मोदी मंच साझा करते नजर आए.

 

हालांकि ममता बनर्जी पहले भी कह चुकी हैं कि उनकी पार्टी भूमि अधिग्रहण विधेयक का समर्थन नहीं करेगी. मोदी की यात्रा से राजनीतिक समीकरण बदलने की विपक्ष की आशंका को गलत साबित करते हुए ममता ने कहा, ‘‘हमने संसद में अपना पक्ष साफ कर दिया है. मैं जबरन भूमि अधिग्रहण के खिलाफ 26 दिन भूख हड़ताल पर रही.’

 

नंदीग्राम और सिंगूर में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ लंबा आंदोलन चलाने वाली तृणमूल कांग्रेस नेता ने कहा कि जबरन भूमि अधिग्रहण के खिलाफ हमारे आंदोलन के कारण ही 1894 के भूमि अधिग्रहण विधेयक को खत्म करने की मांग ने जोर पकड़ा.

 

राज्यसभा में पर्याप्त बहुमत ना होने की वजह से झगड़े में फंसा भूमि अधिग्रहण बिल फंसा हुआ है. दोनों सदनों की संयुक्त समिति को भेजा जाएगा बिल, समिति बिल की जांच करेंगी.

सोमवार को लोकसभा में जमीन अधिग्रहण बिल पेश किया गया. विपक्ष ने बिल के विरोध में लोकसभा में खूब हंगामा किया. जमीन अधिग्रहण बिल के विरोध में विपक्ष की दलील है कि 2013 के बिल में संशोधन कर मोदी सरकार उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाना चाहती है.

 

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साथ ही उन्होंने कहा, ‘‘यदि बंगाल और कोलकाता मजबूत नहीं बन सकते तो देश का कोई हिस्सा मजबूत नहीं बन सकता.’’ दूसरी हरित क्रांति का नेतृत्व पूर्वी राज्यों द्वारा किए जाने पर जोर देते हुए मोदी ने कहा कि इस विचार का मकसद पूर्वी क्षेत्र को देश के पश्चिमी हिस्से से मिलाना है.

 

उन्होंने कहा, ‘‘यदि हम भारत को मजबूत बनाना चाहते हैं तो किसानों का कल्याण सुनिश्चित करना होगा और यदि हम देश का पेट भरना चाहते हैं तो एक दूसरी हरित क्रांति यहां से शुरू की जा सकती है और आर्थिक स्थिति बदली जा सकती है .’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि बंगाल, बिहार और पूर्वोत्तर राज्यों में व्यापक संभावनाएं हैं क्योंकि ये उर्वरा जमीन हैं और यहां पानी भरपूर है .

 

उन्होंने कहा, ‘‘ आप पश्चिमी भारत में व्यापक आर्थिक गतिविधियां देखते हैं लेकिन पूर्वी हिस्सा उपेक्षित रहा है . यदि भारत का एक हिस्सा बीमार है तो देश मजबूत नहीं बन सकता और हमारा प्रयास देश के इस हिस्से का विकास करना है.’’

 

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पश्चिम बंगाल समेत पूर्वी क्षेत्र के कोयला संपदा वाले राज्यों को कोल ब्लाक नीलामी प्रक्रिया से फायदा होगा और खनन वाले इलाकों में रहने वाले आदिवासियों के कल्याण की आधारशिला रखी जाएगी. इससे पूर्व, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्र के विकास के लिए केंद्र और राज्यों को मिलकर काम करना होगा.

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Web Title: modi_mamata_land_acquisition_bill
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