वाजपेयी का उदाहरण देते हुए मोदी ने कश्मीर में विकास के वादे किए

By: | Last Updated: Monday, 8 December 2014 12:04 PM
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श्रीनगर: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कश्मीरी लोगों के दर्द को बांटने में सांप्रदायिक सौहार्द, मानवता और लोकतंत्र की अटल बिहारी वाजपेयी की संकल्पना का उदाहरण दिया और राज्य को विकास की नई उंचाइयों पर ले जाने का वादा किया .

 

घाटी में अपनी पहली चुनावी सभा में उन्होंने कहा, ‘‘कश्मीर के लोगों ने हमें काफी प्यार दिया है और हम पर विश्वास किया है . मैं इस प्यार और विश्वास को ब्याज के साथ विकास के रूप में चुकाउंगा . मैं इस प्यार और मुझ पर दिखाए गए विश्वास के लिए मर भी सकता हूं .’’ रैली में अनुच्छेद 370 को समाप्त करने जैसे विवादास्पद मुद्दों का उन्होंने जिक्र नहीं किया .

 

अपने 30 मिनट के भाषण में मोदी ने पिछले 30 वर्षों के दौरान ‘‘कांग्रेस, पिता..पुत्र और पिता..पुत्री’’ की सरकारों में ‘‘चौतरफा’’ भ्रष्टाचार पर भी प्रहार किया और लोगों से विकास करने के लिए ‘‘एक मौका’’ देने को कहा .

 

परंपरागत कश्मीरी वस्त्र ‘फिरन’ पहने हुए मोदी ने लोगों के साथ रिश्ता जोड़ते हुए कहा, ‘‘मैं प्रधान सेवक के रूप में आपके दुख बांटने आया हूं . आपके दुख मेरे दुख हैं, आपके दर्द मेरे दर्द हैं, आपकी समस्या मेरी समस्या है . मैं कुछ लेने नहीं आया हूं .’’

 

उन्होंने कहा, ‘‘सेना और पुलिस के लोगों के साथ ही निर्दोष युवक भी मारे गए हैं . उनकी क्षति अपूरणीय है और कोई भी इसकी क्षतिपूर्ति नहीं कर सकता लेकिन बांटने से दर्द कम होता है .’’

 

वर्ष 2003 में इसी स्थान पर वाजपेयी के मशहूर भाषण का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा, ‘‘वाजपेयी ने अच्छी शुरूआत की . मैं इसे आगे बढ़ाने आया हूं . इसे आगे बढ़ाना और इंसानियत, कश्मीरियत और जम्हूरियत के सपने को पूरा करना मेरा कर्तव्य है . ये तीन स्तंभ कश्मीर को 21वीं सदी में विकास के रास्ते पर ले जाएंगे .’’

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