मदर टेरेसा को सितंबर में मिलेगा संत का दर्जा: पोप

By: | Last Updated: Tuesday, 15 March 2016 11:00 PM
Mother Teresa to Be Declared a Saint

वेटिकन सिटी: पोप फ्रांसिस ने मदर टेरेसा को संत का दर्जा देने को आज औपचारिक रूप से स्वीकृति प्रदान कर दी और इस कार्य को संपन्न करने के लिए चार सितंबर की तारीख तय की है.

कोलकाता में 45 वर्षों तक गरीबों और बीमार लोगों की सेवा करने वाली मदर टेरेसा के निधन के 19 वर्षों के बाद वेटिकन की ओर से यह कदम उठाया गया है.

वेटिकन की ओर से कोलकाता स्थित ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ के मुख्यालय मदर्स हाउस को भेजे संदेश में कहा गया है, ‘‘पोप फ्रांसिस ने आज मदर टेरसा को संत का दर्जा दिए जाने को स्वीकृति प्रदान कर दी और इसके लिए चार सितंबर की तारीख तय की है.’’ मदर टेरेसा ने मिशिनरीज ऑफ चैरिटी की स्थापना की थी तथा 45 साल का समय गरीबों, बीमार लोगों, अनाथों की सेवा में बिताया. संत का दर्जा किए जाने के कार्यक्रम के स्थान को लेकर वेटिकन की ओर से फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं आई है, हालांकि इसके रोम में होने की संभावना है और धन्यवाद कार्यक्रम बाद में कोलकाता में हो सकता है.

 

साल 1997 में जब मदर टेरेसा का निधन हुआ था तो वह 87 साल की थीं. कई कैथोलिक ने उनको सम्मानित किया और उनको 1979 में शांति का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया.

 

मिशनिरीज ऑफ चैरिटी की सुनीता कुमार ने कहा, ‘‘हमें वेटिकन से आधिकारिक पुष्टि प्राप्त हुई है कि पोप फ्रांसिस ने मदर को संत का दर्जा दिए जाने को स्वीकृति प्रदान कर दी है और इस अलंकरण के लिए चार सितंबर की तारीख तय की है. हम इसको लेकर बहुत उत्साहित और प्रसन्न हैं.’’
आर्चबिशप थॉमस डिसूजा ने कहा कि संतों की सूची में शामिल करने का समारोह अब औपचारिकता मात्र है लेकिन महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा, ‘‘यह आखिरी कदम होता है जिसमें पोप को कार्डिनल और डिक्री पर हस्ताक्षर करने की जरूरत होती है.’’ मिशनरीज ऑफ चैरिटी तथा कोलकाता स्थित दूसरे ईसाई संगठन आगामी दो अक्तूबर को नेताजी इंडोर स्टेडिय में धन्यवाद देने के लिए ‘हॉली मास’ की योजना बना रहे हैं.

 

मिशनरीज ऑफ चैरिटी की नन ने कहा कि मदर की लोकप्रियता देखते हुए रोम में होने वाला कार्यक्रम का सार्वभौमिक महत्व का होगा .

 

सिस्टर प्रेमा और आर्चबिशप डिसूजा इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए रोम जाएंगे.साल 2003 में मदर टेरेसा के ‘बेटीफिकेशन’ के लिए 300,000 से अधिक श्रद्धालु रोम पहुंचे थे. ‘बेटीफिकेशन’ संत का दर्जा दिए जाने की दिशा में पहला कदम है.

 

मदर टेरेसा का जन्म 1910 में मैसीडोनिया में हुआ था. उनके माता-पिता अल्बानियाई थे. करीब 18 साल की उम्र तक मैसीडियोनिया में रहने के बाद वह आयरलैंड पहुंची और फिर भारत की धरती पर कदम रखा.

 

उनको 1951 में भारत की नागरिकता प्रदान की गई और निधन के बाद उनका राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया.आर्चबिशप डिसूजा ने कहा कि वे सितंबर में मदर टेरेसा को संत का दर्ज प्रदान किए जाने के मौके पर कोलकाता में बड़े जश्न की योजना बना रहे हैं.

 

धार्मिक कार्यक्रम में ‘हॉली मास’ शामिल होगा और एक नागरिक कार्यक्रम भी होगा जिसमें अलग अलग हस्तियां मौजूद होंगी. मिशनरीज ऑफ चैरिटी के प्रवक्ता कुमार ने कहा कि नन ने आज शाम विशेष मास और प्रार्थना की है.

 

साल 2002 में वेटिकन ने आधिकारिक रूप से उस चमत्कार को मान्यता प्रदान की थी जिसमें मदर टेरेसा के निधन के बाद 1998 में कैंसर से पीड़ित मोनिका बेसरा नामक आदिवासी बंगाली महिला स्वस्थ हुई.

 

संत का दर्जा दिए जाने की प्रक्रिया के लिए कम से कम दो चमत्कारों की जरूरत होती है. कुमार ने कहा, ‘‘कोलकाता में पहला चमत्कार हुआ था. दूसरा चमत्कार ब्राजील में हुआ था जहां उनके पहले की प्रार्थना से एक व्यक्ति चमत्कारिक रूप से स्वस्थ हुआ था.

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Web Title: Mother Teresa to Be Declared a Saint
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