मुलायम के स्टिंग के पीछे की असली कहानी?

By: | Last Updated: Monday, 13 July 2015 4:27 PM

नई दिल्ली: अमिताभ ठाकुर को सस्पेंड कर दिया गया है. यूपी के आईजी सिविल डिफेंस के पद पर तैनात अमिताभ ठाकुर ने मुलायम सिंह की आवाज की एक ऑडियो क्लिप सार्वजनिक की थी और दावा किया था कि मुलायम सिंह यादव ने उन्हें धमकी दी है.

 

उस स्टिंग के पीछे की कहानी जिसे सार्वजनिक करते ही अमिताभ ठाकुर पर रेप का मुकदमा दर्ज हो गया है.

 

दिल्ली में गृहमंत्रालय में ना गृहमंत्री थे ना गृह राज्य मंत्री लेकिन यूपी के आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने दिल्ली में अपनी सुरक्षा और सीबीआई जांच की मांग केंद्र के सामने रख दी. यूपी के आईजी सिविल डिफेंस के पद पर तैनात अमिताभ ठाकुर ने मुलायम सिंह की आवाज की एक ऑडियो क्लिप सार्वजनिक की थी और दावा किया था कि मुलायम सिंह यादव ने उन्हें धमकी दी है.

ऑडियो क्लिप को सार्वजनिक करने के दूसरे दिन उन पर रेप का मामला दर्ज करवा दिया गया. पुलिस पीड़िता को लेकर अमिताभ ठाकुर के घर जांच के लिए भी पहुंची. मेडिकल जांच में रेप की पुष्टि नहीं हुई है हालांकि पुलिस अभी जांच रिपोर्ट मिलने से इंकार कर रही है. अमिताभ ठाकुर और उनकी पत्नी लगातार इसे बदले की कार्रवाई बता रहे हैं. लेकिन यूपी की समाजवादी सरकार के मुखिया का कहना है कि अमिताभ ठाकुर को धमकी दी ही नहीं गई सिर्फ समझाया गया है.

मुलायम की धमकी जायज कैसे?

मुलायम सिंह यादव पर आईपीएस अमिताभ ठाकुर को धमकी देने का आरोप  

अब आपको बताते हैं कि दरअसल उस ऑडियो क्लिप में जो बात हुई थी उसके पीछे की कहानी क्या है. ऑडियो क्लिप में बार बार जसराना की एक घटना का जिक्र किया जा रहा है. एबीपी न्यूज के पास अमिताभ ठाकुर की वो शिकायती चिट्ठी मौजूद है जिस इस घटना का तफसील से जिक्र है. सुनिए उस चिट्ठी में क्या है.

 

जसराना यूपी का एक विधानसभा क्षेत्र है और ये घटना साल 2006 की है तब अमिताभ ठाकुर फिरोजाबाद में तैनात थे. उस वक्त यूपी की समाजवादी सरकार के विधायक और मुलायम सिंह के समधी रामवीर सिंह ने फिरोजाबाद के चार विधानसभा क्षेत्रों में एक जसराना में मुलायम सिंह के भाई शिवपाल सिंह को बुलाया था. प्रशासन की बदइंतजामी से पार्टी के समर्थक नाराज हो गए और अमिताभ ठाकुर के साथ उलझ गए. तब अमिताभ ठाकुर ने मुलायम सिंह को फोन किया था और मुलायम सिंह ने समर्थकों को समझाया था.

 

ऑडियो क्लिप में मुलायम सिंह जसराना की उसी घटना का जिक्र कर रहे हैं. अमिताभ ठाकुर ने अपनी शिकायत में लिखा है कि उन्होंने मुझे एफआईआर नहीं करने की ताकीद की थी पर मैंने फिर भी थाना एका पर एफआईआर दर्ज करवाया. इस मामले में पहले फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई फिर पुनर्विवेचना में चार्जशीट भी लगी. लेकिन कई गवाहों के मुकर जाने की वजह से रामवीर सिंह और दूसरे आरोपी बरी हो गए.

 

अब विरोधी सवाल उठा रहे हैं कि अमिताभ ठाकुर पर इसी क्लिप को सार्वजनिक करने के बाद रेप का मामला दर्ज कर लिया गया है जबकि मुलायम सिंह पर धमकी देने का मामला दर्ज नहीं किया गया है.

 

अमिताभ ठाकुर पर जो रेप का मामला दर्ज हुआ है उसकी शिकायत दरअसल 31 दिसंबर 2014 को ही करवाने की कोशिश की गई थी लेकिन तब मामला दर्ज नहीं हुआ था. शनिवार को वही महिला यूपी के डीजीपी से मिली और डीजीपी के आदेश पर अमिताभ ठाकुर के खिलाफ बलात्कार का मामला और पत्नी नूतन ठाकुर पर साजिश रचने का मामला दर्ज किया गया है. इसके साथ ही अमिताभ ठाकुर पर दलित ऐक्ट में भी मामला दर्ज किया गया है.

 

क्या है अमिताभ ठाकुर की पहचान?

उत्तर प्रदेश में अमिताभ ठाकुर की दो बड़ी पहचान हैं. एक तो वो पुलिस महकमें के आईजी जैसे बड़े पद पर हैं तो दूसरी तरफ वो आरटीआई कार्यकर्ता भी हैं. डबल रोल वाला ये आईपीएस अधिकारी 23 साल के करियर में 30 तबादले भी देख चुका है.

 

अमिताभ ठाकुर को ये भी पसंद नहीं है कि पुलिस वाले मंत्रियों को गॉर्ड ऑफ ऑनर दें. उन्होंने यूपी के मुख्य सचिव को चिट्ठी लिखकर ये कहा था कि पुलिस वालों को क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले मंत्रियों को गॉर्ड ऑफ ऑनर देने की प्रथा बंद कर दी जाए.

 

ऐसे ही दिलचस्प किस्सों से बनती है इन दिनों यूपी के चर्चित आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की कहानी. अमिताभ ठाकुर को अपने आस पास होने वाली किसी भी गलत बात पर गुस्सा आता है और इस गुस्से को वो अदालती और सामाजिक लड़ाई में बदल देते हैं. आई हेट गांधी नाम के फेसबुक पेज पर गांधी जी के खिलाफ होने वाली टिप्पणियों के बाद अगर फेसबुक ने हटा दिया तो इसके पीछे भी अमिताभ ठाकुर ही थे.

 

47 साल के अमिताभ का जन्म बोकारो में हुआ था जो उस वक्त बिहार का हिस्सा था. केंद्रीय विद्यालय से पढ़ाई पुरी करने के बाद अमिताभ ने आईआईटी कानपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और इसके बाद वो 1992 में आईपीएस में चुने गए.

 

आईपीएस बनने के बाद उन्हें कप्तान के तौर पर यूपी के 7 जिलों में काम करने का मौका मिला. वो बस्ती, देवरिया, बलिया, महाराजगंज, गोंडा, ललितपुर और फिरोजाबाद में तैनात रहे.

 

अमिताभ नेशनल आरटीआई फोरम नाम से एक संस्था चलाते हैं जिसमें देश भर के करीब 150 आरटीआई कार्यकर्ता शामिल हैं. अपनी इस संस्था की ओर से वो करीब 500 आरटीआई आवेदन और 150 जनहित याचिकाएं दायर कर चुके हैं. इसके अलावा अमिताभ मानवाधिकार कार्यकर्ता भी हैं. ये काम वो आईआरडीएस यानी इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च एंड डाक्यूमेंटेशन इन सोशल साइंसेज के जरिए कर रहे हैं.

 

लेकिन अमिताभ ठाकुर ने पुलिस की सेवा के अलावा इस दूसरी दुनिया में कदम क्यों रखा ये भी देख लीजिए. साल 2008 में अमिताभ ठाकुर ने आईआईएम लखनऊ में एक फेलोशिप के लिए स्टडी लीव मांगी थी जिसे तब की मायावती सरकार ने ठुकरा दिया था. अमिताभ ने तब कैट का दरवाजा खटखटाया और सरकार से उनकी लड़ाई साल भर तक चली और साल 2009 में अमिताभ को स्टडी लीव मिल गई. अमिताभ के मुताबिक स्टडी लीव का मुद्दा पहला ऐसा मौका था जब मैंने सरकार के साथ पहली कानूनी लड़ाई शुरू की. उसके बाद से मैं और मेरी पत्नी नूतन ठाकुर ने सामाजिक न्याय के मुद्दों पर सक्रिय तौर पर कानूनी और प्रशासनिक दखल देना शुरू कर दिया.

 

अमिताभ ठाकुर को इस लड़ाई का खामियाजा भी भुगतना पड़ा. साल  2006 में अमिताभ ठाकुर को डीआईजी और साल 2010 में इन्हें आईजी के पद पर प्रमोशन मिलना था. लेकिन गोंडा में कप्तान रहते शस्त्र लाइसेंस में धांधली के मामले में विभागीय जांच बैठा दी गई और मायावती सरकार ने प्रमोशन रोक दिया. साल 2011 में अमिताभ एक बार फिर मामले को CAT में ले गए. एक लम्बी लड़ाई लड़ी और आखिरकार अखिलेश सरकार ने साल 2013 में इनका डाइरेक्ट प्रोमोशन एसपी से आईजी के पद पर कर दिया.

 

अमिताभ ठाकुर का एक तीसरा परिचय भी आपको दे देते हैं. अमिताभ ठाकुर कवि और लेखक भी हैं. उनकी कविताओं की दो किताबें छप चुकी हैं और आईआईएम से निकले नए उद्यमियों के संघर्ष पर लिखी उनकी किताब तो चर्चा भी बटोर चुकी है. अब अमिताभ और उनकी पत्नी दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल पर एक नई किताब की तैयारी में जुटे हैं.

 

अमिताभ ठाकुर की पत्नी नूतन ठाकुर भी सामाजिक कार्यकर्ता हैं. अमिताभ के परिवार में एक बेटा और एक बेटी है जो कानून की पढ़ाई कर रहे हैं. ये बच्चे भी चर्चा में आ चुके हैं. साल 2012 ने जब एबीपी न्यूज निर्मल बाबा के भ्रामक उपायों पर सवाल उठाये थे. उस वक्त अमिताभ ठाकुर के बेटे आदित्य और बेटी तान्या ठाकुर ने भी निर्मल बाबा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी.

 

प्रोमोशन के बाद इन्हे आईजी रूल्स मैन्युअल बनाया गया, जिसके बाद इनका तबादला आईजी सिविल डिफेंस के पद पर कर दिया गया. इन दिनों अमिताभ पर आरोप ये हैं कि विभाग से जुड़े नहीं है उनमें खुद जांच करने चले जाते हैं. कहा जाता है कि बाराबंकी के थाने में जलाने का मुद्दा हो या फिर पत्रकार गजेंद्र की हत्या का हर मामले की जांच अमिताभ ठाकुर ने निजी तौर पर करने की कोशिश की है.

 

अब खुद अमिताभ पर गाजियाबाद की एक महिला ने रेप जैसा संगीन आरोप लगा दिया है तो खुद अमिताभ समाजवादी पार्टी के मुखिया पर पहले धमकाने और अब बदले की कार्रवाई का आरोप लगा रहे हैं.

 

वीडियो देखने के लिए नीचे क्लिक करें-

 

मुलायमVsअमिताभ: स्टिंग के पीछे की कहानी 

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Web Title: mulayam sting on amitabh thakur
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