MUST READ | क्या है याकूब का गुनाह?

By: | Last Updated: Wednesday, 29 July 2015 5:03 AM
Mumbai Blasts 1993: Here is what Yakub Memon did

मुंबई: मुंबई की आर्थर रोड जेल (1994) में अपनी गिरफ्तारी के बाद से साल 2007 तक यानी कुल 13 साल याकूब मेमन इसी जेल में रहा. इसी जेल के भीतर विशेष टाडा अदालत बनाई गई थी, जिसने 12 मार्च 1993 के मुंबई बमकांड के मामले में 12 आरोपियों को फांसीं की सजा सुनाई थी.

 

12 में से 10 आरोपियों की फांसी सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद में तब्दील कर दी, जबकि एक आरोपी की बीमारी से मौत हो गई. अब इस मामले में फांसी की सजा पाने वाला एकमात्र आरोपी बचा है याकूब मेमन. याकूब वो शख्स है जो कभी एक कामयाब चार्टर्ड अकाउंटेंट हुआ करता था लेकिन आज फांसी का फंदा उसका इंतजार कर रहा है.

 

याकूब मेमन अपने क्रिकेट खिलाडी अब्दुल रज्जाक का तीसरा बेटा है. दक्षिण मुंबई के मोहम्मद अली रोड पर आज जिस जगह पर ये रिहायशी टॉवर खडा है, यहां पहले एक चार मंजिला इमारत हुआ करती थी, जिसे कडिया बिल्डिंग के नाम से जाना जाता था. इसी कडिया बिल्डिंग की तीसरी मंजिल के एक छोटे से घर में याकूब मेमन अपने बाकी 5 भाईयों के साथ पला बढा. पास ही के इस्माईल बेग मोहम्मद स्कूल से याकूब और उसके भाईयों ने दसवीं क्लास तक पढाई की. बचपन से ही याकूब को गणित में काफी दिलचस्पी थी और यही वजह थी कि उसने अपना करियर बतौर एक चार्टड अकाउंटेंट बनाना तय किया.

 

1990 में याकूब मेमन चार्टड अकाउंटेंट बन गया और 1991 मे उसने अपने बचपन के दोस्त चेतन मेहता के साथ एक अकाउंटिंग फर्म शुरू की जिसका नाम रखा मेहता एंड मेहता असोशिएट्स…लेकिन ये पार्टनरशिप ज्यादा दिनों तक चल नहीं पाई. 1992 में फर्म बंद हो गई और फिर याकूब ने एक नई फर्म की शुरूवात की जिसका नाम रखा एआर & संस. इसी दौरान उसने अपने भाई अयूब मेमन के साथ तिजारथ इंटरनैशनल नाम की एक एक्सपोर्ट फर्म भी खोली जो कि खाडी देशों में मांस निर्यात का काम करती थी.

याकूब को अपने कारोबार में कामयाबी पर कामयाबी मिलती गई और जल्द ही उसने माहिम की अल हुसैनी इमारत में 6 फ्लैट खरीद लिये. इसी इमारत में पहले से उसके भाई टाईगर मेमन के 2 डुप्लैक्स फ्लैट थे. 1992 में उसने मुंबई के मशहूर इस्लाम जिमखाना में राहीन नाम की लडकी से शादी की. बताया जाता है कि शादी के के मौके पर कई फिल्मी हस्तियां भी मौजूद थीं.

 

1992 में ही अचानकर माहौल बदल गया. अयोध्या में बाबरी ढांचा ढहाये जाने के बाद मुंबई में 2 बार सांप्रदायिक दंगे भडके. पहला दंगा दिसंबर 1992 के पहले हफ्ते में हुआ और दूसरा जनवरी 1993 के पहले हफ्ते में. दंगों के बाद मेमन परिवार में जो कुछ हुआ उसने ही मुंबई सीरियल ब्लास्ट की जमीन तैयार कर दी थी.

 

बाबरी मस्जिद ढहाये जाने के बाद मुंबई में जो दंगे भडके उनमें दंगाईयों ने टाईगर मेमन के दफ्तर को भी जला डाला. उसके बाद से ही टाईगर मेमन के दिल में बदले की आग जल उठी थी और इस आग में वो समूची मुंबई को झुलसा देना चाहता था. इसके लिये उसने पाकिस्तान और दुबई के संपर्कों से मिलकर एक साजिश रची. इस साजिश को अंजाम देने के लिये उसने अपने परिवार का भी इस्तेमाल किया जिसमें याकूब मेमन भी शामिल था.

 

1992 में पिंटो  लेडी जमशेद जी रोड पर उसी सम्राट सोसाइटी में अपनी दुकान चलाता था जहां याकूब मेमन की तिजारथ इंटरनेशनल का दफ्तर था. 1992 के हालात पिंटो को आज भी याद हैं. पिंटो मर्चेंट नेवी से रिटायरमेंट लेकर कॉफिन और शवों को ले जाने के लिए गाड़ियां मुहैया कराता था. मेमन परिवार का पडोसी पिंटो अंडरटेकर बताते हैं, ”आदमी आस-पास से जा रहे थे. वे इसके ऑफिस को जलाने की कोशिश कर रहे थे लेकिम हम उन्हें रोक रहे थे. लेकिन अचानक लोग आ गए और ऑफिस जला दिया.”

 

याकूब मेमन का दफ्तर जलाया गया और इसके बाद बारी थी बदला लेने की. मुंबई पुलिस और सीबीआई का आरोप था कि मुंबई बम धमाकों की साजिश पाकिस्तानी खुफिया एजेंसीं आईएसआई के लिये अंडरवर्लड डॉन दाऊद इब्राहिम ने उसके लिये स्मगलिंग का काम देखने वाले टाईगर मेमन की मदद से अंजाम दिया.

इतनी बडी साजिश को अंजाम देने के लिये पैसे का बडे पैमाने पर लेनदेन होना था और इसके लिये टाईगर मेमन के सीए भाई याकूब मेमन की मदद ली गई. मेमन परिवार के कारोबार का तमाम हिसाब किताब याकूब ही देखता था.

 

बम धमाकों के बाद जब पुलिस ने मेमन के घर की तलाशी ली तो पता चला कि Hsbc bank की इस टर्नर रोड ब्रांच में मेमन परिवार के 4 एनआरआई खाते हैं.पुलिस के मुताबिक दुबई में ब्रिटिश बैंक औफ मिडिल ईस्ट की ओर इन चारों खातों में 61,700 अमेरिकी डॉलर भेजे गये थे, जिनका इस्तेमाल धमाकों की साजिश के लिये होना था. याकूब मेमन को इन सभी खातों को हैंडल करने का अधिकार था.

 

पहला अकाउंट खाता मेमन की पत्नी शबाना के नाम पर, दूसरा खाता उसके भाई अयूब के नाम पर, तीसरा खाता अयूब की पत्नी रेशमा के नाम पर और चौथा खाता सुलेमान मेमन की पत्नी रूबीना के नाम पर था. इसके अलावा डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन बैंक की माहिम शाखा में मेमन की कंपनी तिजारत इंटरनैशनल के खाते थे. इन खातों में भी दिसंबर 1992 और मार्च 1993 के बीच पैसों का भारी लेनदेन हुआ और धमाकों के पहले खातों से पूरी रकम निकाल ली गई. मुंबई क्राईम ब्रांच ने अदालत को बताया कि याकूब ने ही 21 लाख 90 हजार रूपये की रकम मैगनम वीडियो के पार्टनर समीर हिंगोरा और हनीफ कडावाला को दिया ताकि उस पैसे को साजिश में शामिल होने वाले दूसरे सदस्यों के बीच बांटा जा सके.

 

याकूब मेमन पर धमाकों की साजिश को अंजाम देने के लिये सिर्फ पैसों के लेनदेन का ही आरोप साबित नहीं हुआ. टाडा अदालत ने पाया कि उसने साजिश को अंजाम देने के लिये जिन लोगों को पाकिस्तान ट्रेनिंग की खातिर भेजा गया था, उनके हवाई टिकट भी याकूब मेमन ने ही करवाये थे.

 

विस्फोटकों में टाईमर किस तरह लगाना है, हथगोले कैसे फैंकने हैं और बम धमाके के बाद होने वाले दंगों के दौरान एक-47 राईफलें कैसे चलानीं है इसके लिये पाकिस्तानी खुफिया एजेंसीं ने पाकिस्तान में ट्रेनिंग का इंतजाम कर रखा था. टाईगर मेमन ने 15 युवकों को ये ट्रेनिंग दिलाने के लिये दुबई होते हुए पाकिस्तान भेजा. मुंबई पुलिस का अदालत में ये कहना था कि इन युवकों के दुबई और फिर वहां से पाकिस्तान जाने के लिये हवाई जहाज के टिकटों का इंतजाम याकूब मेमन ने ईस्ट वेस्ट ट्रेवैल्स नाम की एजेंसी चलाने वाले शख्स अलताफ अली के जरिये किया था. अलताफ अली को भी टाडा अदालत ने 6 साल जेल की सजा सुनाई.

 

साजिश को अंजाम तक पहुंचाने के लिये पैसों का लेनदेन करने, पाकिस्तान जाने के लिये टिकट का इंतजाम करने के अलावा याकूब पर तीसरा संगीन आरोप साबित हुआ हथियारों को अपने पास रखने और उन्हें बांटने का. मुंबई पुलिस के मुताबिक याकूब ने परिवार के ड्राईवर रफीक माडी को 2 सूटकेस दिये थे जिनमें हथगोले और हथियार भरे थे. ये सूटकेस उसने अमजद मेहेरबक्श और अलताफ अली तक पहुंचाने के लिये कहा था. इसके अलावा याकूब ने धमाकों में इस्तेमाल किये जाने वाले वाहनों की खरीददारी भी की.

 

साजिश में अपने हिस्से की भूमिका अदा करने के बाद याकूब 9 मार्च 1993 को परिवार के बाकी सदस्यों के साथ दुबई रवाना हो गया. मेमन परिवार से अब सिर्फ मुख्य साजिकर्ता टाईगर मेमन ही मुंबई में रह गया था जो 12 मार्च को हुए धमाकों के चंद घंटों पहले ही दुबई के लिये निकला.

 

याकूब मेमन की दलील है कि वो इस साजिश से अंजान था. उसने अदालत में कहा कि जो कुछ भी करवाया वो उसके भाई टाईगर मेंमन ने करवाया और उसका धमाकों से कोई लेना देना नहीं.

 

याकूब मेमन की पत्नी राहीन ने बताया है कि याकूब ने सरेंडर किया है और वह निर्दोष है. राहीन का कहना है कि अगर वह गलत होता तो सरेंडर करने कभी नहीं आता.

 

अदालत में टाडा जज पीडी कोदे ने दूसरे तमाम सबूतों के अलावा परिस्थितिजन्य सबूत यानी ‘circumstancial evidence’ को भी आधार मानते हुए याकूब मेमन को धमाकों का दोषी ठहराया और याकूब मेमन को फांसी की सजा दी. सजा सुनाते वक्त जज कोदे ने ये टिप्पणी भी की कि मेमन परिवार एकसाथ रहता था और ऐसे में ये नामुमकिन है कि परिवार के सदस्यों को ये पता न चले कि क्या हो रहा है.

 

Mumbai Blasts 1993: क्या है याकूब का गुनाह? 

 

याकूब और उसका परिवार भले ही अपनी बेगुनाही को लेकर ये तर्क दे रहा हो कि वो अपने भाई टाईगर के कुकर्मों की सजा भुगत रहा है, लेकिन टाडा अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक ने ये माना कि इस केस में तमाम ऐसे सबूत आये हैं जो कि ये बताते हैं कि याकूब मेमन की साजिश में स्वतंत्र भूमिका भी थी और उसके लिये मौत की सजा से कम कुछ नहीं हो सकता.

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Web Title: Mumbai Blasts 1993: Here is what Yakub Memon did
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