यहां पढ़ें: कहां और कब तक गायब रहेगा प्लेट से चिकन?

By: | Last Updated: Thursday, 10 September 2015 5:05 PM

नई दिल्ली: मुंबई में लोगों की प्लेट से चिकन और मटन दोनों गायब हो गया है क्योंकि दुकानों पर ताला लग गया है. सरकार ने जैन समुदाय के त्योहार के दौरान मीट बेचने पर चार दिन का बैन लगा दिया है. इस आदेश के खिलाफ शिवसेना और एमएनएस सड़क पर हैं. विवाद मुंबई से सटे मीरा भायंदर से शुरू हुआ था. चलिए समझने की कोशिश करते हैं कि किसने और क्यों आपकी प्लेट से चिकन और मटन को हटाया है.

 

चार दिन तक मुंबई में चिकन और मटन बेचने पर पाबंदी लगा दी गई है. जाहिर है जब चिकन औऱ मटन कटेगा ही नहीं तो बिकेगा कैसे और जब बिकेगा ही नहीं तो आपकी प्लेट तक पहुंचेगा कैसे. मुंबई में चिकन मटन के बैन का गुरुवार को पहला दिन था.

 

मुंबई में 10, 13, 17 और 20 सितंबर को चिकन और मटन की दुकानों पर ताला मिलेगा. नवी मुंबई और मीरा भायंदर में 2 दिन चिकन -मटन की दुकानें बंद रहेंगी. वसई विरार में एक दिन बंद रखने का फैसला हुआ है.

 

महाराष्ट्र की तीन महारनगरपालिकाओं के आदेश के खिलाफ एमएनएस कार्यकर्ता हाथ में चिकन लेकर सड़क पर उतर गए. और बाजार भाव पर चिकन बेचकर अपना विरोध दर्ज कराया.

 

कैसे शुरू हुआ विवाद?

 

हर साल सितंबर महीने में जैन समुदाय का पर्यूषण पर्व मनाया जाता है. जैन धर्म में पर्यूषण पर्व का उद्देश्य जीवन को शुद्ध करना है जिसमें क्षमा, सत्य और त्याग जैसे दस नियमों का पालन किया जाता है.

 

विवाद की शुरुआत मुंबई से सटे मीरा भायंदर से हुई जहां आठ लाख की आबादी वाले शहर में सवा लाख की जैन आबादी है. इस पर्व के दौरान पहले भी दुकानें यहां 2 दिन के लिए बंद होती थीं लेकिन 4 सितंबर को मीरा भायंदर नगरमहापालिका ने फैसला किया कि पर्व के दौरान 8 दिन तक चिकन मटन की दुकानें बंद रहेंगी.

 

ये महाराष्ट्र सरकार का चुनावी वादा था जिसे वो पूरा कर रही थी. मेनिफेस्टो में भी इसका जिक्र किया गया था. मीरा भायंदर के बाद मुंबई में भी बीजेपी पार्षद पहले से मौजूद 4 दिन की पाबंदी को 9 दिन तक बढ़ाने की मांग करने लगे.

 

ये पहली बार नहीं हुआ है. राज्य सरकार के साल 2001 के आदेश के मुताबिक महाराष्ट्र में जिन बूचड़खानों को सरकार चलाती है पिछले दस सालों से वो दुकानें जैन समुदाय के पर्यूषण पर्व के दौरान दो से तीन दिनों से लिए बंद होती थीं. इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट भी अपना फैसला सुना चुका है

 

साल 2008 की बात है जब अहमदाबाद नगर निगम ने जैन समाज के कहने पर पर्यूषण पर्व के दौरान सभी बूचड़खानों को बंद रखने का आदेश दिया था. इस आदेश के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. जहां जस्टिस मार्कण्डेय काटजू और जस्टिस एच के सीमा की बेंच ने बूचड़खाने बंद करने का आखिरी फैसला महानगरपालिका पर छोड़ते हुए ये कहा था कि हमें इस मुद्दे पर एक संतुलित नजरिया रखना होगा. जैन धर्म को मानने वाले काफी लोग राजस्थान और गुजरात में रहते हैं. उनकी भावनाओँ का ख्याल रखते हुए साल में नौ दिन नॉन वेज खाने वाले शाकाहारी रह सकते हैं. जस्टिस काटजू ने अपना आदेश सुनाते हुए अकबर का हवाला दिया था.

 

1582 में अकबर ने अपने दरबार में जैन समुदाय को आमंत्रित किया था. जैन समुदाय की अहिंसा नीति ने अकबर को काफी प्रभावित किया था. कहा जाता है कि अकबर कई महीनों तक मांस खाना यहां तक कि शिकार करना भी छोड़ दिया था. 1587 में अकबर ने साल में 6 महीने जानवरों के शिकार पर रोक लगा दी थी.

 

जस्टिस काटजू ने कहा था कि अगर अकबर साल में 6 महीने मांस खाना छोड़ सकता है तो फिर अहमदाबाद में एक साल में 9 दिन मांस खाना क्यों नहीं छोड़ा जा सकता.

 

जैन समुदाय के लिए सुप्रीम कोर्ट का ये आदेश बाकी राज्यों में ही मिसाल बनने का काम करने लगा. खाने के अधिकार पर शुरु हुआ ये विवाद राजनीतिक रंग ले चुका है. महाराष्ट्र में मीट पाबंदी को बढ़ाने के खिलाफ बीजेपी और शिवसेना आमने-सामने हैं.

 

अल्पसंख्यक माने जाने वाले जैन समाज की आबादी 14 लाख है. 2014 में मुंबई महानगरपालिका में पहली बार राज्य सरकार ने 2 दिन के मीट बैन को बढ़ाकर 4 दिन कर दिया था. तब राज्य में कांग्रेस एनसीपी की सरकार थी. जबकि इससे भी पहले मुंबई महानगरपालिका में 1964 और 1994 में मीट बैन के खिलाफ रेजोल्यूशन पास हुआ था.

 

बैन के खिलाफ मीट कारोबारियों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका लगाई है जिस पर शुक्रवार को सुनवाई होनी है. मीट पर बैन की ये तलवार सिर्फ महाराष्ट्र में ही नहीं बल्कि हरियाणा और राजस्थान में भी चल चुकी है. राजस्थान में तीन दिन के बैन का लगाया गया है.

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Web Title: Mumbai meat ban
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