खास रिपोर्ट: देश के खस्ताहाल SEZ सेक्टर में उम्मीद की किरण जगाता मुंद्रा!

By: | Last Updated: Sunday, 12 July 2015 6:35 AM
mundra_sez_special_report

नई दिल्ली: दुनिया में जब भी एसईजेड आधारित विकास की बात आती है, दिमाग़ में कौंधते हैं चीन के एसईजेड. दरअसल चीन की आर्थिक समृद्धि का बड़ा कारण है वहां के बड़े-बड़े एसईजेड से होने वाली विदेशी मुद्रा की कमाई ही. भारत में भी यही सोचकर वर्ष 2006 में एसईजेड कानून को अमल में लाया गया. अगले एक दशक में चार सौ से भी अधिक एसईजेड को मंज़ूरी दी गई जिसमें दो सौ दो चालू भी हुए, लेकिन जो उम्मीद थी, वो मोटे तौर  पूरी नहीं हुई. कारण अनेक रहे. छोटे आकार से लेकर जरुरी सुविधाओं की कमी एक तरफ़, तो ज़मीन अधिग्रहण को लेकर लगातार बढ़ता विवाद. हद तो ये हुई कि जिस कांग्रेस की अगुआई वाली यूपीए सरकार ने वर्ष 2005 में एसईजेड बिल को पास कराया, उसी के शीर्ष नेता एसईजेड को ही जमीन पचाने की तकनीक बताने लगे.

 

लेकिन राजनीतिक विवाद के बीच देश में जिन चुनिंदा एसईजेड ने आर्थिक विकास और विदेशी मुद्रा की कमाई के नजरिए से उम्मीद की किरण जगाई है, उसमें सबसे आगे है अदाणी समूह का मुंद्रा एसईजेड. ये एसईजेड गुजरात के कच्छ जिले के मुंद्रा इलाक़े में है, जो नब्बे के दशक तक देश के सबसे पिछले इलाकों में था. लेकिन महज डेढ दशक में ये इलाक़ा एसईजेड और इससे जुड़े बंदरगाह के कारण देश के बड़े आर्थिक केंद्रों में से एक बन चुका है. मुंद्रा पोर्ट यानी देश में पूर्ण निजी स्वामित्व का सबसे पहला और सबसे बड़ा बंदरगाह, जो चालू हुआ 1998 में, लेकिन लगातार अपनी क्षमता और सुविधाएँ बढाता रहा. यही वजह है कि वित्त वर्ष 2013-14 में इसने दस करोड़ टन माल ढुलाई का रिकार्ड बना लिया. हर मौसम में चालू रहने वाले इस बंदरगाह के कारण ही मुंद्रा एसईजेड भी खास बन चुका है, जिसकी शुरुआत 2006 में हो गई थी यानी तभी जब केंद्र सरकार ने एसईजेड कानून को लागू किया.

 

 

करीब साढ़े छह हजार हेक्टेयर इलाके में फैले मुंद्रा एसईजेड में फिलहाल दर्जन भर से भी अधिक औद्योगिक इकाइयां काम कर रही हैं, जो मोटे तौर पर कपड़ा और वस्त्र उद्योग से जुड़ी हुई हैं. इसके अलावा यहां प्लास्टिक, इंजीनियरिंग, एग्रो प्रोडक्ट्स और इलेक्ट्रानिक्स से जुड़ी इकाइयों की भी शुरुआत होने जा रही है, यानी मॉडल क्लस्टर बेस्ड डेवलपमेंट का, कुछ वैसे ही जैसा चीन में देखा जाता है. मुंद्रा पोर्ट एंड एसईजेड के सीईओ कैप्टन उन्मेष अभ्यंकर का कहना है कि मुंद्रा एसईजेड में जिस तरह की सुविधाएँ हैं, वैसी देश के दूसरे एसईजेड में नहीं हैं. यही वजह है कि बाक़ी दो सौ चालू एसईजेड के मुक़ाबले मुंद्रा में निवेश और औद्योगिक इकाइयाँ, दोनों में बढ़ोतरी हो रही है.

 

दरअसल अदाणी समूह की मुंद्रा एसईजेड की सबसे बड़ी खासियत इसका सड़क, रेल, जल और हवाई, यानी यातायात के सभी साधनों से जुड़ाव है. एक तरफ जहां राष्ट्रीय राजमार्ग, एनएच 8ए इसे मुंबई और दिल्ली को जोड़ने वाले एनएच8 से लिंक करता है, तो निजी तौर पर विकसित किया गया 78 किलोमीटर लंबा रेल ट्रैक, एसईजेड को आदीपुर से मिलाते हुए भारतीय रेल के व्यापक नेटवर्क से जोड़ता है.

 

एसईजेड के अंदर ही हवाई अड्डा भी है, तो साढ़े 18 मीटर की गहराई वाला बंदरगाह भी इसका हिस्सा है, जहां बड़े से बड़े मालवाहक जहाज आ सकते हैं. इसकी वजह से एक तरफ जहां पूरे उत्तर और पश्चिम भारत से यहां आसानी से कच्चा माल और सामान पहुंचता है, तो तैयार माल बंदरगाह के जरिये निर्यात हो जाता है. कच्चे माल का आयात भी आसान है. बंदरगाह की सुविधा होने के कारण तैयार माल की बंदरगाह तक ढुलाई का खर्च शून्य, जबकि बंदरगाह से चार सौ किलोमीटर की दूरी पर मौजूद किसी भी दूसरे एसईजेड के मामले में प्रति टन औसतन हजार रुपये का ढुलाई खर्च अधिक. जाहिर है, किसी भी एसईजेड की सफलता के मूल मंत्र में से एक है तैयार माल की ढुलाई का कम खर्च और इसी वजह से मुंद्रा एसईजेड हो जाता है काफी आकर्षक और कमाउ. यही वजह है कि वित्त वर्ष 2014-15 में मुंद्रा पोर्ट और एसईजेड ने करीब 3400 करोड़ रुपये का कारोबार किया है. अभ्यंकर का कहना है कि अच्छी कनेक्टिविटी ही मुंद्रा एसईजेड की सफलता में सबसे बड़ी भूमिका निभा रही है.

 

देश के सबसे बड़े ऑपरेशनल एसईजेड का तमगा हासिल करने वाले मुंद्रा एसईजेड की कुछ खासियतें और भी हैं. मसलन, इसके अंदर ही 4620 मेगावाट के बिजली संयंत्र का मौजूद होना, जो देश का सबसे बड़ा सिंगल लोकेशन पावर प्लांट भी है. इसकी वजह से एसईजेड की सभी इकाइयों को 24 घंटे बिजली मुहैया है. यही नहीं, इस एसईजेड में औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने के लिए न सिर्फ काफी अधिक जगह मुहैया है, बल्कि सिंगल विंडो क्लियरेंस की सुविधा भी मौजूद है. ताजे पानी से लेकर सीवेज और प्रदूषित पानी के ट्रीटमेंट की सुविधा तो है ही, साथ में स्कूल, अस्पताल और रिहाइशी सुविधाएं भी. इन सब सुविधाओं की वजह से एक तरफ जहां यहां औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने में आसानी है, वही सभी किस्म की यातायात सुविधाओं के मौजूद होने से माल की ढुलाई भी आसान. यानी एक तरफ उत्तर और पश्चिम भारत से यहां पर माल लाना, ले जाना आसान, तो दूसरी तरफ बंदरगाह के जरिये एक्सपोर्ट-इंपोर्ट आसान.

 

यही वजह है कि मुंद्रा एसईजेड न सिर्फ देश का सबसे बड़े एसईजेड बन चुका है, तो सबसे सफल और कमाउ एसईजेड भी. कारोबार करने में आसानी, आधारभूत ढांचे की मौजूदगी और उत्पादन व परिवहन पर कम खर्च. सफलता का यही वो मूल मंत्र है, जो चीन में भी एसईजेड के जरिये समृद्धि लाता है, तो भारत में मुंद्रा जैसे एसईजेड की कामयाबी को संभव बनाता है.

India News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: mundra_sez_special_report
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017