मुस्लिम धर्म में ये पाबंदिया झेलती हैं महिलाएं

By: | Last Updated: Saturday, 6 February 2016 6:41 PM
MUSLIM WOMENS AND their struggle

नई दिल्लीः मुस्लिम महिलाओं की हालत भी कमोबेश कुछ ऐसी ही है. 1 से ज्यादा शादियों की इजाजत और फिर बोलकर ही तलाक देने की परंपरा ने मुस्लिम महिलाओं को कमजोर कर रखा है और रही-सही कसर धर्म ने पूरी कर दी है.

मुस्लिम समुदाय की महिलाओं की हालत ये है कि खुद सुप्रीम कोर्ट को संज्ञान लेना पड़ा. मुस्लिम समुदाय में सिर्फ तीन बार तलाक कह देने से तलाक हो जाता है, एक पत्नी के रहते दूसरी महिला से शादी की भी इजाजत है लेकिन इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई है और छह हफ्ते में सरकार के वकील यानि अटॉर्नी जनरल से जवाब दाखिल करने को कहा गया है. जस्टिस अनिल दवे की अध्यक्षता वाली दो जजों की बेंच ने इसपर संज्ञान लेते हुए कहा था कि हमें इस बारे में विचार करना होगा कि मुस्लिम समाज में प्रचलित मौखिक तिहड़ा तलाक और एक पत्नी के रहते दूसरे विवाह का प्रचलन संविधान की कसौटी पर खरा उतरता है या नहीं. कहीं ये महिलाओं को गैरबराबरी की स्थिति में तो नहीं डालता. संविधान से हर नागरिक को मिले समानता और सम्मान के साथ जीवन के अधिकार का इस तरह से उल्लंघन तो नहीं होता’

तो दूसरी तरफ अदालत में मौजूद जमीयत उलेमा ए हिंद के वकील ने बेंच से कहा कि,’हम इस कार्रवाई को खत्म करने की मांग करते हैं और इसका आधार मुस्लिम पर्सनल लॉ है.’
मुस्लिम महिला संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट के इस कदम का स्वागत किया है. उधर, दरगाहों में प्रवेश को लेकर भी मुस्लिम महिलाएं लड़ाई लड़ रही हैं.

मुंबई की हाजी अली दरगाह में मुस्लिम महिलाओं को मजार तक जाने की इजाजत नहीं है और इसी के विरोध में मुस्लिम महिलाओं ने आजाद मैदान में धरना दिया. मुस्लिम महिलाओं का ये धरना इस तरफ इशारा था कि अगर हिंदू महिलाएं शनि शिंगणापुर मंदिर में प्रवेश के लिए लड़ाई लड़ सकती हैं तो वो भी दरगाहों में प्रवेश की मांग के लिए लड़ाई लड़ने को तैयार हैं. भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन ने बॉम्बे हाईकोर्ट में हाजी अली दरगाह में प्रवेश की मांग को लेकर एक जनहित याचिका दायर कर रखी है. दिल्ली में हजरत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह में भी मुस्लिम महिलाओं को प्रवेश करने और इबादत करने की मनाही है. भारत की सबसे बड़ी जामा मसजिद में महिलाएं प्रवेश तो कर सकती हैं लेकिन वो मीनार के अंदर अकेले नहीं जा सकती हैं. यदि वो किसी पुरुष के साथ आईं हों तब ही ऐसा किया जा सकता है. मगरिब की नमाज के बाद यहां महिलाओं का प्रवेश पूरी तरह से वर्जित है. और सबसे बड़ी बात ये है कि देश की किसी भी छोटी या बड़ी मस्जिद में मुस्लिम महिलाओं को नमाज पढ़ने का अधिकार नहीं है.

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Web Title: MUSLIM WOMENS AND their struggle
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