MUST KNOW: कौन थे नेताजी सुभाष चंद्र बोस

By: | Last Updated: Saturday, 23 January 2016 10:42 AM
MUST KNOW: Whos was Netaji Subhash Chandra Bose

नई दिल्ली: भारत की आजादी के नायक रहे नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को ओडिशा के कटक में एक बंगाली परिवार के घर में हुआ था. सुभाष चंद्र बोस की शुरुआती पढ़ाई कटक के ही रेवेंशॉव कॉलेजिएट स्कूल में हुई. उसके बाद उनकी पढ़ाई कोलकाता के प्रेसिडेंसी कॉलेज और स्कॉटिश चर्च कॉलेज में हुई. बाद वो इंडियन सिविल सर्विस की तैयारी के लिए इंग्लैंड गए. सुभाष चंद्र बोस ने सिविल सर्विस की परीक्षा ना केवल पास की बल्कि चौथा स्थान भी प्राप्त किया. भारत की गुलामी से चिंतित सुभाष चंद्र बोस ने इंडियन सिविल सर्विस छोड़कर भारत लौट आए और स्वतंत्रता के लिए आंदोलन कर रही राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़ गए.

साल 1938 और 1939 में वो दो बार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष निर्वाचित हुए. 1939 के कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव में उनका मुकाबला पट्टाभि सीतारमैया से था जिन्हें महात्मा गांधी ने खड़ा किया था. लेकिन महात्मा गांधी के साथ होने के बावजूद पट्टाभि सीतारमैया हार गए. दरअसल महात्मा गांधी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की कार्यपद्धति पसंद नहीं थी. महात्मा गांधी ने कांग्रेस सदस्यों से कह दिया कि अगर वो बोस की बातों से सहमत नहीं है तो वो कांग्रेस से हट सकते हैं.

इसके बाद कांग्रेस कार्यकारिणी के 14 में से 12 सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया. जवाहरलाल नेहरू तटस्थ बने रहे और अकेले शरदबाबू ही सुभाष के साथ रहे. उसी समय साल 1937 में सुभाष चंद्र बोस ने अपनी सेक्रेटरी और ऑस्ट्रेलियन युवती एमिला से शादी की.

बोस का मानना था कि अंग्रेजों के दुश्मनों से मिलकर आजादी हासिल की जा सकती है. उनके विचारों के देखते हुए उन्हें ब्रिटिश सरकार ने कोलकाता में नज़रबंद कर लिया लेकिन वह अपने भतीजे शिशिर कुमार बोस की सहायता से वहां से भाग निकले. वह अफगानिस्तान और सोवियत संघ होते हुए जर्मनी जा पहुंचे. जहां उन्होंने हिटलर से मुलाकात की. साल 1943 में वो जर्मनी छोड़कर जापान पहुंचे और फिर वहां से सिंगापुर पहुंचे. उस वक्त रास बिहारी बोस आज़ाद हिंद फ़ौज के नेता थे. बाद में उन्होंने नेताजी सुभाषचंद्र बोस को आज़ाद हिन्द फौज़ का सर्वोच्च कमाण्डर नियुक्त करके उनके हाथों में इसकी कमान सौंप दी.

नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आज़ाद हिंद फ़ौज का पुनर्गठन किया.महिलाओं के लिए रानी झांसी रेजिमेंट का भी गठन किया जिसकी कैप्टन लक्ष्मी सहगल बनी. नेताजी अपनी आजाद हिंद फौज के साथ 4 जुलाई 1944 को बर्मा पहुंचे. यहीं पर उन्होंने अपना प्रसिद्ध नारा, “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा” दिया.

ऐसा कहा जाता है कि 18 अगस्त 1945 को टोक्यो जाते समय ताइवान के पास नेताजी की एक विमान दुर्घटना में मौत हो गई थी.

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Web Title: MUST KNOW: Whos was Netaji Subhash Chandra Bose
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