मुजफ्फरनगर दंगा: जस्टिस सहाय रिपोर्ट में नेताओं को क्लीन चिट, अफसरों पर गाज

By: | Last Updated: Sunday, 6 March 2016 5:03 PM
muzaffarnagar riots probe report tabled in UP assembly

नई दिल्ली: मुजफ्फरनगर के साल 2013 के सांप्रदायिक दंगों की जांच के लिए गठित आयोग ने अखिलेश सरकार के नेताओं को क्लीन चिट दी है, लेकिन अधिकारियों को दोषी पाया है.

रिपोर्ट के मुताबिक तत्कालीन SSP सुभाषचंद्र दूबे और स्थानीय इंटेलीजेंस इंस्पेक्टर प्रबल प्रताप सिंह को सीधे तौर पर दंगों के लिए जिम्मेदार माना गया है. इसके साथ ही रिपोर्ट में तत्कालीन जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा की भूमिका को भी संदिग्ध माना गया है.

बीजेपी विधायक संगीत सोम की भूमिका पर रिपोर्ट में कहा गया है कि संगीत सोम समेत 200 लोगों पर फेक वीडियो के मामले जांच चल रही है. सरकार की तरफ से इस पर अभी तक कोई एक्शन नहीं लिया गया है.

रिपोर्ट में कहा गया कि भड़काऊ भाषणों के लिए सीधे तौर पर कोई नेता जिम्मेदार नहीं है. ज्यादातर महापंचायत में लोलक इंटेलीजेंस यूनिट की असफलता है. जिसकी वजह से पंचायत में आने वाली भीड़ का सही आंकलन नहीं हो सका.

इस रिपोर्ट में किसी भी नेता के भड़कऊं भाषाण को जिम्मेदार नहीं माना गया है बल्कि स्थानीय पंचायत और पुलिस को इस दंगे का जिम्मेदार बताया गया है.

अखिलेश सरकार ने दंगों की जांच के लिए गठित जस्टिस विष्णु सहाय आयोग की रिपोर्ट को रविवार को विधानसभा में पेश किया. इस आयोग का गठन 9 सितंबर 2013 को किया गया था. आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए दो महीने का समय दिया गया था, और कुल सात बार इस आयोग के कार्यावधि में बढ़ोतरी की गई.

क्या है मुजफ्फरनगर दंगा?

 मुजफ्फरनगर मेें साल 2013 में बड़ा समुदायिक दंगा हुआ था. जिसमें 60 लोगों की मौत हो गई थी और 40,000 लोग बेघर हो गए थे. अभी भी मुजफ्फरनगर से बेघर हुए लोग शरणार्थी कैंप में रह रहे हैं.

 मुजफ्फरनगर को लेकर कुल 567 मुकदमे दर्ज किए गए हैं.

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Web Title: muzaffarnagar riots probe report tabled in UP assembly
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