म्यामांर में भारतीय सेना: कब, क्या और कैसे?

By: | Last Updated: Wednesday, 10 June 2015 1:32 PM

नई दिल्ली: भारतीय सेना की तरफ से 9 जून यानी मंगलवार को सीमा पार जाकर उग्रवादियों को दिए गए मुंहतोड़ जवाब के बाद सूत्रों के हवाले से खबर है कि सेना एक बार फिर उग्रवादियों के खिलाफ और ऑपरेशन कर सकती है.

 

सूत्रों के मुताबिक खुफिया विभाग को जानकारी मिली है कि म्यांमार सीमा पर उग्रवादियों के 61 कैंप चल रहे हैं. जिसमें हर कैंप में 30-40 उग्रवादी है. आपको बता दें कि म्यांमार ऑपरेशन में सेना की कार्रवाई में अब तक 38 उग्रवादियों के मारे जाने की पुष्टि हो गई है जबकि 7 घायल उग्रवादी भागने में कामयाब. सूत्रों की मानें तो खापलांग गुट का मुखिया इस कार्रवाई में बच निकला है.

 

56 इंच का सीना

 

आपको बता दें कि म्यांमार की सीमा में घुसकर सेना ने कल सुबह चालीस से ज्यादा उग्रवादियों को मार गिराया. अब सरकार के मंत्री इसे मोदी के 56 इंच सीने का कमाल बता रहे हैं वहीं कांग्रेस का कहना है कि इसका सारा श्रेय सेना को जाता है मोदी का कोई कमाल नहीं.

आपको बता दें कि मंगलवार शाम को जब से सेना द्वारा इस ऑपरेशन की पुष्टि की गई तभी से सोशल मीडिया पर खासकर फेसबुक और ट्विटर पर 56 इंच का सीना ट्रेंड करने लगा और लोंगो के बीच चर्चा का केंद्र बन गया.

 

म्यामांर:- कब और कैसे?

 

म्यांमार की सीमा में घुसकर सफल ऑपरेशन के बाद की ये तस्वीरें सेना ने जारी की हैं. पहली तस्वीर में सेना की एलीट फोर्स पारा कमांडोज के 35 सैनिक दिख रहे हैं जो कामयाब ऑपरेशन के बाद लौटे हैं और दूसरी तस्वीर ऑपेरशन के लिए हेलिकॉप्टर से उतरते जवानों की हैं.

 

इन्हीं जवानों को हेलिकॉप्टर के जरिये मणिपुर और नागालैंड की सीमा से सटे म्यांमार में उग्रवादियों के दो ठिकानों पर उतार दिया गया. आपको बता दें कि पैंतालीस मिनट के भीतर मंगलवार तड़के इस ऑपरेशन को अंजाम दिया गया.

 

सूत्रों के मुताबिक सेना को इन कैंपों की जानकारी बहुत पहले से थी लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एनएसए अजीत डोभाल से हरी झंडी मिलने के बाद सेना ने ऑपरेशन की तैयारी कर ली और एक साथ दुश्मनों के दो ठिकानों पर हमला बोल दिया.

 

सरहद पार जाकर हुए सेना के सफल ऑपरेशन पर सेना में मेजर रह चुके और अब मोदी सरकार में सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री राज्यवर्धन राठौड़ ने ट्वीट किया भारतीय सेना ने दुश्मनों के घर में घुसकर हमला किया. देश के दुश्मनों को करारा जवाब. कुशल नेतृत्व, मजबूत सरकार पीएम. 56 इंच का कमाल पीएम के फैसले और सेना के जज्बे की हर जगह तारीफ हो रही है लेकिन कांग्रेस पीएम को इसका क्रेडिट देने को तैयार नहीं है.

 

दिग्विजय सिंह ने कहा है कि सरकार अपनी नाकामी छिपाने के लिए इसका श्रेय ले रही है. दिग्विजय ने कहा कि हम पीएम को इसका क्रेडिट क्यों दें? सेना ने यह काम किया है. वहीं केद्रिय गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू का कहना है कि सबने मिलकर काम किया. तभी यह संभव हो सका है.

 

वहीं इसके जवाब में स्वामी ने कहा कि पहले नाम तक नहीं लिया जाता था लेकिन सरकार ने हिम्मत दिखाई और दस साल बाद ऐसा संभव हो सका.

 

आपको बता दें कि दिग्विजय ने राठौड़ के ट्वीट पर पीएम के छप्पन इंच के सीने पर भी मजाक उड़ाया है. इस बात पर दिग्विजय ने कहा कि उनसे पूछिए की सीना नापा है क्या? टेलर ने कहा है कि उनका सीना 56 इंच का नहीं है.

 

हालांकि इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक म्यामांर से इजाजत नहीं मिलने की वजह से दस साल से ऐसा ऑपरेशन रुका हुआ था लेकिन विदेश मंत्रालय की कोशिशों के बाद इसी साल ऑपरेशन को मंजूरी मिली.

 

आपको बता दें कि भारतीय सेना करीब दस साल से म्यांमार में ऐसी कार्रवाई करना चाह रही थी लेकिन म्यांमार से इसकी इजाजत नहीं मिल रही थी. भारतीय सेना को इस बात की पक्की जानकारी थी कि सीमा पर 15-20 किलोमीटर के दायरे में NSCN-खाप्लांग गुट का ठिकाना है.

 

इसके बाद भारत ने पूरी जानकारी म्यांमार को दी और इस साल की शुरुआत में म्यांमार ने NSCN-खाप्लांग गुट के खिलाफ कार्रवाई करने को मंजूरी दी.

सूत्रों की मानें तो सात जून को ही बांग्लादेश से लौटते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हमले के लिए हरी झंडी दे दी थी. इससे पहले एक हाईलेवल मीटिंग में म्यांमार में घुसकर हमला करने का फैसला हुआ था.

 

आपको बता दें कि 4 जून को नॉर्थ ब्लॉक में एक बैठक हुई. बैठक में रक्षा मंत्री, गृह मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, रॉ प्रमुख के अलावा सेना प्रमुख भी मौजूद थे.. मीटिंग में सेना प्रमुख ने बताया कि हमला करने में कुछ मुश्किलें हैं. अगले दिन डोभाल इम्फाल गए.

इसी महीने चार जून को उग्रवादियों के हमले में 18 जवान शहीद हो गए थे और उग्रवादी सीमा पार बैठकर और भी हमले की योजना बना रहे थे लेकिन सेना ने सीमा पार जाकर उग्रवादियों के मंसूबों को नाकाम कर दिया.

 

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