कौन कितने सहिष्णु और असहिष्णु ?

By: | Last Updated: Monday, 2 November 2015 3:11 PM

नई दिल्ली: पिछले साल-डेढ़ साल से ज्ञानी-अज्ञानी हर किस्म के लोग प्रधानमंत्री मोदी की हर रोज हर तरह के प्लेटफॉर्म पर खूब खिंचाई कर रहे हैं. जमकर आलोचना करते हैं. तरह तरह की उपमाओं का इस्तेमाल करते हैं. लोग बोलने की आजादी का भरपूर इस्तेमाल करते हैं लेकिन ये कह कर छाती पीट रहे हैं कि मोदी सरकार सहिष्णु नहीं है.

 

मुझे लगता है कि मोदी ने जिस सहिष्णुता का परिचय दिया है इसके लिए पीएम बधाई के पात्र हैं. मैं चाहूंगा कि मोदी इसी तरह सहिष्णुता का परिचय देते रहें.

 

प्रधानमंत्री अगर सहिष्णु नहीं हो तो क्या होता है, उसकी कुछ बानगी देखिए. प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी के दौरान सेंसरशिप लगाया. प्रेस से मनमाफिक लिखवाया. जिसने नहीं लिखा उसे तिहाड़ भिजवाया. इंदिरा गांधी के बेटे राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे. बोफोर्स घोटाला हुआ.

 

बोफोर्स का पर्दाफाश करने वाले इंडियन एक्सप्रेस के ऊपर इनकम टैक्स के सौ से ऊपर मुकदमे ठुकवा दिये. इतना ही नहीं मीडिया पर अंकुश लगाने के लिए राजीव गांधी ने मानहानि विधेयक लाने की कोशिश की. 

 

जानी मानी पत्रकार तवलीन सिंह ने आरोप लगाया है कि मनमोहन सिंह (सोनिया गांधी) की सत्ता के दौरान तवलीन के कॉलम को इंडियन एक्सप्रेस से हटाने की कोशिश की गई. ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि तवलीन ने ये कह कर आलोचना की थी कि असली सत्ता मनमोहन सिंह के पास नहीं बल्कि सोनिया गांधी के पास है.

 

मोदी के आए करीब डेढ़ साल से ज्यादा वक्त गुजर चुका है. क्या किसी को कांग्रेस के इन सहिष्णु प्रधानमंत्रियों की तरह बोलने से कभी रोका गया है?

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Web Title: Narendra Modi
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