ABP SPECIAL: क्या पीएम मोदी भी चौंक जाएंगे?

By: | Last Updated: Thursday, 24 September 2015 5:31 PM
narendra modi_america

नई दिल्ली: एबीपी न्यूज आप तक लगातार नरेंद्र मोदी के दूसरे अमेरिका दौरे की सुर्खियां पहुंचा रहा है लेकिन इस वक्त हम उसी अमेरिका दौरे से जुड़ी एक चौंकाने वाली रिपोर्ट बताने जा रहे हैं.

 

जब गूगल, फेसबुक और टेस्ला के दफ्तर जाएंगे पीएम मोदी

 

नरेंद्र मोदी दरअसल अपने दौरे के आखिरी दिन कुछ ऐसे दफ्तरों में जा रहे हैं जो दुनिया में अपनी डिजाइन और काम करने के तरीके के लिए मशहूर हैं. आप भी जानिए आखिर हम ऐसा क्यों कह रहे हैं. नरेंद्र मोदी के अमेरिका दौरे का आखिरी दिन 27 सितंबर है. इसी दिन वो फेसबुक के कैलीफोर्निया के हेडक्वार्टर का दौरा करेंगे.

 

एबीपी न्यूज आज आपको फेसबुक के मुखिया मार्क जुकरबर्ग की जुबानी सुनाएगा फेसबुक के दफ्तर की कहानी. आपको गूगल के उस दफ्तर का नजारा भी दिखाएगा जो मोदी के सामने होगा. चंद पलों में आप देखेंगे कि कैलिफोर्निया में मौजूद गूगल ये दफ्तर आखिर दफ्तर जैसा क्यों नहीं है?

 

फेसबुक के दफ्तर पहुंच मोदी भी चौंक जाएंगे?

 

मोदी के इस दौरे में शामिल है कैलीफोर्निया में ही मौजूद कंपनी टेस्ला का दफ्तर टेस्ला बैटरी से चलने वाली कार बनाने की सबसे बड़ी कंपनी है. एबीपी न्यूज पर आज आप इन तीनों दफ्तरों की ऐसी तस्वीरें देखने जा रहे हैं जो आपने इससे पहले कभी नहीं देखी.

 

फेसबुक – अब तक आपने इसे तो अपने मोबाइल पर देखा होगा या फिर लैपटॉप और कंप्यूटर पर लेकिन आज हम आपको उस दफ्तर ले जा रहे हैं जहां पीएम नरेंद्र मोदी 27 सितंबर को पहुंचने वाले हैं. देखिए उस दुनिया के अंदर की तस्वीरें जिसने आपको फेसबुक का दीवाना बना दिया है.

 

आपने अपने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फेसबुक पेज देखा है. नहीं तो एक बार नजर डालिए. फेसबुक ने नरेंद्र मोदी को दुनिया के 3 करोड़ लोगों तक पहुंचाया है यानी नरेंद्र मोदी दुनिया के ऐसे दूसरे शख्स हैं जिसे फेसबुक पर सबसे ज्यादा देखा जाता है. और अब अमेरिका के अपने दूसरे दौरे पर नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम में खासतौर पर शामिल किया गया है फेसबुक के दफ्तर का दौरा. अब आपको कैलीफोर्निया की सिलिकन वैली के इसी मेनलो पार्क इलाके में मौजूद फेसबुक के दफ्तर का नजारा दिखाते हैं.

 

जिस गली में ये दफ्तर है उसका नाम भी दिलचस्प है – 1 हैकर वे.

ऐसा दफ्तर आपको भारत में देखने को नहीं मिलेगा. 10 हजार कर्मचारियों के लिए करीब साढ़े चार लाख स्क्वायर फुट में फैला ये दफ्तर सिर्फ कंक्रीट की इमारत नहीं है बल्कि आपको एहसास होगा कि आप काम करने नहीं बल्कि किसी बगीचे में घूमने आए हैं. दरअसल ये हरियाली सिर्फ जमीन पर नहीं है बल्कि दफ्तर की छत पर भी नौ एकड़ में फैला बगीचा बनाया गया है.

 

ये देखिए क्या आपने कभी सोचा था कि किसी ऑफिस में कोई कर्मचारी इस तरह से पूरे दफ्तर में घूम सकता है. नहीं ना. बाते तो और भी हैं जो आपको चौंकाएंगी लेकिन ये हम नहीं खुद इस दफ्तर के मालिक मार्क जुकरबर्ग दिखाएंगे.

 

मार्क जुकरबर्ग के मुताबिक ये दफ्तर एक ऐसी तस्वीर पेश करता है जहां ना कोई अपने पद के मुताबिक बड़ा है और ना छोटा. सबमिलकर काम करते हैं और दुनिया भर में मौजूद 118 करोड़ फेसबुक यूजर्स को देते हैं शानदार सर्विस.

 

दफ्तर में अपनी सीट पर ही बैठकर काम करना जरूरी नहीं है. आप बाहर आराम कर सकते हैं या फिर किसी बड़े शॉपिंग स्टोर जैसी इस कैंटीन में वक्त बिता सकते हैं.

यही नहीं काम का कोई दबाव नहीं है. थक जाएं को यहां खेल सकते हैं और अगर खेलने का भी मन ना हो तो कुछ इस तरह से आराम भी फरमा सकते हैं. कंपनी को काम के घंटे नहीं चाहिए बल्कि चाहिए क्वालिटी और शायद यही वजह है कि फेसबुक के इस दफ्तर को ऐसे रंगों से सजाया गया है. यही नहीं फेसबुक की इस दुनिया में पेंटिंग्स के लिए भी जगह है और आपकी दीवानगी के लिए भी. फेसबुक के इस दफ्तर का इतिहास भी दिलचस्प है.

 

जब गूगल के दफ्तर पहुंचेंगे मोदी

 

आप कोई भी काम करते हों और किसी भी दफ्तर में हों आजकल कंप्यूटर के बिना काम नहीं चलता और कंप्यूटर का काम गूगल के बिना नहीं चलता और इस बार नरेंद्र मोदी का अमेरिका दौरा भी गूगल के बिना पूरा नहीं होगा. प्रधानमंत्री मोदी गूगल के जिस दफ्तर पहुंचने वाले हैं उसे वहां काम करने वाले कर्मचारी दफ्तर नहीं मनोरंजन केंद्र कहते हैं. देखिए क्यों?

 

गूगल के पहले भारतीय मूल के सीईओ सुंदर पिचाई ने खुद दिया है नरेंद्र मोदी को ये न्योता. और इसी के बाद मोदी के अमेरिका दौरे में शामिल हो गया है कैलिफोर्निया में गूगल के दफ्तर का दौरा जिसे एक बार देखने के बाद आप भी कहेंगे कि इससे बेहतर मैंने कोई दफ्तर नहीं देखा.

 

अपने कंप्यूटर पर इंटरनेट सर्च इंजन गूगल पर जैसे ही आप कुछ खोजना शुरू करते हैं आपका रिश्ता कैलीफोर्निया में मौजूद गूगल के इस हेडक्वार्टर से जुड़ जाता है. लेकिन यहां क्या होता और कैसे ये आप नहीं जानते. तो हम बताते हैं.

 

ये है कैलीफोर्निया के सांटा क्लारा इलाके में गूगल के दुनिया भर में 70 दफ्तरों के बीच तालमेल बिठाने वाला हेडक्वार्टर. करीब 10 लाख सक्वायर फुट में फैला ये कैंपस गूगल का दूसरा सबसे बड़ा ऑफिस है. ये कितना बड़ा है ये समझने के लिए बस इतना जानना काफी है कि तीन बड़े स्टेडियम के बराबर है ये दफ्तर.

 

अब जरा अंदर चलिए. आपको दफ्तर जैसा नजारा मिलेगा ही नहीं. क्योंकि ये दफ्तर कुछ इस तरह से बनाया गया है कि आपको घर जैसा महसूस हो. 16 इमारतों से बना ये कैंपस दुनिया में सबसे आजाद दफ्तरों में गिना जाता है. यहां आप अपने बच्चों के साथ भी आ सकते हैं क्योंकि उनके लिए खेलने की सुविधा है वो भी देख रेख करने वाले कर्मचारी के साथ. यही नहीं अगर आपके पास पालतू जानवर हैं तो उन्हें भी यहां ले आइए. गूगल ऐतराज नहीं करेगा.

 

लोग यहां इसलिए काम करना चाहते हैं क्योंकि इसके बाद उन्हें घर का काम निपटाने की चिंता नहीं होती. यकीन नहीं होता तो ये देखिए – गूगल की लॉंड्री सर्विस. अपने गंदे कपड़े लाइए और घर लौटते वक्त साफ कपड़े ले जाइए.

 

खाना पकाने का भी झंझट गूगल पर ही छोड़ दीजिए. यहां दिन में तीन बार मुफ्त खाना दिया जाता है. ऐसी 4 बड़ी कैंटीन्स में आपको अपना मनपसंद खाना मिलता है. अंदर खाना तो भी ठीक और अगर खुली हवा में ग्रिल्ड व्यंजनों का मजा लेना हो तो भी पूरा इंतजाम है

 

क्वालिटी ऐसी कि आप गूगल के बाहर ऐसा खाना तलाशते रह जाएंगे. हजारों कर्मचारियों को खाना परोसने के लिए फल और सब्जियां भी गूगल बाहर से नहीं खरीदता. देखिए गूगल के इस कैलीफोर्निया वाले कैंपस के हेड शेफ खुद सब्जियां उगाने में जुटे रहते हैं.

 

खाना खाएंगे तो वजन बढ़ेगा तो गूगल के जिम में चले आइए. चर्बी को पसीने में बहाइए और फिर गूगल के पूल में डूबकी लगाइए.  मन नहीं लग रहा तो इन अलग अलग डिजाइन के केबिन में बैठकर म्यूजिक का आनंद लेने की भी सुविधा है.

 

गूगल के दफ्तर का अपना मसाज पार्लर भी है और जरूरत से ज्यादा काम करने के बाद सोने की ऐसी हाईटेक सुविधा भी है. अगर इसमें दम घुटता है तो फिर यहां सोकर हो जाइए तरोताजा. दूसरे हिस्से में जाने के लिए वही बोरिंग लिफ्ट नहीं इस्तेमाल करना चाहते तो इस फायरपाइप का इस्तेमाल कीजिए. या फिर ऐसी स्लाइड का.

अगर एक इमारत से दूसरी इमारत में जाना हो तो पैरों को कष्ट देने की जरूरत नहीं. गूगल की ये रंगबिरंगी साइकिलें कब काम आएंगी और हां आप अगर सोच रहे हैं की पैसा कमाके कार खरीदेंगे जो आपको उसकी भी जरूरत नहीं है. गूगल के रिसेप्शन से इलेक्ट्रॉनिक की उठाइए – पार्किंग में खड़ी गूगल की इन शानदार कारों में से किसी से भी निकल जाइए. काम हो जाए तो वापस कार खड़ी कर दीजिए. गूगल ईंधन का पैसा भी नहीं लेगा.

 

इन सुविधाओं पर गूगल सालाना 500 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च करता है और वो इसलिए क्योंकि उसे अपने कर्मचारियों की फिक्र करनी आती है. यही वजह है कि गूगल के दफ्तर में ही हॉस्पिटल भी है जहां मुफ्त में इलाज होता है. यहां के कर्मचारी ना तो हेल्थ इंश्योरेंस करवाते हैं और ना जीवन बीमा क्योंकि अगर किसी कर्मचारी की नौकरी के दौरान मौत हो जाए तो परिवार को गूगल अगले दस साल की तनख्वाह मुफ्त दे देता है.

 

गूगल का ये दफ्तर इतिहास से भविष्य का नाता भी जोड़ता है. लाइब्रेरी आपको इतिहास के गलियारों में ले जाएगी तो दफ्तर का फर्नीचर किसी स्पेसक्राफ्ट जैसा एहसास देगा. यही वजह है कि गूगल को दुनिया भर से बेहतरीन कर्मचारी ढूंढ़ने में दिक्कत नहीं होती. हर 15 सेकेंड में नौकरी के लिए एक नई एप्लीकेशन गूगल के इस दफ्तर में पहुंच जाती है.

 

नौकरी की एप्लीकेशन हो या फिर वो डाटा जो आप अलग अलग साइट पर देखते और सेव करते हैं वो गूगल के दफ्तर में मौजूद इसी डाटा सेंटर का हिस्सा बन जाता है. ये पूरी तरह ऑटोमैटिक है. जो हिस्सा खराब हो जाता है गूगल उसे ठीक नहीं करता बल्कि तोड़कर फेंक देता है क्योंकि हर डाटा की एक नहीं कई कॉपियां गूगल के इस भारी भरकम सेंटर में मौजूद होती हैं.  ऐसे में गूगल में मोदी का दौरा क्या भारत के लिए भी नई कार्यसंस्कृति सीखने का मौका बन सकता है.

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