ब्रिक्स सम्मेलन से पहले मोदी ने विदेश नीति पर अपनी सरकार के रूख पर जोर दिया

By: | Last Updated: Sunday, 13 July 2014 4:35 PM
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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले आज अपनी सरकार की विदेश नीति के रूख को पेश किया जिसके तहत वैश्विक शांति एवं स्थिरता को बहाल करने तथा आर्थिक स्थिरता की ओर बढ़ने के लिए क्षेत्रीय संकटों एवं सुरक्षा खतरों का निवारण करने के मकसद से वैश्विक मुद्दों पर भारत की आक्रामक भीगीदारी की कोशिश की गई है.

 

मोदी ब्राजील में होने जा रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए जाने के क्रम में यहां एक रात के लिए ठहरे हैं.

 

दिल्ली से रवाना होते समय दिए अपने बयान में प्रधानमंत्री ने कहा कि वह उम्मीद करते हैं कि इस सम्मेलन में बातचीत के जरिए ब्रिक्स विकास बैंक की स्थापना का मार्ग प्रशस्त होगा.

 

बर्लिन में हवाई अड्डे पर भारतीय राजदूत विजय गोखले और जर्मन विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने मोदी की अगवानी की.

 

प्रधानमंत्री के ब्राजील दौरे के क्रम में एक रात के ठहराव के लिए फ्रैंकफर्ट की जगह बर्लिन को चुना गया ताकि जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल के साथ बातचीत संभव हो सके, हालांकि फीफा विश्व कप के फाइनल में जर्मनी के पहुंचने के साथ इसकी संभावना खत्म हो गई क्योंकि एजेंला आज ब्राजील में अपनी टीम का मैच देखेंगी.

 

ब्रिक्स विकास बैंक कई देशों और विकासशील राष्ट्रांे में परियोजनाओं का वित्तपोषण करेगा. इस बैंक का मुख्यालय नयी दिल्ली या शांगहाए में बनाए जाने को लेकर भारत और चीन का अपना अपना दावा है .

 

ब्राजील की राष्ट्रपति दिल्मा राउसेफ के न्योते पर मोदी ब्राजील जा रहे हैं. वह फोर्टालेजा और ब्रासीलिया में 15-16 जुलाई को आयोजित छठे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे.

 

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस समय वैश्विक अर्थव्यवस्था में कमजोरी और अशांति बनी हुई है. मोदी ने कहा कि कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं को सुस्ती का सामना करना पड़ रहा है जिससे समावेशी व आर्थिक विकास को लेकर चुनौती बढ़ गई है. मोदी ने कहा, ‘‘मैं ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को एक ऐसे मौके के रूप में देख रहा हूं जिसमें ब्रिक्स के सदस्यांे के साथ इस बारे में विचार विमर्श किया जाएगा कि क्षेत्रीय संकट और सुरक्षा खतरों से निपटने तथा दुनिया में शांति और स्थिरता का वातावरण बहाल करने के लिए किए जा रहे अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में हम किस तरह का योगदान कर सकते हैं.’’

 

उन्होंने कहा, ‘‘इसके अलावा अंतर ब्रिक्स आर्थिक सहयोग को और आगे बढ़ाने तथा वैश्विक आर्थिक सहयोग, स्थिरता व समृद्धि के लिए हमारी बातचीत से भी मुझे काफी उम्मीदें हैं . मुझे उम्मीद है कि शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स की प्रमुख पहल मसलन नया विकास बैंक और आकस्मिक आरक्षित व्यवस्था :सीआरए: को सफलतापूर्वक अंजाम तक पहुंचाया जा सकेगा . नयी दिल्ली में 2012 में इसकी शुरआत के बाद से इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है.’’ मोदी ने कहा कि इन पहलों से ब्रिक्स देशों में वृद्धि और स्थिरता को तो प्रोत्साहन मिलेगा ही, इससे अन्य विकासशील देशों को भी फायदा होगा. उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक आर्थिक वृद्धि, शांति व स्थिरता के लिए ब्रिक्स के मंच को काफी महत्व देता है.

 

 

इस बार ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का विषय ‘समावेशी वृद्धि-टिकाऊ विकास’ रखा गया है. प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे संयुक्त राष्ट्र में हुए विचार विमर्श के आधार पर 2015 के बाद के विकास एजेंडा को आकार देने में मदद मिलेगी. ब्रिक्स शिखर सम्मेलन प्रधानमंत्री मोदी को कई वैश्विक भागीदारों मसलन ब्राजील, चीन, रूस और दक्षिण अफ्रीका के नेताओं के साथ मिलने का पहला मौका प्रदान करेगा. मोदी ने कहा, ‘‘मैं इन नेताओं के साथ सार्थक बैठकों की उम्मीद कर रहा हूं जिससे द्विपक्षीय रिश्तों को आगे बढ़ाया जा सके और वैश्विक व क्षेत्रीय विकास पर विचारों का आदान प्रदान किया जा सके.’’ मोदी को ब्राजील द्वारा आयोजित इस बैठक से इतर कई दक्षिण अमेरिकी देशों के नेताओं के साथ भी बातचीत का मौका मिलेगा.

 

प्रधानमंत्री ने कहा कि परंपरागत रूप से भारत के इन देशों के साथ सौहार्दपूर्ण व आपसी लाभ वाले रिश्ते रहे हैं. मोदी ने कहा, ‘‘हमारी समान महत्वाकांक्षाएं व चुनौतियां हैं. इन देशों में रहने वाले भारतीयों ने भी आपसी संपर्क बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है.’’ मोदी ने कहा, ‘‘दक्षिण अमेरिका की चौतरफा प्रगति ने इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण स्तंभ बना दिया है. यह हमारे लिए भारी अवसरों की जमीन है. इन देशों के नेताओं के साथ बातचीत के जरिये हम नए विचारों को आगे बढ़ा सकेंगे जिससे दक्षिण अमेरिका के साथ हमारे रिश्ते और मजबूत हो सकेंगे और आगे बढ़ सकेंगे.’’

 

प्रधानमंत्री मोदी के साथ एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए गया है. इनमें वित्त राज्यमंत्री निर्मला सीतारमण, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ए के डोभाल, विदेश सचिव सुजाता सिंह तथा वित्त सचिव अरविंद मायाराम शामिल हैं.

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