साध्वी की बदजुबानी पर राज्यसभा में गतिरोध जारी

By: | Last Updated: Friday, 5 December 2014 5:02 PM
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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को लोकसभा में कहा कि अपनी विवादित टिप्पणी के लिए मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने माफी मांग ली है, इसलिए इस मुद्दे को अब खत्म कर देना चाहिए. लेकिन सदन में शोर-शराबे में कमी नहीं आई.

 

विपक्ष ने टिप्पणी की निंदा करते हुए एक संयुक्त प्रस्ताव लाने पर जोर दिया. कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी पार्टियों ने लोकसभा से बहिर्गमन किया, वहीं राज्यसभा में लगातार चौथे दिन इस मुद्दे पर कामकाज ठप रहा.

 

बाद में विपक्षी सदस्यों ने हालांकि कहा कि प्रधानमंत्री के बयान के बाद उन्होंने अपनी मांग घटा दी है और वे अब मंत्री के इस्तीफे के बदले सदन में केवल एक प्रस्ताव पारित कराना चाहते हैं.

 

सभी नौ विपक्षी दलों ने सदन में प्रधानमंत्री के बयान पर आधारित एक प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया है. वे चाहते हैं कि प्रस्ताव पारित हो.

 

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी सहित कई विपक्षी सदस्यों ने संसद के बाहर प्रदर्शन करते हुए कहा कि सदन में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की मंजूरी नहीं दी जाएगी और उन्होंने मंत्री के इस्तीफे की मांग पर जोर दिया.

 

इस दौरान संसदीय कार्यमंत्री एम.वेंकैया नायडू ने विपक्ष से दोनों सदनों में कार्यवाही को सुचारू रूप से चलने देने का अनुरोध किया.

 

मोदी ने कहा, “मेरी पार्टी की एक बैठक के दौरान मुझे जब साध्वी के बयान के बारे में पता चला, तो मैंने सख्ती से इस तरह की भाषा इस्तेमाल करने पर आपत्ति जताई और कहा कि चुनाव के दौरान भी इस तरह के बयानों से बचा जाना चाहिए. यहां तक कि सदन में मामला उठने से पहले ही मैंने इस पर कदम उठा लिया था.”

 

प्रधानमंत्री ने कहा कि साध्वी साधारण पृष्ठभूमि से आती हैं और पहली बार लोकसभा सांसद चुनी गई हैं. उन्होंने माफी मांग ली है.

 

प्रधानमंत्री ने कहा कि वह लोकसभा सदस्यों के आभारी हैं, जिन्होंने सदन की कर्यवाही को सुचारू रूप से चलाने की मंजूरी दी.

 

लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान विपक्षी सदस्यों के विरोध के बाद कार्यवाही सुचारू रूप से चली. वहीं राज्यसभा की कार्यवाही कई बार बाधित हुई.

 

सदन की कार्यवाही शुक्रवार को जैसे ही शुरू हुई विपक्षी सदस्य निरंजन ज्योति की बर्खास्तगी की मांग को लेकर हंगामा करने लगे.

 

उपसभापति पी. जे. कुरियन ने हंगामा कर रहे सदस्यों को शांत कराने की कोशिश की, लेकिन शोरगुल जारी रहा, जिसके कारण उपसभापति ने सदन की कार्यवाही दोपहर तक के लिए स्थगित कर दी.

 

प्रश्न काल के लिए सदन की बैठक दोपहर में दोबारा शुरू हुई, लेकिन हंगामा जारी रहा.

 

मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता सीताराम येचुरी ने सभापति एम. हामिद अंसारी से विवादास्पद टिप्पणी के लिए निंदा प्रस्ताव पारित करने की अनुमति देने का आग्रह किया.

 

येचुरी ने कहा, “वैमनस्य को बढ़ावा देने वाले बयान पर निंदा प्रस्ताव सदन में पेश करने की हमें अनुमति देने की परंपरा है.”

 

उन्होंने कहा, “प्रस्ताव की अनुमति दीजिए, मौजूदा गतिरोध खत्म करने का यही एक उपाय है.”

 

सभापति ने यद्यपि कहा कि वह बिना नोटिस कोई प्रस्ताव स्वीकार नहीं कर सकते हैं.

 

उन्होंने कहा, “पीठासीन अधिकारी किसी राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बन सकता.”

 

उसके बाद येचुरी ने सुझाया कि प्रधानमंत्री के बयान पर मतदान कराया जाए.

 

लेकिन सभापति और सरकार, दोनों ने इस प्रस्ताव की अनुमति नहीं दी.

 

सदन में जारी हंगामे को देखते हुए कार्यवाही पहले आधा घंटे के लिए स्थगित की गई और बाद में अपराह्न् 2.30 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई.

 

भोजनावकाश के बाद भी हंगामा जारी रहा.

 

कुरियन ने विपक्षी और सरकार के सदस्यों से आग्रह किया कि इस मुद्दे को मिल बैठकर सुलझा लें और गतिरोध समाप्त करें.

 

लेकिन हंगामा जारी रहा और सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई.

 

उल्लेखनीय है कि मंत्री निरंजन ज्योति ने दिल्ली में एक सार्वजनिक सभा में कथित तौर पर कहा था कि “आपको तय करना है कि दिल्ली में सरकार रामजादों की बनेगी या हरामजादों की”.

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