आतंकवाद से संघर्ष में मोदी ने हसीना के हौंसलों को सराहा

By: | Last Updated: Sunday, 7 June 2015 4:49 PM
Narendra Modi_Shiekh Hasina_

ढाका: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक महिला होने के बावजूद आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष करने और इसके प्रति ‘‘कतई बर्दाश्त नहीं करने’’ का साहसी कदम उठाने के लिए अपनी बांग्लादेशी समकक्ष शेख हसीना के हौंसलों की सराहना की.

 

ढाका विश्वविद्यालय में अपने घंटेभर के भाषण में मोदी ने कहा, ‘‘हम हर बात का समाधान जानते हैं लेकिन आतंकवाद का नहीं . मुझे खुशी है कि बांग्लादेश की प्रधानमंत्री ने एक महिला होने के बावजूद आतंकवाद को ‘कतई बर्दाश्त नहीं करने’ का ऐलान किया है . ’’

 

मोदी ने कहा कि आतंकवाद मानवता का दुश्मन है और इसलिए सभी मानवीय ताकतों को इससे लड़ने के लिए एकजुट होना चाहिए.

 

इससे पूर्व बांग्लादेश की अपनी दो दिवसीय यात्रा के संपन्न होने के अवसर पर एक संयुक्त घोषणापत्र में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने दोनों देशों के बीच सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर अद्भुत सहयोग पर संतोष जाहिर किया और चरमपंथ तथा आतंकवाद के सभी रूपों और प्रकारों के खिलाफ सुस्पष्ट एवं दृढ़ रूख दोहराया.

 

मोदी और हसीना ने आतंकवाद में शामिल समूहों और लोगों के बारे में एक दूसरे के साथ सूचनाएं साझा करने और सहयोग करने की प्रतिबद्धता जतायी.

 

संयुक्त घोषणापत्र कहता है, ‘‘उन्होंने अपनी यह प्रतिबद्धता दोहरायी कि उनके अधिकार क्षेत्रों को एक दूसरे के खिलाफ किसी भी गतिविधि के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी. प्रधानमंत्री मोदी ने सुरक्षा संबंधी मामलों में बांग्लादेश द्वारा किए गए सहयोग के लिए भारत की ओर से सराहना की.’’

 

दोनों नेताओं ने जाली नोटों की तस्करी रोकने , दोनों पक्षों के तटरक्षकों के बीच सहयोग और मानव तस्करी रोकने के संबंध में संपन्न आपसी सहमति पत्रों : एमओयू : पर संतोष जाहिर किया जिनसे सुरक्षा सहयोग बढ़ेगा.

 

मोदी ने 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम का उल्लेख करते हुए हुए कहा कि तब हमारे कब्जे में 90 हजार पाकिस्तानी फौजी थे. उन्होंने कहा, ‘‘यदि हमारी विकृत मानसिकता होती, तो हमें नहीं पता कि हमने क्या निर्णय किया होता.’’

 

उन्होंने कहा, ‘‘आतंकवाद की कोई सीमा नहीं होती. भारत इससे पिछले 40 वषरें से परेशान रहा है. कितने बेगुनाह लोग मारे गए और आतंकवाद से जुड़े लोगों को क्या मिला और उन्होंने विश्व को क्या दिया..आतंकवाद का कोई मूल्य नहीं होता, कोई सिद्धांत, कोई परंपराएं नहीं होती और उसका एक ही उद्देश्य होता है और वह है मानवता के खिलाफ शत्रुता.’’

 

मोदी की दो दिवसीय बांग्लादेश यात्रा के आखिरी दिन जारी एक संयुक्त घोषणापत्र में दोनों देशों ने ‘‘आतंकवाद और अतिवाद के सभी स्वरूपों के खिलाफ स्पष्ट एवं समझौता नहीं करने वाली नीति अपनाने की प्रतिबद्धता जतायी.’’

 

दोनों पक्षों ने इसके साथ ही आतंकवाद में लिप्त होने वाले समूहों और व्यक्तियों के बारे में सूचना साझा करने के बारे में एकदूसरे को सहयोग करने की भी प्रतिबद्धता जतायी.

 

घोषणापत्र में कहा गया है, ‘‘दोनों पक्षों ने प्रतिबद्धता जतायी कि वे अपने अपने क्षेत्रों का इस्तेमाल दूसरे के प्रति प्रतिकूल किसी गतिविधि के लिए करने की इजाजत नहीं देंगे.’’

 

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में विस्तारवाद के खिलाफ कड़ा हमला बोला और कहा कि आज के विश्व में इसके लिए कोई स्थान नहीं है.

 

उन्होंने कहा, ‘‘विश्व बदल चुका है, एक समय था जब हो सकता है कि विस्तारवाद का इस्तेमाल किसी देश की शक्ति के प्रतीक के रूप में होता हो कि कोई कितना विस्तार कर रहा है और किस स्थान पर पहुंच रहा है..लेकिन समय बदल चुका है. इस युग में विस्तारवाद के लिए कोई स्थान नहीं है और विश्व विकास चाहता है, विस्तारवाद नहीं और यही मूल दृष्टि है.’’

 

संयुक्त राष्ट्र और इसकी सुरक्षा परिषद में सुधारों की तगड़ी वकालत करते हुए मोदी ने कहा कि भारत को अभी भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता नहीं मिली है.

 

उन्होंने कहा, ‘‘भारत एक ऐसा देश है जिसने कभी किसी की जमीन पर कब्जे की लड़ाई नहीं लड़ी. 75 हजार भारतीय सैनिकों ने प्रथम विश्व युद्ध में 90 हजार भारतीय सैनिकों ने द्वितीय विश्व युद्ध में दूसरों के लिए अपनी जान का बलिदान दिया.’’ प्रधानमंत्री ने दुनियाभर में शांति रक्षक अभियानों में भारत की भूमिका का भी जिक्र किया और कहा कि भारतीय सैनिकों ने बांग्लादेश के लिए मुक्ति योद्धाओं के साथ मिलकर लड़ाई लड़ी.

 

मोदी ने कहा, ‘‘ फिर भी भारत को आज तक संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता नहीं मिली है .’’

 

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पाकिस्तानी युद्धबंदियों की वापसी अपने आप में दुनिया को यह बात समझाने के लिए काफी होनी चाहिए थी कि भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट मिलनी चाहिए.

 

भू सीमा समझौते : एलबीए : के संबंध में दस्तावेजों की अदला बदली के द्वारा 41 साल पुराने भू सीमा विवाद के समाधान पर मोदी ने कहा, ‘‘यदि लोगों को यह लगता है कि एलबीए जमीन के कुछ किलोमीटर के बारे में है तो यह सच नहीं है .

 

जिस दुनिया में सभी लड़ाइयां जमीन के लिए लड़ी गयीं वहां यह समझौता दिलों का मिलन है .’’ काफी समय से लंबित तीस्ता जल बंटवारा करार के संबंध में मोदी ने कहा कि इस मुद्दे को मानवीय दृष्टिकोण के साथ सुलझाना होगा.

 

उन्होंने कहा, ‘‘ जल मुद्दों को मानवीय दृष्टिकोण से सुलझाए जाने की जरूरत है . मुझे विश्वास है कि हम इसे कर पाएंगे .’’उन्होंने साथ ही कहा कि , ‘‘समाधान की तलाश सुनिश्चित करना दोनों पक्षों की जिम्मेदारी है .’’

 

प्रधानमंत्री मोदी की अपनी बांग्लादेशी समकक्ष शेख हसीना के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद शनिवार को 22 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए . मोदी ने कहा, ‘‘लोग यह सोचते थे कि हम केवल पास पास थे, अब दुनिया को यह मानना होगा कि हम केवल पास पास नहीं हैं बल्कि साथ साथ भी हैं .’’

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