दोबारा हिंदू बनने वाले को उसकी जाति के लोग स्वीकार करें: सुप्रीम कोर्ट

By: | Last Updated: Friday, 27 February 2015 2:14 AM

नई दिल्ली: हिन्दू धर्म में वापसी करने वाले को अगर उसकी मूल जाति के लोग स्वीकार कर लें तो उसे उस जाति का माना जाना चाहिए. यह फैसला सुप्रीम कोर्ट ने दिया है.

 

यह मामला ईसाई से हिन्दू बने एक शख्स को अनुसूचित जाति का लाभ दिए जाने से जुड़ा है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि हिन्दू धर्म में वापसी करने वाला कोई व्यक्ति अगर पुख्ता तौर पर ये साबित कर सके कि दूसरा धर्म अपनाने से पहले वो या उसके पूर्वज किस जाति के थे साथ ही उसकी मूल जाति के लोग उसे अपनाने को तैयार हों तो उसे उसकी मूल जाति का ही माना जाना चाहिए.

 

जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस वी.गोपाल गौड़ा की खंडपीठ ने जिस मामले में ये फैसला सुनाया है वो केरल के एक ऐसे शख्स का है जो ईसाई से हिन्दू बना है. के पी मनु नाम का ये शख्स जन्म से ईसाई था क्योंकि उसके दादा ने ईसाई धर्म अपनाया था. लेकिन 24 साल की उम्र में वो हिन्दू बन गया.

 

हिन्दू बनने के बाद उसके दादा की जाति ‘पुलाया’ ने उसे अपना लिया. इस जाति के अनुसूचित होने के चलते मनु को जाति के आधार पर नौकरी मिली. लेकिन केरल हाई कोर्ट ने इसे अवैध करार देते हुए उसे नौकरी से बर्खास्त करने और 15 लाख का जुरमाना वसूलने का फैसला सुनाया.

 

सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाई कोर्ट के फैसले को पलट दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है की दोबारा हिन्दू बनने वाले के.पी. मनु को अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र दिया जाना कानूनन सही था. इसलिए उसे नौकरी पर बहाल किया जाये.

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