भारत के इस संत ने बदल दी थी स्टीव और जुकरबर्ग की जिन्दगी!

By: | Last Updated: Thursday, 1 October 2015 5:36 PM

नई दिल्ली: नीब करौली बाबा का नाम सुना है आपने. जिन्होंने इनका नाम नहीं सुना वो ये सुनकर जरूर हैरान होंगे कि नीब करौली बाबा ने दुनिया को बेहतरीन आई फोन देने वाली कंपनी एपल के स्टीव जॉब्स और फेसबुक बनाने वाले मार्क जुकरबर्ग को आशीर्वाद दिया था. दावा ये है कि नीब करौली बाबा के आशीर्वाद से दोनों की दुनिया बदल गई थी. और इस बात का जिक्र जुकरबर्ग ने खुद पीएम मोदी से किया था.

 

उत्तराखंड के नैनीताल से करीब 38 किलोमीटर दूर है बाबा नीब करौली का आश्रम. देव भूमि कहा जाने वाला उत्तराखंड मंदिरों और आश्रमों से भरा पड़ा है लेकिन नीब करौली बाबा का आश्रम कुछ ऐसी कहानियों की वजह से चर्चा में आ गया है जो शायद पहले नहीं सुनी गई थीं. ऐसी ही एक कहानी स्टीव जॉब्स की है.

 

48 लाख करोड़ की दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनी एपल के फाउंडर स्टीव जॉब्स नीब करौली बाबा से आशीर्वाद लेने उनके आश्रम कैंचीधाम आए थे. और स्टीव जॉब्स की सलाह पर दुनिया को फेसबुक से जोड़ने वाले मार्क जुकरबर्ग ने भी यहां माथा टेका था. मार्क जुकबर्ग जब अमेरिका से करीब साढ़े आठ हजार किमी का सफर करके उत्तराखंड के कैंचीधाम पहुंचे थे तब उनका फेसबुक 17.44 लाख करोड़ का नहीं था और जुकरबर्ग संघर्ष के दौर से गुजर रहे थे. ये बात दुनिया के सामने तब आई जब प्रधानमंत्री मोदी फेसबुक के दफ्तर पहुंचे थे और मार्क ने खुद ये बात मोदी को बताई थी.

 

जुकरबर्ग ने अपनी बातचीत में मंदिर का नाम नहीं बताया था लेकिन ये नैनीताल के पास कैंचीधाम का आश्रम था जहां स्टीव के कहने पर जुकरबर्ग पहुंचे थे और इस आश्रम में दो दिन बिताए थे.

 

स्टीव जॉब्स साल 1974 में इस आश्रम में आए थे चौंकाने वाली बात ये है कि स्टीव जॉब्स की नीब करौली बाबा से मुलाकात नहीं हो पाई थी क्योंकि 11 सितंबर 1973 को ही उनकी मौत हो गई थी. लेकिन दावा है कि इस आश्रम से लौटन के बाद स्टीव जॉब्स की दुनिया बदल गई थी.

 

बेरोजगार युवा स्टीव जॉब्स अपने मित्र डैन कोटके के साथ बाबा नीब करोरी के दर्शन करने आए थे. नीब करौली बाबा को मानने वालों में मशहूर हॉलीवुड अभिनेत्री जुलिया रॉबर्ट्स का नाम भी शामिल है. जुलिया ना तो आश्रम आईं और ना ही बाबा से मिली वो तो बस एक फोटो देखकर उनकी भक्त हो गई थीं.

 

जुलिया रॉबर्ट्स की तरह ही एक नाम है अमेरिका के कृष्णा दास का जो कभी Jeffrey Kagel हुआ करते थे. 1970 में कृष्णा दास डिप्रेशन और ड्रग्स के शिकार हो चुके थे वो अपना रॉक बैंड छोड़कर न्यूयॉर्क से भारत आ गए. यहां उनकी मुलाकात नीब करौली बाबा से हुई और फिर दुनिया बदल गई. वो कीर्तन गाने वालों में बड़ा नाम बन चुके हैं ग्रैमी अवार्ड्स के लिए नॉमिनेट हुए थे. 1996 से लेकर अब तक उनके 8 एलबम रिलीज हो चुके हैं.

 

आखिर कौन हैं नीब करौली वाले बाबा जिनके आशीर्वाद और आश्रम के चर्चे सिर्फ भारत में नहीं बल्कि अमेरिका और जर्मनी तक फैले हुए हैं.

 

करीब 42 साल पहले नीब करौली बाबा ने दुनिया को अलविदा कह दिया था लेकिन उनके भक्तों की संख्या में कभी कमी नहीं हुई. नीब करौली बाबा को हनुमान जी का अवतार बताया जाता है. उनकी वेबसाइट कलर और ब्लैक एंड व्हाइट दोनों मिलाकर करीब 1300 तस्वीरें मौजूद हैं और लगभग हर तस्वीर नीब करौली बाबा कंबल ओढ़े हुए ही नजर आते हैं. कहा तो ये जाता है कि 17 साल की उम्र में ही बाबा को ज्ञान प्राप्त हो गया था.

 

कंबल के पीछे की क्या कहानी ये तो नहीं पता लेकिन भक्त आश्रम में बाबा को भेंट में कंबल ही चढ़ाते थे.

 

नीब करौली बाबा के वीडियो बहुत ज्यादा नहीं हैं लेकिन एक ये तस्वीर सामने आई जिसमें वो अपने शिष्य को थपथपाते हुए राम राम का उच्चारण करते हुए आशीर्वाद दे रहे हैं.

 

नीब करौली बाबा और नीब करौरी दोनों ही नाम से बाबा को जाना जाता है. कहा जाता है कि साल 1930 में बाबा नीब करौरी नाम के गांव में ठहरे हुए थे इसके बाद ही उन्हें नीब करौरी बाबा कहा जाने लगा था. उन्हें उनके भक्त महाराजा जी के नाम से भी बुलाते हैं. उत्तर भारत में नीब करौली बाबा चमत्कारी बाबा के नाम से भी मशहूर हैं.

 

और उनके एक नहीं चमत्कार के कई किस्से मौजूद हैं. जैसे एक ही वक्त पर दो जगह मौजूद होना. पानी से पूरे पहाड़ पर घी के दिए जलवा देना. चमत्कार के एक ऐसे ही किस्से का जिक्र वेबसाइट पर किया गया है.

 

बहुत साल पहले जब नीब करौली बाबा 20-22 साल के थे. वो साधु के भेष में एक ट्रेन में चढ़ गए. तब देश आजाद नहीं हुआ था. उन्होंने कई दिन से खाना नहीं खाया था. जब ट्रेन में टीटीई ने बाबा से टिकट मांगा तो पता चला कि बाबा बिना टिकट के फर्स्ट क्लास कोच में सफर कर रहे हैं. उन्हें ट्रेन से उतार दिया गया. ट्रेन नीब करौली गांव के पास ही रुकी जहां बाबा रहते थे. दावा कुछ ऐसा है कि बाबा को ट्रेन से उतारने के बाद लाख कोशिशों के बाद भी ट्रेन दोबारा नहीं चल पाई. तब तक जब तक नीब करौरी बाबा को खाना खिलाकर उन्हें वापस ट्रेन में नहीं बिठाया गया.

 

नीब करौली बाबा के चमत्कारों पर मिरैकिल ऑफ़ लाइफ, दा डिवाइन रिएलिटी, अनन्त कथामृत जैसी किताबें भी लिखी जा चुकी हैं. नीब करौली बाबा के चमत्कारों की कहानी अमेरिका के बाबा राम दास सुनाते हैं जो कभी  Richard Alpert हुआ करते थे. रिचर्ड भारत आए और नीब करौली बाबा से मिले थे और करौली बाबा को अपना गुरु बना लिया. नीब करौली बाबा ने ही रिचर्ड को राम दास नाम दिया मतलब भगवान राम का सेवक.

 

चौंकाने वाली बात ये है कि पहली मुलाकात में रिचर्ड नीब करौली बाबा के पैर नहीं छूना चाहते थे लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ कि उनकी सोच भी बदल गई औऱ नाम भी.

 

नीब करौली बाबा बनने से पहले वो लक्ष्मी नारायण शर्मा हुआ करते थे. नीब करौली बाबा का जन्म यू.पी.के फिरोजाबाद जिले के अकबरपुर गांव में एक ब्राह्मण जमींदार घराने में हुआ था साल 1964 की बात है जब आगरा के पास फिरोजाबाद के गांव अकबरपुर में जन्मे लक्ष्मी नारायण शर्मा नीब करौली गांव में तपस्या करने पहुंचे थे.

 

यहीं पर उन्होंने कैंची धाम मंदिर की स्थापना की. आज भी हर साल 15 जून यानि स्थापना के अवसर पर मेला आयोजित किया जाता है. मेले में लाखों की संख्या में भक्त पहुंचते हैं.

 

नैनीताल में कैंचीधाम आश्रम के अलावा देश भर में नीब करौली बाबा के करीब 48 मंदिर बनवाए गए हैं. नैनीताल, ऋषिकेश, गुजरात, वृन्दावन, लखनऊ, शिमला और दिल्ली में भी बाबा का मंदिर है.

 

ये तो हुई देश की बात अब जरा विदेश के बारे में जान लीजिए. अमेरिका और जर्मनी समेत कई जगह बाबा के मंदिर बनवाए गए हैं.

WATCH SPECIAL: क्या है फेसबुक-एपल का बाबा कनेक्शन? 

आज भी नीब करौली बाबा के आश्रम में विदेशी सैलानियों का तांता लगा रहता है. हस साल अमेरिका, फ्रांस, लंदन जैसे देशों से भक्त यहां पहुंचते हैं.

India News से जुड़े हर समाचार के लिए हमे फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर फॉलो करें साथ ही हमारा Hindi News App डाउनलोड करें
Web Title: Neeb Karori Baba: baba has been magnet for Mark Zuckerberg, Steve Jobs
Explore Hindi News from politics, Bollywood, sports, education, trending, crime, business, साथ ही साथ और भी दिलचस्प हिंदी समाचार
First Published:

Get the Latest Coupons and Promo codes for 2017