INFORMATION: भूकंप से कैसे बचा पशुपतिनाथ मंदिर?

By: | Last Updated: Tuesday, 28 April 2015 4:15 PM
Nepal Earthquake: Pashupatinath Temple

नई दिल्ली: नेपाल में भयानक तस्वीरों के बीच एक चमत्कार का जिक्र हो रहा है. चमत्कार ये कि नेपाल में भूकंप के जिन भयानक झटकों ने 80 फीसदी मंदिरों को तबाह कर दिया उन्हीं झटकों के बीच पशुपतिनाथ का मंदिर पूरी तरह सुरक्षित बच गया. लेकिन ये हुआ क्यों? क्या वाकई चमत्कार हुआ या फिर इसका कोई वैज्ञानिक आधार है ?

 

नेपाल में आए भूकंप से हुए विनाश की तस्वीरें अपनी कहानी खुद बयां कर रही हैं.  नेपाल की विरासत की जाने कितनी निशानियां तबाह हो चुकी हैं. धरहरा टावर नहीं बचा. मंदिरों का चौराहा यानी दरबार स्क्वायर तो अपनी पहचान खो चुका है. नेपाल के हजार साल पुराने राजतंत्र की निशानी यानी इस शाही महल का हाल भी आप देख चुके हैं.

 

नेपाल में विरासत के विनाश का हर चेहरा हमने आपको बताया है. लेकिन आज आपको एक खास मकसद से भारत और नेपाल की साझा विरासत यानी भगवान पशुपतिनाथ के मंदिर के बारे में फिर बताते हैं. क्योंकि नेपाल की जमीन पर यही एक ऐसी निशानी है जो तबाही के बीच अब भी सिर उठाए खड़ी है.

 

जब एक तरफ नेपाल में धरती के भीतर से उठी तबाही की तरंगों ने सब कुछ मिटा दिया था, पशुपतिनाथ के इस धाम में तब भी गूंज रही थीं इस आफत से राहत की प्रार्थनाएं.

ये तस्वीरें 6 अगस्त 1945 को जापान के हिरोशिमा और नागासाकी इलाकों पर गिराए गए दुनिया के पहले परमाणु बम की हैं. परमाणु बम इतना ताकतवर था कि जापान में इंसानी आबादी का नामोनिशान मिट गया.

 

देखिए उस परमाणु धमाके की ताकत थी 12.5 किलो टन टीएनटी उर्जा का है. लेकिन नेपाल में 7.9 रिक्टर स्केल के भूकंप की ताकत थी 79 लाख टन टीएनटी के बराबर. यानी करीब 504 गुना ज्यादा.

 

नेपाल में शनिवार यानी 25 अप्रैल को आए शक्तिशाली भूकंप के बाद पशुपतिनाथ मंदिर की ऐसी तस्वीरें चौंका रही हैं ना?  आप भी जानना चाहते होंगे कि कैसे बचा पशुपति नाथ मंदिर.

 

नेपाल में आए भूकंप में पशुपतिनाथ मंदिर का सुरक्षित बच जाने को श्रद्धालु चमत्कार मान रहे हैं. इसे उत्तराखंड में आए तबाही के सैलाब में सुरक्षित बचे केदारनाथ से जोड़कर देखा जा रहा है. कहा जा रहा है कि खुद भगवान शिव ने मंदिर की रक्षा की है. आस्था के अपने तर्क होते हैं लेकिन वैज्ञानिकों कि मानें तो नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर का बच जाना सैकड़ों साल पुराने भारतीय वास्तुशास्त्र का कमाल है.

 

नेपाल की पवित्र बागमती नदी के किनारे फैला हुआ है इसका परिसर. पशुपतिनाथ मंदिर का मुख्य ढांचा जो आम मंदिरों से अलग नजर आता है. सोने से सजा शिखर और चांदी के दरवाजे. सीढ़ीनुमा चबूतरा और साथ बहती बागमती नदी. नदी के दूसरी तरफ भी मंदिर का ही परिसर है. और यहां बने हैं आठ छोटे छोटे मंदिर. पशुपतिनाथ मंदिर से जुड़े पूरे इलाके की बात करें तो ये करीब 264 हेक्टेयर में फैला है और यहां छोटे बड़े मंदिरों की संख्या 518 है.

 

इस परिसर में आसपास के मंदिरों को तो नुकसान पहुंचा लेकिन पशुपतिनाथ मंदिर का मुख्य ढांचा पूरी तरह सुरक्षित बच गया. पहली वजह तो ये है कि पशुपतिनाथ मंदिर की छतें इतनी चौड़ी बनाई गई हैं कि जिस चबूतरे पर मंदिर बना है वो पूरी तरह इनसे ढका हुआ है. इससे बारिश का पानी ना तो मंदिर की दीवारों को छू पाता है और ना ही चबूतरे के आसपास पर ठहरता है. यानी नींव मजबूत तो मंदिर का ढांचा भी मजबूत.

 

लेकिन हम आपको भूकंप की ताकत के बारे में बता चुके हैं. ऐसे में सिर्फ मजबूती काम नहीं आती. तो क्या कोई दूसरा राज भी है. जवाब के लिए आपको चंद महीने पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस जापान दौरे पर ले चलते हैं जब उन्होंने इस तोजी मंदिर में की थी प्रार्थना.

 

पशुपतिनाथ मंदिर की सुरक्षा की कहानी का नाता तोजी मंदिर से है. दरअसल जापान में टाइफून जैसे तूफान और भूकंप जैसी तबाही अक्सर आती रहती है. साल 1995 के भयानक भूकंप ने जापान में 6500 लोगों की जान ली लेकिन तोजी मंदिर को कुछ नहीं हुआ. दरअसल जिस शैली में नेपाल का पशुपतिनाथ और जापान का तोजी मंदिर बना है उसे पगोडा शैली कहते हैं. जापान के भूकंपों और प्राकृतिक आपदाओं में 1400 पगोडाओं में से सिर्फ दो ही गिरे हैं.

 

आखिर पगोडा शैली के इन मंदिरों को भूकंप नुकसान क्यों नहीं पहुंचा पाते. भूकंप के बाद पशुपतिनाथ में प्रार्थना चलती रही तो कैसे. इसके लिए पहले समझते हैं कि आम इमारते भूकंप क्यों नहीं सह पातीं.

 

जब भूकंप आता है तो क्या होता है. धरती के भीतर हलचल शुरू होती है और ये कंपनों की शक्ल में सतह पर आ जाती है. धरती की सतह पर बनी इमारतें भी इस कंपन से कांपती हैं. इस कंपन से जब इमारत इतना झुक जाती है कि उसके वजन का केंद्र इमारत से बाहर की तरफ निकल जाए तो इमारत गिर जाती है.

 

अब पगोडा शैली के मंदिर पर भूकंप का प्रयोग जानिए. पगोडा पर 100 से ज्यादा सेंसर लगाए गए हैं ताकि पता चल सके कि ये भूकंप की तरंगों का क्या असर हो रहा है. आखिर में पगोडा शैली की इमारत भूकंप की तरंगों से लगातार कांपती तो रही लेकिन गिरी नहीं.

 

दरअसल इमारत का ये कांपना ही पशुपतिनाथ मंदिर की सुरक्षा की असली वजह है. दरअसल पगोडा शैली के मंदिरों की ये खासियत होती है कि वो कंपनों के साथ कांपती हैं और इसी वजह से सुरक्षित रहती हैं. ये उल्टी बात भी आपको समझाते हैं. 

 

वीडियो में देखिए पशुपतिनाथ की तरह ही एक पगोडा मंदिर का मॉडल है. धरती के नीचे से जब भूकंप आता है तो धरती कुछ इस तरह से हिलती है. ये कंपनी धरती के ऊपर बने पगोडा मंदिर में भी पहुंचते हैं लेकिन इनकी बनावट ऐसी होती है कि ये एक तरफ नहीं झुकते बल्कि हर मंजिल एक दूसरे से विपरीत दिशा में जाती है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मजबूत चबूतरे पर बने ये मंदिर खंबों पर टिके होते हैं. लेकिन जरा इन खंबों की खासियत जानें. निचली मंजिल का ये खंबा निचली मंजिल पर ही खत्म हो गया. अगली मंजिल का खंबा निचली मंजिल के खंबे से अलग जगह पर बना है. ऐसे में धऱती बाएं जाएगी तो निचली मंजिल दाहिने. निचली मंजिल दाहिने जाएगी तो पहली मंजिल बाएं. ऐसे में इमारत का पूरा वजन एक तरफ नहीं जाता और इमारत बच जाती है.

 

एक और वजह भी है पशुपतिनाथ मंदिर के सुरक्षित रहने की. इसमें छतों को दीवारों पर टिकाए रखने के लिए कुछ इस तरह से लकड़ी का इस्तेमाल होता है. लकड़ी के स्तंभ आपस में जोड़े तो जाते हैं लेकिन कीलों से नहीं. ये एक दूसरे में फंसे रहते हैं.

 

लकड़ी के सिरे कुछ इस तरह से जोड़े जाते हैं. इमारत में भूकंप जैसी किसी वजह से कंपन होने पर ये सिरे कुछ इस तरह से आसानी से हिल सकते हैं. इससे इमारत में लचीलापन बना रहता है जिसकी वजह से इमारत का हर हिस्सा भूकंप के झटकों को आसानी से सह सकती हैं.

 

पशुपतिनाथ मंदिर के ढांचे में इसी तरह के इंटरलॉकिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है और भूकंप से इसका बच जाना कुछ ऐसी ही वास्तुशाष्त्रीय खोजों का नतीजा है.

 

अब तक पशुपतिनाथ मंदिर में नुकसान का एक ही प्रमाण मिलता है. प्राचीन पशुपतिनाथ मंदिर पूरी तरह लकड़ी से बना था जिसे दीमकों ने खा लिया और एक बार मंदिर का ढांचा पूरी तरह नष्ट हो गया था. 17वीं शताब्दी में नेपाल के राजा कीरत यालंबर ने दोबारा बनवाया और इसे पगोडा शैली में ढाल दिया गया. ये आज तक पूरी तरह सुरक्षित है.

 

वीडियो देखने के लिए नीचे क्लिक करें-

 

भूकंप से कैसे बचा पशुपतिनाथ मंदिर? 

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Web Title: Nepal Earthquake: Pashupatinath Temple
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