नेपाल में आए भूकंप से 1910 से ज्यादा लोगों की मौत, गृह मंत्रालय के मुताबिक मरने वालों में 8 भारतीय शामिल, 3 लाख विदेशी पर्यटक भी फंसे

By: | Last Updated: Sunday, 26 April 2015 5:49 AM
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काठमांडू/नई दिल्ली: नेपाल में भूकंप ने भयानक तबाही मचाई है. वहां के गृहमंत्रालय के मुताबिक अब तक 2300 लोगों की मौत हो चुकी है. मरने वालों में 8 भारतीय भी शामिल हैं. करीब 3 लाख विदेशी पर्यटक वहां फंसे हुए हैं. नेपाल में देर रात तक भूकंप के झटके महसूस किए गए. अगले 48 घंटो तक भूकंप के झटके आने की चेतावनी भी जारी की गई है.

 

नेपाल में आज 7.9 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप से दो भारतीयों सहित करीब 1,500 लोगों की मौत हो गयी. इससे राजधानी में सदियों पुरानी धरहरा मीनार और प्रसिद्ध दरबार स्क्वायर सहित कई प्रमुख इमारतें और मकान क्षतिग्रस्त हो गए . यह बीते 80 वषरें का सबसे भयावह भूकंप है.

 

भूकंप का केंद्र काठमांडो से उत्तर पश्चिम में करीब 80 किलोमीटर दूर लामजुंग में था और बिहार तथा पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के कई शहरों में भी इसका असर महसूस किया गया. चीन के साथ ही पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी भूकंप महसूस किया गया.

 

भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 7.9 आंकी गयी और इसके बाद 4.5 अथवा इससे अधिक तीव्रता के कम से कम 16 झटके महसूस किए गए.

 

नेपाल के वित्त मंत्री राम शरण महत ने ट्वीट किया, ‘‘सेना का अनुमान है कि अब तक 1457 लोगों की मौत हो चुकी है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘बारपक लारपक क्षेत्र में करीब एक हजार घरों में से 90 प्रतिशत मलबे के ढेर में तब्दील हो गए हैं.’’ भारतीय दूतावास के एक अधिकारी ने बताया कि शक्तिशाली भूकंप में मरने वालों में भारतीय दूतावास के एक कर्मचारी की बेटी सहित दो भारतीय शामिल हैं.

 

भारतीय दूतावास परिसर में एक मकान नष्ट हो गया जिसमें सीपीडब्ल्यूडी के एक कर्मचारी की बेटी की मौत हो गई. नेपाल में फंसे 52 भारतीयों को आज भारतीय वायु सेना का विमान नेपाल की राजधानी से वापस लाया. काठमांडो में फंसे 200 अन्य भारतीयों को कल तक वापस लाए जाने की उम्मीद है.

 

नेपाली गृह मंत्रालय के अनुसार भक्तपुर में 150, ललितपुर में 67 और धदिंग जिले में 37 लोगों की मौत हुई है. इसके अलावा देश के पूर्वी हिस्से में 20 लोग, पश्चिमी क्षेत्र में 33 लोगों की मौत हुई. नेपाल में कई मंदिर ध्वस्त हो गए लेकिन चमत्कारिक ढंग से पांचवीं सदी के पशुपतिनाथ मंदिर को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है.

 

काठमांडो घाटी की अधिकांश इमारतें ध्वस्त हो गईं जिनमें सैकड़ों लोगों की मौत हो गई. दो सौ साल पुरानी धरहरा मीनार के मलबे से 200 से अधिक शवों को निकाला गया है.

 

नेपाल में सामने आई वीडियो फुटेज में कई इमारतों को ढहते हुए दिखाया गया है और कई इमारतों में दरारें आ गई हैं. भूकंप के कारण सड़कों पर बड़े गड्ढे हो गए हैं.

 

भूकंप के कारण यूनेस्को विश्व विरासत स्थल में शुमार काठमांडो का दरबार चौक पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया.

 

नेपाल पुलिस के प्रवक्ता कमल सिंह बान ने बताया कि सबसे पहले दिन में 11 बजकर 56 मिनट पर भूकंप आया और इसके कई झटके महसूस किए गए.

 

सेना, पुलिस और आपात सेवा के जवान मलबे में फंसे लोगों को निकालने और घायलों को अस्पताल पहुंचाने में जुटे हुए हैं. भारतीय दूतावास के प्रवक्ता अभय कुमार ने बताया कि भूकंप की वजह से कुछ दीवारें ध्वस्त हो गयीं और दूतावास ने दो हेल्पलाइन शुरू की है. पहला हेल्पलाइन नंबर 977 98551107021 और दूसरा नंबर 977 9851135141 है.

 

आपात चिकित्सा सेवा प्रदान करने के लिए भारत से 50 चिकित्सक पहुंच गए हैं.

 

काठमांडो में भारतीय दूतावास परिसर में स्थित एक मकान के ढहने से दूतावास के एक कर्मचारी की बेटी की मौत हो गई तथा उसकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गई.

 

महाराष्ट्र और तेलंगाना से करीब 125 लोग नेपाल में फंसे हैं.

 

भूकंप से एक पर्वतारोही सहित चार चीनी नागरिकों की मौत हो गई और पांच गंभीर रूप से घायल हुए हैं . यह नेपाल में 1934 में आए 8.4 तीव्रता के भूकंप के बाद अब तक का सबसे विनाशकारी भूकंप है.

 

नेपाल के अस्पताल भूकंप में घायल हुए लोगों से भरे पड़े हैं. बहुत सारे घायलों का उपचार अस्पतालों के बाहर खुले में किया जा रहा है.

 

गृह मंत्रालय ने कहा कि कैबिनेट की आपात बैठक में भूकंप से प्रभावित 29 जिलों को संकटग्रस्त क्षेत्र घोषित किया गया है.

 

भूकंप के कारण माउंट एवरेस्ट पर हिमस्खलन हुआ जिसके कारण पर्वतारोहियों को बचने के लिए सुरक्षित स्थान की ओर भागना पड़ा.

 

पर्यटन मंत्रालय के अधिकारी ज्ञानेंद्र श्रेष्ठ ने कहा कि हिमस्खलन के कारण विदेशी पर्वतारोहियों सहित 10 लोगों की मौत हो गई.

नेपाल के एक मंत्री ने बताया कि भूकंप के केंद्र के पास जबरदस्त नुकसान हुआ है.

 

सूचना मंत्री मिनेंद्र रिजल ने बताया, ‘‘हमें विभिन्न अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से सहयोग की जरूरत है जिन्हें ज्यादा जानकारी है और जो इस तरह की आपात स्थिति से निपट सकती हंै.’’ शुरूआत में भूकंप की तीव्रता 7.5 आंकी गयी बाद में इसकी तीव्रता 7.9 बतायी गयी और इसकी गहराई 15 किलोमीटर नीचे थी.

 

नेशनल रेडियो ने लोगों को बाहर रहने को कहा है क्योंकि अभी कई झटके आने की आशंका है. त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को बंद कर दिया गया है.

 

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