बंद न हो व्हाट्सएप, वाइबर, स्काइप की फ्री कॉल: कांग्रेस

By: | Last Updated: Saturday, 18 July 2015 1:15 PM
net neutrality

नई दिल्ली: आज एक बार फिर मोदी सरकार पर कांग्रेस ने निशाना साधा. इस बार कश्मीर और नेट न्यूट्रिलिटी विशेष मुद्दा रहा. नेट न्‍यूट्रिलिटी के मुद्दे पर सरकार का विरोध करते हुए कांग्रेस नेता आरपीएन सिंह ने कहा कि नेट न्‍यूट्रेलिटी बनी रहनी चाहिए. देश के गांवों में भी लोग व्‍हाट्सऐप का उपयोग करते हैं ऐसे में इंटरनेट की आजादी जरूरी है.

 

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह सूट बूट की सरकार आजादी छिनना चाहती है. सीमा पर लगातार हो रहे संघर्ष विराम पर भी कांग्रेस ने प्रधानमंत्री से जवाब मांगा है.

 

कांग्रेस नेता आरपीएन सिंह ने कहा कि जो सरकार चुनाव के समय में राष्‍ट्रवाद की बात करती थी वह कश्‍मीर में पाकिस्‍तान और आईएस के झंडे फहराए जाने के बाद भी क्‍यों चुप है? उन्होंने आरोप लगाया कि जबसे सरकार बीजेपी-पीडीपी की बनी भारत विरोधी ताकतें बढ़ीं हैं.

 

अब व्हाट्सएप, वाइबर और स्काइप से नहीं कर पाएंगे देश भर में कॉल!

 

इंटरनेट की आजादी को लेकर  बनी कमेटी ने  कहा है कि स्काइप, वाट्सऐप और वाइबर जैसे एप की मदद से इंटरनेट पर लोकल कॉल को टेलीकॉम सर्विस कंपनियों की सामान्य फोन कॉल सेवाओं की तरह मान कर उस पर उसी प्रकार अंकुश लगाना चाहिए.

 

टेलिकॉम मंत्रालय ने व्हाट्सएप, वाइबर और स्काइप जैसी OTT सेवाओं की कालिंग पर अंकुश की तरफदारी की है. नेट न्यूट्रलिटी पर बनी टेलिकॉम मंत्रालय की कमिटी ने OTT सेवाओं की घेरलू कालिंग सेवा (देश में कालिंग) पर रेगुलेशन की बात की है. हालांकि, इन सेवाओं के जरिये अंतर्राष्ट्रीय कालिंग पर कमिटी ने नर्म रुख रखा है.

 

कमेटी ने रिपोर्ट में कहा है की इंटरनेट के जरिये अंतर्राष्ट्रीय कालिंग पर नर्म रुख रखने की ज़रूरत है. कमेटी ने घेरलू कालिंग के लिए कहा  है कि टेलिकॉम कंपनियों पर रेगुलेशन है और इसलिए व्हाट्सएप, वाइबर और स्काइप जैसी सेवाओं की कालिंग पर भी रेगुलेशन होना चाइये. कमेटी की रिपोर्ट में नेट न्यूट्रलिटी का समर्थन किया गया है. सरकार ने कमेटी की रिपोर्ट पर जनता के सुझाव मांगे हैं. जनता 15 अगस्त तक अपने सुझाव दे सकती है.

 

इस समिति ने फेसबुक की इंटरनेट डॉट ऑर्ग जैसी स्कीम पर रोक लगाने की सिफारिश की है जो कुछ वेबसाइटों से संपर्क के लिए ग्राहकों से मोबाइल डेटा का कोई चार्ज नहीं लेंती. समिति का सुझाव है कि उसी तरह की एयरटेल जीरो जैसी स्कीम्स को ट्राई की पूर्व अनुमति के बाद ही लागू करने की छूट होनी चाहिए.

दूरसंचार विभाग के टेक्निकल एडवाइज़र एके भार्गव की अध्यक्षता वाली इस समिति ने कहा है कि ‘ओवर-दी-टॉप (OTT) वायस ऑन इंटरनेट प्रॉटॉकोल पर इंटरनेशनल कॉल सेवाओं को लेकर ढील दी जा सकती है. लेकिन लोकल घरेलू कॉल (लोकल और नेशनल)  के मामले में टेलीकॉंम कंपनियों को ओटीटी कम्युनिकेशन सर्विस को फिलहाल नियामकीय दृष्टि से समान रूप से देखा जा सकता है.’

 

समिति की रिपोर्ट की कुछ खास बातें

नई तकनीकों और बुनियादी सुविधाओं को समय-समय पर उन्नत किया जाए ताकि इसके दुरुपयोग से बचा जा सके.

इंटरनेट यूज़र्स  के अधिकारों को सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सेवा प्रदाता कंपनी इंटरनेट पर सामग्री भेजने, प्राप्त करने, दिखाने, इस्तेमाल करने, कोई भी कानूनी सामग्री साझा करने के लिए उपभोक्ताओं के अधिकारों को सीमित नहीं करे.

ओवर-दी-टॉप (OTT) मे टेक्स्ट मैसेजिंग के लिए कमेटी ने कहा है कि इस पर दूसरी कम्यूनिकेशन सर्विंस की तरह  चौकसी नहीं रखी जाए.

नए विधेयकों में इंटरनेट तटस्थता के सिद्धांतों को समेटा गया हो.

 

रिपोर्ट में कहा गया है की OTT प्लेयर्स जैसे वाइबर, स्काइप आदि की मैसेजिंग सेवाओं से कोई उल्लंघन नहीं हो रहा.

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