श्री श्री के कार्यक्रम पर NGT की सभी विभागों को फटकार

By: | Last Updated: Wednesday, 9 March 2016 2:34 PM
ngt raises question on sri sri program

नई दिल्ली: श्री श्री रविशंकर के आयोजन को लेकर एनजीटी में सुनवाई चल रही है. इसी सुनवाई के दौरान एनजीटी ने दिल्ली औऱ केंद्र सरकार के विभागों को फटकारा लगाई है. एनजीटी ने कहा सब कह रहे हैं हमें पता नहीं, ऐसा कैसे हो सकता है.

इसके साथ ही एनजीटी ने श्री श्री के कार्यक्रम पर कई सवाल उठाए. यमुना किनारे कार्यक्रम करने के लिए श्री श्री रविशंकर ने कहा था कि एंजाइम से यमुना की सफाई करेंगे. इस पर एनजीटी ने दिल्ली प्रदूषण समिति से पूछा है कि क्या वो बिना जांच एंजाइम को यमुना में डालने की इजाजत देगी. इस बीच सांस्कृतिक उत्सव पर राजनीति गर्म होने से सहमे श्री श्री रविशंकर ने राजनीति न करने की अपील की है.

श्री श्री रविशंकर के सांस्कृतिक उत्सव का विवाद पर्यावरण तक सीमित नहीं रह गया है. श्रीश्री के लिए सेना के पुल बनाने से विवाद सेना के दुरुपयोग तक पहुंच गया है. राज्यसभा में आज इसी बात को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेर लिया. सरकार ने श्री श्री का भी बचाव किया है और सेना के इस्तेमाल को भी सही ठहराया है.

श्री श्री रविशंकर के कार्यक्रम में सेना को लगाने पर रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर संसद में बयान देंगे. रक्षा मंत्री पर सेना के दुरुपयोग करने के आरोप लग रहे हैं. पुल विवाद पर सेना ने एबीपी न्यूज़ से बात करते हुए कहा है कि हमने सिर्फ रक्षा मंत्रालय के आदेश का पालन किया. इससे पहले 2007 में सिंगर यान्नी के कार्यक्रम के लिए ताजमहल के पीछे पुल बनाया था. 11 मार्च से शुरू होने वाला उत्सव फिलहाल विवाद में घिरा हुआ है.

श्री श्री रविशंकर के बारे में जब पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर से सवाल पूछा गया तो वो कैमरे से बचते दिखे. बाद में कहा कि एनजीटी में सरकार ने हलफनामा दिया है. एनजीटी के फैसले का इंतजार कर रहे हैं.

आज राज्य सभा में भी श्री श्री के कार्यक्रम को लेकर हंमागा हुआ विपक्ष ने जहां इस कार्यक्रम से होने वाले नुकसान को लेकर सरकार को घेरा. सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने श्री श्री का पक्ष लिया. नकवी ने कहा, श्री श्री एक बड़े आध्यात्मिक गुरू हैं. उनकी नियत पर सवाल कड़े करना सही नहीं है. इस पूरे मामले पर ग्रीन ट्रिब्यूनल में सुनवाई चल रही.

क्या हैं आर्ट ऑफ लिविंग के इस कार्यक्रम से जुड़े विवाद

पहला विवाद: कार्यक्रम को लेकर पहला विवाद ये है कि आयोजन से यमुना और इसके आस पास के इकोलॉजी सिस्टम को बड़े नुकसान का दावा किया जा रहा है. यमुना जिए नाम के एनजीओ से जुड़े मनोज मिश्रा ने आर्ट ऑफ लिविंग कार्यक्रम के खिलाफ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में अर्जी लगाई है.

दूसरा विवाद: विवादों की लिस्ट एक खास लिक्विड भी है. ये कोई मामूली लिक्विड नहीं है आर्ट ऑफ लिविंग का दावा है कि इस लिक्विड से यमुना को शुद्ध किया जाएगा और वो यमुना से आने वाली बदबू को खत्म करने के लिए इस इको एन्जाइम को नदी में डाल रहे हैं. यमुना और इससे जुड़े नालों में करीब 5 हजार लीटर इको एन्जाइम सिस्टम डाला जाएगा.

तीसरा विवाद: तीसरा विवाद मंजूरी को लेकर है. कार्यक्रम के लिए जगह आवंटित करन वाले दिल्ली विकास प्राधिकरण यानी DDA ने कहा है कि सिर्फ 5 लाख लोगों के आने की बात कहकर 24 एकड़ क्षेत्रफल में मंजूरी दी गई थी लेकिन अब कार्यक्रम इससे कहीं ज्यादा बड़ी जगह में आयोजित किया जा रहा है. वहीं दिल्ली सरकार ने कहा है कि महोत्सव के लिए दिल्ली पुलिस और फायर डिपार्टमेंट से मंजूरी नहीं ली गई है.

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