व्हीलचेयर मांगी तो नहीं दिया होटल में प्रवेश!

By: | Last Updated: Saturday, 7 March 2015 11:02 AM
Nipun Malhotra

नई दिल्ली: शारीरिक रूप से अपंग एक मानवाधिकार कार्यकर्ता को दक्षिण दिल्ली के एक महंगे बार एवं रेस्तरां में प्रवेश नहीं करने दिया गया जिसकी मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने आज जमकर आलोचना की.

 

निपुण मल्होत्रा अथरेग्राइपोसिस नामक दुर्लभ जन्मजात विकार से पीड़ित हैं. उन्हें कल रात रेस्तरां में प्रवेश नहीं करने दिया गया.

 

निपमान फॉउंडेशन के सह संस्थापक मल्होत्रा को कथित रूप से रेस्तरां के सुरक्षाकर्मी और प्रबंधक ने कहा कि वह शारीरिक रूप से विकलांग हैं इसलिए उन्हें भीतर जाने की इजाजत नहीं दी जा सकती.

 

मल्होत्रा ने कहा, ‘‘ हमारे मित्रों ने डिनर पर जाने का निर्णय लिया था. इसलिए मेरे नौ दोस्त रेस्तरां गए. मेरे एक मित्र ने मैनेजमेंट को विनम्रतापूर्वक बताया कि हममें से एक व्यक्ति व्हीलचेयर पर आएगा और उसे यह सुनिश्चित करना चाहिए वह मेज तक पहुंच पाए.’’ उन्होंने कहा, ‘‘ प्रबंधक ने पूछा कि वह दोस्त चोटिल है या शारीरिक रूप से विकलांग है. मेरे मित्र ने जब बताया कि वह शारीरिक रूप से अक्षम है तो प्रबंधक ने कहा कि वे विकलांगों को एक नीति के तहत भीतर आने की अनुमति नहीं देते.’’

 

मल्होत्रा ने कहा,‘‘ मेरे मित्र ने जब मुझे इस बारे में बताया तो मैं यकीन नहीं कर पाया और अपने भाई के साथ वहां गया. वहां तैनात सुरक्षाकर्मी ने यह कहते हुए हमें अंदर जाने से रोक दिया कि होटल की नीति के तहत शारीरिक रूप से अक्षम लोगों को भीतर जाने की अनुमति नहीं है और उसने मेरी व्हीलचेयर पीछने खींचनी शुरू कर दी.’’ उन्होंने कहा, ‘‘ मैं स्तब्ध था. तब प्रबंधक बाहर आया और उसने कहा कि वे अकेले पुरुषों को भीतर नहीं जाने देते. जब मैंने उसे बताया कि मेरे तीन पुरुष मित्र और कई अन्य पहले ही अंदर हैं, तो वह कैसे कह सकते हैं कि वह अकेले पुरुषों को प्रवेश नहीं करने देते.’’ रेस्तरां ने कहा कि इस मामले में गलतफहमी हुई है.

 

महाप्रबंधक प्रेमजीत कुमार ने कहा, ‘‘ यह स्पष्ट रूप से गलतफहमी का मामला है. होली होने के कारण दरवाजे पर बहुत से ऐसे लोग थे जिन्होंने शराब पी रखी थी. एहतियातन हम अंदर लड़कों की संख्या सीमित कर रहे थे.’’ प्रबंधक ने कहा,‘‘ निपुण के साथ दो और लड़के थे और उन्हें अंदर आने की अनुमति देने से पुरुषों की संख्या बढ जाती. इसलिए हमने कह दिया कि हम अब अकेले पुरुषों को भीतर नहीं जाने देंगे.’’ डिसएबिलिटी राइट्स ग्रुप के संयोजक जावेद आबिदी ने कहा कि इस मामले के पीछे जो लोग हैं, उन्हें सजा दी जानी चाहिए.

 

उन्होंने कहा, ‘‘ यह निस्संदेह गलत बात है. यह निशक्तजन अधिनियम 1995 का उल्लंघन है. इस कृत्य की केवल आलोचना ही नहीं होनी चाहिए बल्कि इस मामले में सजा भी दी जानी चाहिए.’’ तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ ब्रायन ने मल्होत्रा को अपनी मेल आईडी ट्वीट की और उनसे मामले की जानकारी मांगी. उन्होंने इस मामले को अगले सप्ताह संसद में उठाने का वादा किया. निशक्तजन अधिकार कार्यकर्ता मालविका अय्यर ने कहा, ‘‘ हम निशक्तजन के अधिकारों की बात करते हैं, उन्हें शिक्षा एवं रोजगार के क्षेत्र में शामिल करने की बात करते हैं. लेकिन यह घटना स्पष्ट रूप से दिखाती है कि निशक्तजन के अधिकारों में सबसे बड़ी बाधा समाज का रख है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘ यह दर्शाता है कि बड़े स्तर पर लोगों को संवेदनशील बनाने की आवश्यकता है और हम खुश हैं कि इस घटना पर बात हो रही है.’’

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