निर्भया के दोषी को गांव में नो इंट्री!

By: | Last Updated: Saturday, 19 December 2015 10:21 PM
nirbhaya case juvenile villagers reaction

नई दिल्लीः  ‘निर्भया’ के साथ दरिंदगी के आरोप में तीन साल की सजा भुगतने के बाद कल रिहा हो रहे किशोर की सजा बढ़ाने की पुरजोर मांगों के बीच सुरक्षा कारणों को देखते हुए बाल सुधार गृह से शिफ्ट कर दिया गया है. निर्भया के माता-पिता विरोध प्रदर्शन कर रहें हैं. वहीं दोषी के  गांव का एक पक्ष उसे गांव में दाखिल होने का विरोध करने की तैयारी में है.

दिसम्बर 2012 में दिल्ली में एक चलती बस में मेडिकल की एक छात्रा से सामूहिक बलात्कार जैसे देश को झकझोर देने वाले काण्ड के नाबालिग आरोपी का पैतृक गांव बदायूं में है और वहां के अनेक लोग नहीं चाहते कि निर्भया का दोषी अब कभी अपने गांव लौटे.

गांव के बुजुर्ग फूलचंद्र का कहना है कि निर्भया काण्ड के दोषी उस लड़के ने इतना घिनौना काम किया है कि उसे अब इस गांव में रहने का कोई अधिकार नहीं है. उस वारदात के बाद देश-विदेश में गांव की बहुत बदनामी हुई है.

उन्होंने कहा कि निर्भया काण्ड के बाद बाहर पढ़ने वाले इस गांव के युवाओं को हिक़ारत भरी नजरों से देखा जाता है. यहां तक कि कोई उन्हें नौकरी देने को भी तैयार नहीं है, नतीजतन गांव में बेरोजगारों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है.

गांव के निवासी अनिल, कुन्नू, रामपाल, गुलाब और नरेश समेत बड़ी संख्या में लोगों की इच्छा है कि निर्भया का गुनहगार अब कभी गांव वापस ना लौटे.

हालांकि वारदात के वक्त नाबालिग होने की वजह से मात्र तीन साल की सजा पाये निर्भया के साथ दरिंदगी के दोषी लड़के के परिजन तथा कुछ और लोग उसके गांव वापस लौटकर सुधरने और उसे नई जिंदगी शुरू करने का एक मौका देने की हिमायत भी कर रहे हैं.

उसकी मां का कहना है कि परिवार का कोई भी सदस्य उसे लेने के लिये दिल्ली नहीं जाएगा लेकिन उनकी दिली ख्वाहिश है कि उनका बेटा बाल सुधार गृह से छूटकर सीधा अपने गांव वापस आये और बेहद गरीबी में जी रहे अपने परिवार की मदद करे.

उसने बताया कि उसका पति मंदबुद्धि है और परिवार का भरण-पोषण दो जवान बेटियों की मेहनत-मजदूरी से होता है. ऐसे में परिवार को अपने बेटे की सख्त जरूरत है.

गांव के ही हाजी तौसीफ रजा समेत कई लोगों का कहना है कि जिंदगी का इतना बड़ा सबक सीखने और ताजिंदगी दाग का दंश देने वाली सजा भुगतने के बाद लड़के को नया जीवन शुरू करने का एक और मौका तो मिलना ही चाहिये. गांव के लोग उसे अपने पैरों पर खड़े होने में पूरी मदद करेंगे ताकि वह दोबारा अपराध के दलदल में ना फंसे.

गौरतलब है कि 16 दिसम्बर 2012 को दिल्ली के वसंत विहार इलाके में चलती बस में मेडिकल की एक छात्रा से हुई सामूहिक बलात्कार की वारदात ने पूरे देश और दुनिया को हिला दिया था. उस वारदात में गम्भीर रूप से घायल उस लड़की की बाद में इलाज के दौरान मौत हो गयी थी. उसका एक नाबालिग दोषी उसे मिली तीन साल की सजा भुगतने के बाद कल रिहा हो रहा है.

दिल्ली हाई कोर्ट में उसकी रिहाई पर रोक लगाने के अनुरोध को ठुकरा दिया था. इसके साथ ही उसकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया है.

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Web Title: nirbhaya case juvenile villagers reaction
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