प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोले गडकरी, मैं राज ठाकरे का करीबी हूं

By: | Last Updated: Saturday, 3 October 2015 2:28 PM
nitin gadkari

दिबांग- एक चेहरे पर कई चेहरे लगा लेते हैं लोग. ये आप का सर्वप्रिय गाना है क्या?

 

नितिन गडकरी- ये मेरा प्रिय गाना नहीं है. लेकिन राजनीति में जब लोग कई बार अपने स्वार्थ के लिए भूमिका बदल देते हैं, तो ये उनके लिए है ये मैंने कहा था.

 

दिबांग- मौके पर फिल्मों में जैसे गाना आता है तो आप ने मौके पर वो गाना चुना. नितिन जी शुरूआत करते हैं. नारे आप लोगों पर भारी पड़ रहे हैं यानी अच्छे दिन की बात हो, 100 दिन में काला धन लाने की बात हो, कुछ नारे तो आप कह रहे है कि जुमला था. क्या ऐसा है?

 

नितिन गडकरी- देखिए अच्छे दिन आए हैं तो क्या आज मंहगाई कम नहीं है, इन्फ्लेशन कम नहीं है. मैं आप को एक बात बताता हूं कि अच्छे दिन कोई ऐसा कॉन्सेप्ट नहीं है कि 100% सबका सैटिसफेक्शन हो सके.

 

दिबांग- गडकरी जी अब ये हेडलाइन बन रही है कि सौ फीसदी सबके लिए अच्छे दिन हों. कुछ लोगों के लिए अच्छे दिन हैं.

 

नितिन गडकरी-  आप के लिए जो अच्छे दिन की अपेक्षा है, मेरे लिए जो अच्छे दिन की अपेक्षा है, मेरे लिए अपेक्षा है, इनके लिए जो अपेक्षा है, हर व्यक्ति की अलग-अलग अपेक्षा है.

 

दिबांग- दाल की कीमत देख लीजिए, प्याज की कीमत देख लीजिए, सब्जियों की कीमत आप देख लीजिए

 

नितिन गडकरी-  देखिए मैं किसान हूं. प्याज का संबंध किसी इकोनॉमिक पॉलिसी के साथ नहीं है, वो सप्लाई और डिमांड के साथ है. और इसलिए जब प्याज होता है तो सस्ता होता है और जब नहीं होता है तो मंहगा होता है.

 

दिबांग- एक ग्रहणी जो घर चलाती है उसके लिए अच्छे दिन तभी होते हैं, जब चीजें सस्ती होती हैं. आप की इकॉनमी और कहां से ग्रोथ हुआ, कहां से जलमार्ग बना, इससे उनको कोई मतलब नहीं होता है.

 

नितिन गडकरी-  देखिए पहली बात गैस की किमतें कम नहीं हुई. इसेंसिअल कमोडिटी की चीजों के भाव कम नहीं हुए, पेट्रोल डीजल के भाव कम नहीं हुए.

 

दिबांग- तो अच्छे दिन आ गए.

 

नितिन गडकरी-  मैं आप को वही बात बता रहा हूं कि आज महंगाई कि दृष्टि से हमारी सरकार मंहगाई काबू में लाने में सफल हुई है. दूसरी बात सरकार में स्वाभाविक रूप से जनता की जो अपेक्षा है, बेरोजगार लोगों को रोजगार मिलने की अपेक्षा है. ये कोई एक दिन में चमत्कार जैसे नहीं होगा. स्किल डेवलपमेंट की बात आई. और व्यवसायिक रूप में शिक्षा की बात हो रही है.

दिबांग- और काला धन

नितिन गडकरी-  काला धन के बारे में हमने कानून बनाया और पहली कैबिनेट मीटिंग में हमने सुप्रीम कोर्ट में हमने एसआईटी बनाने की स्वीकृति दी जो पिछली सरकार ने नहीं दी थी.

 

दिबांग- आप कहते थे कि 100 दिन में काला धन आ जाएगा और सबसे ज्यादा इसी बात पर तालियां बजती थीं.

 

नितिन गडकरी-  पहली बात तो ये काला धन, अभी देश से पैसा भेजने वाला काम बंद हो गया है. काला धन का निर्माण होना बंद हो गया है. दूसरी बात जो योजनाएं हमने जाहिर की है और जिसके कारण काफी बड़े पैमाने पर ये धन आएगा उसपर आने वाले समय में रिपोर्ट देखने के बाद उसपर टिप्पणी करना उचित होगा. एक बात जरूर है कि ये प्रोसेस कोई जल्दी होने वाली नहीं है. इसकी कानूनी प्रक्रिया है, सुप्रीम कोर्ट इसमें इन्वाल्व्ड है. सुप्रीम कोर्ट भी लगातार मॉनिटरिंग कर रहा है. अन्य देशों के साथ कुछ ट्रीटी है वो भी करनी पड़ेगी तो इसमें कुछ समय लगेगा.

 

सवाल- बीजेपी अपने संगठन के लिए जानी और मानी जाती थी. कार्यकर्ता से लेकर अध्यक्ष तक सबकी अपना अलग महत्व था. अब कुछ ऐसी धारणा बनी और देखने में भी आ रहा है कि कांग्रेस की तरह एक मोनोलिथिक्स स्ट्रक्चर बन गया.  आप उसके प्रधान रहे हैं, और आज आप वरिष्ठ मंत्री तो हैं जैसा दिबांग जी ने कहा आप प्रधानमंत्री जी के करीबी भी हैं लेकिन संगठन में आप जैसे जो वरिष्ठ नेता थे वो, जिनका एक ट्रैक रिकॉर्ड था उनकी रेलेवेंस पार्टी में कहीं खो गई है, जितनी होनी चाहिए था वो नहीं है. वो चाहे महाराष्ट्र का लेवल हो या केंद्र का हो. आप को लगता है कहीं घुटन सी है.

 

नितिन गडकरी- देखिए पहले पहली बात तो ये हैं कि बीजेपी की एक विशेषता है. कुछ पार्टी पिता-पुत्र की पार्टी है, कुछ माँ-बेटे की पार्टी है, कुछ वन मैन आर्मी की पार्टी है कोई होलसेल किराने की दुकान है. हमारी पार्टी कभी अटल बिहारी वाजपेयी जी की पार्टी नहीं बनी, कभी आडवानी जी की पार्टी नहीं बनी, कभी नीतिन गडकरी की पार्टी नहीं बनी.

सवाल- मोदी जी की पार्टी तो बनी?

 

नितिन गडकरी- कभी नरेंद्र मोदी जी की पार्टी नहीं बनी.  जैसे प्रधानमंत्री के पेट से प्रधानमंत्री पैदा हो रहा है, मुख्यमंत्री के पेट से मुख्यमंत्री पैदा हो रहा है. एमएलए के पेट से एमएलए पैदा हो रहा है, एमपी के पेट से एमपी पैदा हो रहा है. वैसे बीजेपी में ये गुंजाइश नहीं है कि नीतिन गडकरी का लड़का अध्यक्ष बनेगा या मोदी जी का तो कोई है ही नहीं.

 

दिबांग- गडकरी जी आप दूसरी बार अध्यक्ष बनने वाले थे. मैं वहां उन दिनों में जाना चाहता हूं. पूरी तैयारी हो चुकी थी, पार्टी का संविधान बदल चुका था, आप अध्यक्ष बनने वाले थे और अचानक एक रेड हो गई. और ये कहा गया कि इस रेड में बाहर वाले तो बाहर वाले इस रेड में कुछ अंदर वाले भी शामिल थे.

 

नितिन गडकरी-  एक बात तो तय है कि जिस दिन उन कंपनियों पर रेड हुई. वो ना कंपनी मेरी थी और ना मेरा कोई संबंध था. उल्टा मुझे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने क्लीन चिट दी और कहा मेरा इसके साथ कोई संबंध नहीं है. पर उसी दिन ये करने के पीछे साजिश थी, षणयंत्र था और षणयंत्र कांग्रेस पार्टी का था.

दिबांग- उसी दिन की वजह से आप पार्टी अध्यक्ष नहीं बन पाए ये बात तो आप मानेंगे.    

नितिन गडकरी-  जब ये बात चर्चा में आई और एक हमारे नेता ने पूछा कि आप पार्टी अध्यक्ष बनने वाले हैं तो इसी की चर्चा करते रह गए लोग और हमको जवाब देना पड़ गया. तो मैंने बोला इसका उपाय एक है वो बोले क्या तो मैंने बोला मैं इस्तीफा दे देता हूं. मैं नहीं चाहता कि पार्टी का कोई नुकसान हो.

सवाल- इसमें पार्टी के अंदर भी कोई साजिश थी क्या कि आप को दूसरी बार अध्यक्ष बनने से रोका जाए.

 

नितिन गडकरी- जबतक कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं है तो तक मैं कोई टिप्पणी करता नहीं हूं. पर मैंने एक बात देखी है. मैं पार्टी में किसी के खिलाफ नहीं बोलूंगा, किसी के खिलाफ षणयंत्र नहीं करूंगा, किसी के लिए ब्रीफिंग नहीं करूंगा और किसी को बदनाम नहीं करूंगा. अगर मेरे बारे में कोई कुछ किया होगा, एक तो किया है या नहीं किया इसका मेरे पास कोई प्रूफ नहीं है. और अगर किया भी होगा तो भी मैं उसके ऊपर कभी नाराज नहीं होऊंगा. क्योंकि अच्छे कार्यकर्ताओं के लिए जहर भी पचाना चाहिए, पार्टी के लिए. लेकिन जो कुछ भी हुआ उसका दुख और दर्द मुझे बहुत समय तक रहा.

 

सवाल सिद्धार्थ- आप 2010-12 के बीच में बीजेपी के सबसे उभरते हुए सितारे थे बीजेपी के. आज आप सिर्फ मंत्रियों में से एक हैं. दूसरी बात अभी बातचीत में आप ने कही कि आप से एक नेता ने पूछा पार्टी के कि क्या सिर्फ इसी की चर्चा होगी कि हमारी पार्टी के अध्यक्ष के ऊपर आरोप है. ये तो साबित करता है कि अंदर के कुछ लोगों की चाहत थी कि आप अध्यक्ष ना बनें.

 

नितिन गडकरी- देखिए एक बात मैं आप को बताता हूं कि मेरी किसी के प्रति कोई नाराजगी भी नहीं है, किसी के प्रति द्वेष भी नहीं है और एक बात जरूर है उस समय की कांग्रेस की सरकार में, उस समय के वित्तमंत्री के इशारे पर मुंबई में जो कंपनियां मेरे संबंध में नहीं थीं, उन पर रेड करने से पहले मीडिया को बताया गया, फिर उनके ऊपर रेड की गई. बाद में कुछ निकला नहीं उसमें से. ये बातें होती रहीं, जिनका मेरे साथ कोई संबंध नहीं था. अब उन्होंने किया है और उसका पाप-पुण्य वो देखते रहें. मेरे हाथ में कभी मिलेंगे तो मैं भी छोड़ूंगा नहीं उनको. मैं उसमें से नहीं हूं, बीजेपी के आम कल्चर में और मेरे कल्चर में फर्क है.  मैं किसी का विरोध भी नहीं करता और दुश्मनी भी नहीं करता पर एकआध बार किसी को पटखनी देनी है तो ललकार के पटखनी देने में संकोच भी नहीं करता.

मैं बाला साहेब ठाकरे के बड़े नजदीक था और उनके जीवन से बड़ा प्रभावित हूं. बड़े अच्छे व्यक्ति थे, अच्छे नेता थे.

 

दिबांग- मतलब कोई डायरी जरूर है जिसमें आप ने कुछ नाम लिख रखे हैं.

नितिन गडकरी- सर वो तो जाहिर नहीं करते लेकिन जब समय आएगा तो हिसाब चुका देंगे. कर्जा चुका देना चाहिए

सवाल- उसमें कुछ अपनी पार्टी के भी नाम हैं

नितिन गडकरी- नहीं अपनी पार्टी के नहीं हैं.

दिबांग- नहीं वो नाम जाहिर नहीं करते. और एक नाम तो उसमें साफ दिखाई दे रहा है… पी चिदंबरम

नितिन गडकरी- नहीं नहीं छोड़ दीजिए अब खत्म हो गए. अब तो लोकसभा में भी नहीं हैं.

 

सवाल- ममता बनर्जी ने नेता जी के फाइलों को खोला है. और उन्होंने केंद्र को चुनौती भी दी है कि जो फाइल केंद्र में भी हैं नेता जी की, उनको भी खोलना चाहिए. तो आप की सरकार उसका क्या जवाब देगी. क्या इसके पीछे कुछ राजनीति भी है.

नितिन गडकरी- देखिए इसमें राजनीति नहीं होनी चाहिए. नेता जी सुभाष चंद्र बोस हमारे प्रेरणास्त्रोत हैं. देश की स्वाधीनता के लिए किया गया उनका बलिदान, त्याग, तपस्या हम कभी भूल नहीं सकते हैं. वो हमारे एक आइकॉन हैं और इसलिए चाहे राज्य सरकार हो चाहे केंद्र सरकार हो. किसी भी सच्चाई को किसी भी पार्टी की सरकार को छुपाना नहीं चाहिए. जो सच है वो इतिहास है और इतिहास जो है वो भविष्य के कार्य की प्रेरणा देता है. उससे भविष्य की पीढ़ी सीखती है. मुझे लगता है कि जो भी नेता जी के संबंध में इतिहास है. इतिहास के रूप में सरकार के पास है, वो नई पीढ़ी के सामने आना चाहिए. सबको समझना चाहिए कि सच्चाई क्या है और सच्चाई को छुपाने का काम किसी को भी नहीं करना चाहिए ऐसा मुझे लगता है.

 

दिबांग- तो केंद्र सरकार के पास जो कागज हैं वो भी सार्वजनिक कर देने चाहिए, जैसे पश्चिम बंगाल में किया गया.

नितिन गडकरी- मेरी व्यक्तिगत राय तो है लेकिन इसका निर्णय प्रधानमंत्री और हमारे गृहमंत्री राजनाथ सिंह जी करेंगे.

 

दिबांग- थोड़ा बिहार चुनाव की बात करें. गडकरी जी आप ये मानते हैं कि बिहार चुनाव में जाति का बहुत बड़ा रोल होता है और आप की पार्टी इस बात को मानती है और इसी खेल को खेल भी रही है.

 

नितिन गडकरी- नहीं हम ऐसा खेल नहीं खेल रहे हैं. हम नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में कोई जातिवाद की बात नहीं कर रहे हैं, विकास की बात कर रहे हैं.

दिबांग- दिल्ली में ही 10 जुलाई को ओबीसी मोर्चा का एक सम्मेलन हुआ, जिसमें आप के पार्टी अध्यक्ष ने कहा कि बीजेपी ने देश को पहला ओबीसी प्रधानमंत्री दिया.

 

नितिन गडकरी- ये तो सच है कि नरेंद्र मोदी जी ओबीसी हैं. किसी भी चुनाव में गुजरात में, लोकसभा के चुनाव में नरेंद्र मोदी ओबीसी हैं ये कर के हमने प्रचार नहीं किया.

दिबांग- हालांकि देवगौड़ा कह रहे हैं कि वो पहले ओबीसी प्रधानमंत्री थे लेकिन फिर भी ये कार्ड चला.

नितिन गडकरी- मैं आप को एक बात बताता हूं कि मैं जातिवाद का बहुत कट्टर विरोधी हूं. कोई भी व्यक्ति जात-पंथ-धर्म से बड़ा नहीं होता, उसके गुणों से बड़ा होता है. और गरीब, गरीब होता है उसकी जात-पंथ और भाषा नहीं होती. विकास की राजनीति होनी चाहिए ये मेरा मानना है.

 

दिबांग- आप देख लीजिए जो आप के सहयोगी हैं, चाहे वो पासवान हों, चाहे वो मांझी हों, एक कुशवाहा हैं और आप कह रहे हैं कि जाति की राजनीति में विश्वास नहीं करते हैं आप. ये प्रचारित किया जा रहा है कि ये प्रधानमंत्री तेली हैं, ये बीजेपी ने खुद कहा है.

 

नितिन गडकरी- मैं आप की एक बात से सहमत हूं कि कितना भी जातिवाद रहित राजनीति चाहते हों, हम जातिवाद का कितना भी विरोध करते हों तो भी जातिवाद आस्तित्व में है ये बात सही है. और चुनाव जीतने के लिए लड़ा जाता है. ये स्टेटजी होती है. कन्विक्शन और स्टेटजी में फर्क होता है.  स्टेटजी में जब सभी पार्टियां अपने उम्मीदवार खड़े करती है तो सभी बातों पर विचार कर के खड़ी करती है.  और ये कोई माने या ना माने लेकिन ये ग्राउंड रियलटी है और मैं इस बात को स्वीकार करता हूं.

 

दिबांग- हमारे जो ये प्रेसकॉन्फ्रेंस है, इसी में नीतीश कुमार ने कहा कि ये जो बीजेपी वाले हल्ला कर रहे हैं कि हमारे आगे से थाली छीन ली. दरअसल में बीजेपी ने स्वयं कहा कि भोज कैंसिल कर दीजिए, आप उस समय पार्टी के अध्यक्ष थे, आप को अंदर की बात मालूम है.

 

नितिन गडकरी-  वो दिन मेरे जीवन का बड़ा दुख और दर्द भरा दिन था. जिस दिन बिहार के मौर्य होटल में हम लोग थे और हमको भोजन के लिए जाना था और ये कहा गया कि अगर नरेद्र मोदी आप के साथ भोजन के लिए आएंगे तो ये भोजन का कार्यक्रम हम कैंसिल कर देंगे. एक राज्य के मुख्यमंत्री को जिसने बिहार की मदद के लिए पांच करोड़ रूपए दिए, उसको नकार देना और उस मुख्यमंत्री को अपने घर भोजन के लिए नहीं बुलाना ये कौन सा सेकुलरवाद है. ये नीतीश कुमार किसकी वकालत कर रहे हैं.

मैं उनको मानता हूं, ठीक है वो विरोधी हैं, कद्दावर नेता हैं, डॉ. राममनोहर लोहिया जी के विचारों के समर्थक हैं. लोहिया जी ने क्या कहा. क्या लोहिया जी ने इस प्रकार की बातें कही कि भोजन पर बुलाए गए मेहमान को कह दे कि वो आए नहीं.

 

दिबांग- उनका कहना है कि बीजेपी के नेताओं ने स्वयं कहा कि ये भोज छोड़ दीजिए. उन्होंने कहा हमारी पूरी तैयारी हो चुकी थी. और उन्होंने कहा कि पार्टी की तरफ से ये भोज था.

 

नितिन गडकरी-  नहीं भोज मुख्यमंत्री के निवास स्थान पर था, उन्होंने हम सब को बुलाया था, मैं पार्टी का अध्यक्ष था. और उस समय पर उन्होंने कहा कि आप सब लोग हमारे यहां भोजन पर आएं, पर मैं नरेंद्र मोदी जी को नहीं आमंत्रित करना चाहता. अब मुझे बताइए कि हमारे पार्टी के सब नेता जाएं और हमारा एक मुख्यमंत्री, हमारा एक सहकारी, हमारे साथ भोजने के लिए ना आए तो उस भोजन में हमारा क्या इंट्रेस्ट रहेगा. मुझे लगता है नीतीश जी कुछ भी कहें, पर नीतीश जी ने अपने जीवन में जो कुछ काम किया था, वो हिंदुस्तान की राजनीति का बहुत ही घिनौना काम था और ये करने से वो छोटे हुए हैं. हिंदुस्तान की राजनीति में उनकी कीमत कम हुई है उन्हें नहीं करना चाहिए था

 

दिबांग- पर वो तो नहीं कह रहे हैं कि उनका डीएनए गलत है.

नितिन गडकरी- मैं डीएनए की बात नहीं कर रहा हूं.

दिबांग- पर क्या डीएनए जैसी बात होनी चाहिए.

नितिन गडकरी-  अब ऐसा है कि आजकल आप लोगों से हमें सीखना चाहिए कि एक तो कम बोलना चाहिए, बात बनने तक मीडिया से नहीं मिलना चाहिए, आप के जैसे होशियार लोगों से बच कर रहना चाहिए और अगर बोलने का मौका आया तो सभंल-सभंल कर बोलना चाहिए. और मेरे जैसे सीधे-साधे लोग हैं जो डायरेक्ट बात करते हैं तो मुझे भी सोचता रहता हूं कि कहीं मेरे किसी बात का गलत मतलब ना निकाल ले. जो बात पीएम जी ने कही थी, उसका उद्देश्य जो व्याख्या की गई वो कभी नहीं था.

 

दिबांग- बिहार में क्या वजह है कि आप ने मुख्यमंत्री नहीं तय किया. क्या ये दिल्ली में जो झटका लगा उसकी वजह से है या बिहार में आप के पास लोग नहीं है.

 

नितिन गडकरी- मैं आप को एक बात बताता हूं. कब मुख्यमंत्री घोषित करना और नहीं करना ये पार्टी का अधिकार है. अपने पत्ते कब और कैसे खोलना है ये पार्टी की अपनी स्टैटजी है. मुझे लगता है कि इस समय बिहार में मुख्यमंत्री बनने लायक कई नेता हैं.

 

दिबांग- सुशील मोदी एक नाम

नितिन गडकरी- वो हमारे नेता हैं ही, हमारे अध्यक्ष भी हैं नंदकिशोर यादव जी सब अच्छे नेता हैं.

सवाल आनंद प्रधान- बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने पिछले दिनों कहा कि इनकम टैक्स को खत्म कर देना चाहिए. और मुझे याद है कि आप भी इस राय के पक्ष में थे, पुणे की जो संस्था है अर्थक्रांति, उसके साथ आप की कई बैठकें हुई जिसमें आप ने भी एक सभा में 2013 में कहा कि इनकम टैक्स, सेल टैक्स और इनडायरेक्ट टैक्स को खत्म कर देना चाहिए तो क्या आपको लगता है कि उस विचार को लागू करने का समय आ चुका है.

 

नितिन गडकरी- एक बात सच है कि जो अर्थक्रांति का विषय है कि हमारा जो 90% और 10% लोगों में बाकी लोग कवर होते हैं . और इसके लिए इतना बड़ा खर्चा करने के बजाए इसके लिए इनकम टैक्स की लीमिट को एकदम बढ़ाना चाहिए और जो 1 लाख लोग हैं अगर उनके ऊपर ज्यादा कॉन्सनट्रेट किया जाएगा तो ज्यादा इनकम टैक्स मिलेगा.

 

दिबांग- इनकम टैक्स की लीमिट बढ़ाने से आप का क्या आशय है?

नितिन गडकरी- इन्डविजुअल जो टैक्स है उसकी मर्यादा बढ़ानी चाहिए.

दिबांग- कितनी आप कहते हैं

नितिन गडकरी- अब तो मैं मंत्री हूं और ये दूसरे डिपार्टमेंट का मामला है, इसलिए ज्यादा टिप्पणी करना मेरे लिए उचित नहीं है.

दिबांग- आप की निजी राय क्या है?

नितिन गडकरी- मैं भारत सरकार का एक जिम्मेदार मंत्री हूं और मेरी भी मर्यादा है. ये वित्त मंत्री का अधिकार है, इसका निर्णय करना पर इतनी बात कहना चाहता हूं कि हमारे वित्त मंत्री जरूर सोचें कि इनकम टैक्स के ऊपर जो बहुत बड़े पैमाने पर संख्या बढ़ी है, उसको कम कर के, उनको राहत कैसे मिले और रेड टैपिज्म से और करपश्न से ये कैसे मुक्त हो जाए इसके लिए जरूर सोचें.

 

सवाल- महाराष्ट्र सरकार ने अभी एक निर्णय लिया था कि सिर्फ मराठी भाषियों को ही ऑटो परमिट दिया जाए. आप को लगता है कि इस तरह के निर्णय से दो राज्यों के बीच में खाई बढ़ती है और खासकर कि जब अभी बिहार चुनाव हो रहे हैं तो आप की पार्टी को इससे खासा नुकसान हो सकता है.

 

नितिन गडकरी- देखिए ये बातें बिल्कुल नहीं होनी चाहिए. गरीब, गरीब होता है. गरीब को मराठी, यूपी, बिहारी नहीं होता है. स्थानिय लोगों के लिए 80% रिजर्वेशन रखा जाए तो बात समझी जा सकती है. लेकिन भाषा के आधार पर ये रखना ये निश्चित रूप से उचित नहीं है.

 

दिबांग- इसके साथ-साथ ये, यह भी दिखाता है कि आप के रिश्ते कैसे हैं शिवसेना से कि इतना महत्वपूर्ण चुनाव है, आप आगे-पीछे कभी भी कर सकते थे. आप चुनाव के ऐन पहले ऐसी घोषणा करते हैं  जिसका जेडीयू के लोग वहां इस्तेमाल कर रहे हैं.

 

नितिन गडकरी- आप मराठी समझते हैं, मराठी में एक कहावत है. ‘तुझे माझा जमें ना, तुझा वासुन करबे ना’  यानी तेरा मेरा जमता भी नहीं और तेरे सिवा चलता भी नहीं.

दिबांग- क्यों मौके-मौके पर लगंड़ी मारते हैं

नितिन गडकरी- ये राजनीति में अलाइंस कभी इच्छा से नहीं होती है. राजनीति में ये दोनों पार्टी की मजबूरी से होती है. और तीसरे को हराने के लिए होती है. जब तक राजनीति है तब तक ये सब चलता ही रहेगा.

दिबांग- क्या उद्धव ठाकरे में वो खुलापन नहीं है. उनका दिल उतना बड़ा नहीं है जितना बालासाहेब ठाकरे का था.

 

नितिन गडकरी- बाला साहब, बाला साहब थे. देखो अमिताभ बच्चन, अमिताभ बच्चन है, आखिर उनकी उम्र भी हो गई तो अमिताभ बच्चन,अमिताभ बच्चन है. उनका बेटा भी अच्छा अभिनय करता है पर अमिताभ, अमिताभ हैं. देखिए इसकी तुलना कभी नहीं हो सकती है. उद्धव जी भी अच्छे हैं, उनमें भी कर्तव्य है, नेतृत्व है, ठीक है बातों में मत भिन्नता हो सकती है. मेरा तो उद्धव और राज दोनों से अच्छे संबंध हैं. चाहे कोई ऑपोजिशन में रहे या कहीं भी रहे, रिलेशन, रिलेशन होती है और उसको रखना चाहिए और मैं रखता हूं.

 

दिबांग- आप रिलेशन कहां रखते हैं, आप राजनीति कहां करते हैं. आप के साथ एक खासियत देखी गई कि आप बार-बार कोर्ट चले जाते हैं. राजनेताओं को हैंडल करने की बात कर रहे हैं फिर आप मानहानि का मुकदमा ठोक देते हैं. चाहे वो मनीष तिवारी हों या दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल हों या दिग्विजय सिंह हों.

 

नितिन गडकरी- किसी के ऊपर जब गलत आरोप होते हैं तो जाएगा ही

दिबांग- पर आप उसको राजनैतिक तरीके से हैंडल नहीं करते हैं आप कोर्ट क्यों चले जाते हैं

नितिन गडकरी- अगर मेरे ऊपर कोई गलत आरोप होता है और मैं चुप बैठता हूं तो आप कहेंगे कि दाल में जरूर कुछ काला है, इसलिए चुप बैठें हैं. आखिर मुझे अपनी रखने का मार्ग क्या है. और वो मीडिमा में भी नहीं छप रहा है और परसेप्शन में गलत बात जा रही है तो मुझे उसके खिलाफ लड़ना चाहिए. मेरा आदर्श में फ्लैट है. मैं आप को पूछता हूं, वो मनीष तिवारी ने कहा कि मेरा आदर्श में फ्लैट है तो मैं आखिर उसका करूं क्या. लेकिन जब मनीष तिवारी ने कहा कि मैंने गलत जानकारी पर ऐसा कहा है तो मैंने कहा छोड़ दो. मैंने उनको मांफ कर दिया.

 

दिबांग- ये बाकी दो को भी आप माफ करने वाले हैं

नितिन गडकरी- बिलकुल. अगर वो भी कहेंगे कि हमने गलत जानकारी से बोला तो मैं छोड़ दूंगा. मेरा कोई इरादा उनको तकलीफ देने का नहीं है.

दिबांग- तो ये आप का संदेश है केजरीवाल और दिग्विजय सिंह को.

नितिन गडकरी- केजरीवाल जी मुझसे मिले, मेरी उनसे बहुत अच्छी बात-चीत हुई है.  मेरा कोई उनके प्रति व्यक्तिगत विरोध नहीं है.

वीडियो

 

दिबांग- ये जो आप मुस्कुरा-मुस्कुरा के धोते हैं, बिलकुल. गडकरी जी क्या ये सही है कि आप ने इतना ज्यादा उपहास बना दिया.

नितिन गडकरी- राहुल गांधी जब ऐसे-ऐसे कर के बाहीं ऊपर कर के खड़ा होता है ना संदद में तो सब कांग्रेस के नेता देखते हैं जैसे कोई मालिक बोलने लगता है ना. जब मैनेजिंग डायरेक्टर बोलता है तो उसके सहयोगी कर्मचारी कैसे खड़े हो जाते हैं. वैसे कांग्रेस पार्टी के सब नेता ऐसे देखते हैं. कांग्रेस पार्टी में एक मालिक और मालकिन है इस तरह की एक स्पीरिट है और बाकी लोग अब बोले…अब बोले… अब ये कह रहे हैं. ये एक प्रकार से उपहास का विषय बना हुआ है. ये बात सच है कि इंदिरा जी देश की बहुत बड़ी नेता थीं, मैं तो चाहता हूं उनको, उनकी एक ताकत थी. पंडित नेहरू जी की बेटी थीं, ये उनकी क्वालिफिकेशन नहीं था. बाद में राजीव गांधी आए तो उन्होंने भी अपने आप को प्रूफ कर के दिखाया, सोनिया जी आईं उन्होंने ने भी कर के दिखाया. राहुल गांधी के बारे में कांग्रेस के ही नेता कहते हैं, कि ये अब कांग्रेस का नेतृत्व नहीं कर सकते हैं और जब तक कांग्रेस का नेतृत्व करते रहेंगे तब तक मोदी जी का और बीजेपी का फायदा होता रहेगा, ये कांग्रेस के लोग कहते हैं. कभी-कभी जब वो बोलते हैं तो कुछ छोटी भी बात कही तो तुरंत उसको एक जैसे छोटा बच्चा घर में बोलता है ना उसका एक कौतुक होता है, इस प्रकार से मैंने ये बात मजाक में कही थी.

 

दिबांग- आप उनको एक सुझाव क्या देना चाहेंगे.

नितिन गडकरी- उन्हें और मेच्योर लीडर बनना चाहिए. उन्हें आइसोलेसन से मुक्ति पानी चाहिए.

 

दिबांग- चाहे सुब्रमण्यम स्वामी हों, यशवंत सिन्हा हों, आडवानी जी हों, जोशी जी हों इन सब को एक तरीके से रिटायर सा क्यों कर रखा है. क्यों नहीं आप इनके अनुभव का इस्तेमान नहीं करते, क्यों इनको कहीं दूर भेज दिया गया  है. 

नितिन गडकरी- हमारी सरकार का नेतृत्व प्रधानमंत्री मोदी जी करते हैं और पार्टी का नेतृत्व अमित शाह जी करते हैं तो पार्टी में किसका सहयोग कैसे लेना है इसका निर्णय अमित शाह करेंगे. सरकार में किसका सहयोग लेना या नहीं लेना है इसका निर्णय मोदी जी करेंगे. मेरा काम इतना है कि मैं उनको सुझाव देने का काम कर सकता हूं

दिबांग- आडवानी जी के बारे में आप की कोई राय है, भविष्य में उनकी कोई भूमिका आप देखते हैं या मार्गदर्शक मंडल में ही रहेंगे वो.

नितिन गडकरी- आडवानी जी देश के एक कद्दावर नेता हैं, बीजेपी के निर्माण में उनका बहुत बड़ा योगदान रहा है और उनका मार्गदर्शन यही हमारी सबसे बड़ी ताकत रही है. हम सब उनका मार्गदर्शन लेते हैं, सिर झुका कर उनका आर्शीवाद लेते हैं.

 

दिबांग- आप लोग आर्शीवाद ही लेंगे या उनके लिए कोई बड़ी भूमिका तय होगी पार्टी में.

नितिन गडकरी- एक बात है टीवी पर जो एंकर होता है वो 70 साल का क्यों नहीं होता है.

दिबांग- टीवी पर भी हो जाते हैं

नितिन गडकरी- नहीं होता है.

दिबांग- बड़े-बड़े जो एंकर थे जैसे टॉम ब्रॉको हैं, पीटर जैनिंग्स हैं ये सब रिटायर हो चुके हैं.

नितिन गडकरी- मैंने तो हिंदुस्तान में नहीं देखा.

दिबांग- हिंदुस्तान में अभी कोई 70 साल का कोई हुआ नहीं है.

नितिन गडकरी- आप बहुत अच्छे एंकर हैं

दिबांग- पर मैं 70 का नहीं हूं गडकरी जी.

 

नितिन गडकरी- मैं आप को पसंद करता हूं. आप को वो जापान की बुलेट ट्रेन का जो कार्यक्रम है, मेरे जीवन का सबसे अच्छा कार्यक्रम देखा है. मैं आप को एप्रीशिएट करता हूं, आप एक अच्छे पत्रकार हैं. लेकिन आप कितने साल तक काम करोगे, और पांच साल- दस साल. तो ये कहीं ना कहीं दुनिया का नियम है. अमिताभ बच्चन बहुत अच्छे हैं, महानायक हैं, बिग बी हैं. पर वो अब हीरो की भूमिका में अब नहीं दिखेंगे. कभी तो हीरो बदलना ही है.

 

दिबांग- संसद से दूर भी तो भूमिकाएं हैं देश में

 

नितिन गडकरी- मार्गदर्शक मंडल की भूमिका में ये सारी भूमिका हैं ही.

 

दिबांग- मार्गदर्शक मंडल के अलावा भी एक बहुत बड़ा मकान है दिल्ली के बीचो-बीच पूरा देश देखता है, राष्ट्रपति वहां पर बैठते हैं. क्या आप नहीं सोचते कि वो उस काबिल हैं और वहां उनको जाना चाहिए.

नितिन गडकरी- मैं तो दिल में हर समय अच्छी बात सोचता हूं.

दिबांग- क्या है आप के दिल की बात

नितिन गडकरी- मेरे दिल की बात है. मोदी जी को कहूंगा, आप को कैसे कहूं

 

दिबांग- अगर आप ये कह रहे हैं कि आप के दिल में आडवानी जी के लिए अच्छी बात है, जो आप मोदी जी को कहेंगे. और मैं सवाल राष्ट्रपति वाला तो हमें मालूम है कि आप के दिल में क्या है.

 

नितिन गडकरी- मेरे दिल में जो कुछ है. यही पार्टी के कार्यकर्ता के रूप में मेरी जिम्मेदारी है. जब मैं अध्यक्ष था तो मैं कहता था कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी में सबके गले में हार डालो और मुंह पर पट्टी चिपका एक-एक. बीजेपी की सबसे बड़ी समस्या यही है कि बहुत ज्यादा बोलते हैं लोग. कांग्रेस में कोई बोलता नहीं है. अच्छा आप को भी बहुत मजा आता है बीजेपी के नेताओं को बोलवाने में. कांग्रेस के नेता आप को एक्ससेबल ही नहीं है. तो आप हमारी धुलाई करते रहते हैं.

 

दिबांग- इसमें आप सुब्रमण्यम स्वामी जी को कहां देखते हैं, उन्होंने कहा कि अभी जो वर्तमान अध्यक्ष हैं वो मेरे पत्रों का जवाब नहीं देते हैं, फोन का जवाब नहीं देते हैं, गडकरी को पत्र लिखो वह तुरंत जवाब देते थे.

नितिन गडकरी- मैंने देखा वो कार्यक्रम. एक सच्चाई है कि जब हम विपक्ष में काम कर रहे थे तो शुरू में स्वामी ने वन मैन आर्मी के रूप में उस समय की सरकार के खिलाफ, भ्रष्टाचार के खिलाफ एक संघर्ष किया. वो कोर्ट में लड़े हैं, बाहर लड़े हैं. पार्टी उनका सहयोग लेना चाहती है और उनको कुछ चीजें ऑफर भी हुई है. आगे भी स्वामी हमारे सहयोग के लिए कहीं ना कहीं साथी बनेंगे, ऐसा मेरा विश्वास है.

 

सवाल- आप कह रहे थे कि गठबंधन एक मजबूरी हो गई है राजनीतिक पार्टियों के लिए. लेकिन अभी लगता है कि बीजेपी गठबंधन में दूसरी पार्टियों को तवज्जो नहीं देती है, जब से लोकसभा चुनाव में भारी जीत हुई है. मैं आपकी राय जानना चाहती हूं.

नितिन गडकरी- देखिए एक बात कि आप हिंदुस्तान ही नहीं, विश्व की राजनीति में देखिए. जो पार्टी अपनी ताकत पर बहुमत पा सकती है वो कभी गठबंधंन नहीं बनाती है. और जब ताकत कम होती है तो गठबंधंन वाले को साथ में लेकर चलती है.

 

सवाल- आप को लगता है कि एनडीए खत्म हो जाएगा.

नितिन गडकरी- एनडीए खत्म नहीं होगा. एनडीए में जो भी लोग जुड़े रहे हमारे साथ चाहे अकली दल हो, शिवसेना के साथ हमारे पुराने रिश्ते हैं. हम एनडीए को वैसे ही रखना चाहते हैं और लोगों को जोड़ना चाहते हैं.

 

दिबांग- महाराष्ट्र की राजनीति में आप की बड़ी रूचि है, वहां देवेंद्र फडनवीज की सरकार है.  गुड गवर्नेंस की बात होती है तो लगता है, उन्होंने फूड गवर्नेंस शुरू कर दिया है. कैसे देखते हैं आप इसको कि सरकार ये तय करे कि आप कितने दिन खाएंगे और क्या खाएंगे.

 

नितिन गडकरी- इसके पीछे देवेंद्र फडनवीस की सरकार या बीजेपी हाथ नहीं है. जो सर्कुलर है, ये उस समय आया था जब कांग्रेस और एनसीपी की सरकार थी.

 

दिबांग- दिन बढ़ाने की क्या जरूरत थी. उसको भुनाने की क्या जरूरत थी.

 

नितिन गडकरी- ये मीरा भयंदर की मेयर का निर्णय था. पर इसका मतलब कि ये महाराष्ट्र सरकार का निर्णय था तो ये कहना गलत होगा. मैं व्यक्तिगत इस बात का समर्थक हूं कि किसे क्या खाना चाहिए इसमें सरकार को नहीं पड़ना चाहिए.

 

सवाल- देवेंद्र फडनवीस को मुख्यमंत्री बनाने में आप का बहुत बड़ा योगदान था. आप के समर्थक बार-बार आप को आगे कर रहे थे. आप ने उनको चुप कराया, आप उनकी  सरकार के कामकाज से खुश हैं.

 

नितिन गडकरी- देवेंद्र जी युवा हैं, कुशल हैं और निश्चित रूप से महाराष्ट्र को एक यशश्वी नेतृत्व देने की उनकी एक क्षमता है. मैंने उनको राजनीति में लाया, पहले कारपोरेटर बने, नागपुर के मेयर तीन बार बने. एक ईमानदार और कार्य करने वाला उनका व्यक्तित्व है. और कठिनाई के बावजूद वो महाराष्ट्र को आगे ले जाने में सफल होंगे ये मेरा विश्वास है.

 

दिबांग- जब आप लोकसभा चुनाव के बाद नागपुर गए तो बहुत लोग आप से मिलने आए. एक हल्ला मीडिया में चला, लोगों ने कहा कि स्टोरी प्लांट करवा रहे हैं, ये तरीका नहीं है अगर सीएम बनना भी चाह रहे हैं तो. ये क्या कर रहे हैं नीतिन गडकरी.

 

नितिन गडकरी- पहली बात तो ये कि मैं नागपुर में विधानसभा के चुनाव के बाद गया, जो सच्चाई आप को बता रहा हूं, मैं आप के जैसा दबंग हूं. मैं झूठ नहीं बोलता और डरता नहीं किसी से. जब विधानसभा का चुनाव हुआ और सभी विधायक हमारे जीत गए, विदर्भ में जीत गए, तब मैं दिल्ली में था. मैं पहली बार नागपुर गया तो 15-20 हजार कार्यकर्ता एयरपोर्ट पर आए और मेरा स्वागत किया. उसी दिन मुंबई में जो विधायक मीटिंग के लिए गए थे, वो भी स्पेशल फ्लाइट से आए. तो उनको मिठाई दी और उनका स्वागत हुआ. उसमें मीडिया के लोग बड़े होशियार हैं वो मेरे घर के निचे खड़े थे और उनको पता चला. मीडिया वालों ने विधायकों से पूछा कि आप नहीं चाहते कि गडकरी जी मुख्यमंत्री बनें, तो सब ने कहा हम बिलकुल वही चाहते हैं. बस बातों को चला दिया.

 

अगर मुझे मुख्यमंत्री बनना होता तो मुझे पहले ही प्रधानमंत्री जी ने पूछा था, तब मैंने नम्रतापूर्वक कहा था कि अब मैं दिल्ली में खुश हूं. इस लिए ना मैं कोई कोशिश करता हूं, ना मैं पत्रकारों को कोई फीडबैक देता हूं, ना मैं ऑफ द रिकॉर्ड बात करता हूं.

 

सवाल निशीत जोशी- आप की पहचान घोषणा मंत्री के तौर पर होती जा रही है. आप ने अप्रैल में कहा था कि एनएच 24 सोलह का लेन का हो जाएगा.  आप लोग घोषणा कर देते हैं, धरातल पर कुछ नजर नहीं आता है.

 

नितिन गडकरी- जोशी जी आप क्या दुनिया का कोई भी पत्रकार मुझसे उल्टा सवाल नहीं पूछ सकता है. मैं बहुत पक्का हूं और जो कहता हूं वो डंके की चोट पर करता हूं. ये जो रोड है दिल्ली-मेरठ की जिसके लिए आप बात कर रहे हैं मैंने कभी नहीं कहा था कि ये पूरा होगा. आप रिकॉर्ड निकाल कर देख लीजिए.

निशीत जोशी- आप ने एक कार्यक्रम में कहा था और वो खबर भी प्रकाशित है अमर उजाला में.

नितिन गडकरी- आप उसको लाइए. मैंने ये कहा था कि ये रोड हम 14 लेन की बनाने वाले हैं और तब मैंने 16 लेन कहा था बाद में प्राब्लम आया तो बाद में 14 लेन बना रहे हैं और इसका काम जल्द ही शुरू करने वाले हैं.

 

सवाल कंचन गुप्ता- जितने भी मंत्रालय हैं उसमें शायद सबसे ज्यादा काम आप के मंत्रालय में हुआ है. लेकिन लोगों का कहना है कि देखने को कुछ नहीं मिलता है. मंत्री जी कहते हैं कि रास्ते बन रहे हैं, टेंडर निकल चुका है, फाइनेंस हो गया है. ये रियलटी और परसेप्शन का फासला है उसको कम क्यों नहीं किया जाता है.

नितिन गडकरी- कंचन जी आप पूछ रहे हैं तो इसमें निश्चित तथ्य है. मैं आप को उदाहरण के लिए बताऊं, दिल्ली-जयपुर हमारा जब शासन आया तो ये रास्ता बंद पड़ा था. अब इस रास्ते पर हमने करीब 55 पुलिया बनाई है. कल ही मैंने इसका रिव्यू लिया है करीब 75 परसेंट काम पूरा हुआ है. जब मैंने मंत्रीपद संभाला था तब 280 प्रोजेक्ट पूरी तरह से रूके हुए थे. 41 प्रोजेक्ट को हमने खत्म कर दिया, 80 प्रोजेक्ट की प्राब्लम साल्व कर के उसका काम शुरू हुआ, और आज भी 18 से 20 प्रोजेक्ट ऐसे हैं, जिसपर हम आज भी समाधान नहीं ढूंढ सके हैं.

 

दिबांग- ये दिल्ली जयपुर वाली बात पर रहें तो इस पर कोई तारीख तय कर देंगे.

 

नितिन गडकरी- देखिए इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए पूरे 600 करोड़ रूपए लगेंगे. बैंक ने केवल 24 करोड़ रूपए उनको दिए हैं. इसमें आईडीबीआई बैंक मुख्य है और 13 बैंक साथ में हैं. मैं आप को विश्वास दिलाना चाहता हूं और आप मेरी बात को रिकॉर्ड कर के रखिए कि दिसंबर से पहले दिल्ली-जयपुर रोड पूरा होगा और 100% पूरा होगा.

 

वीडियो

दिबांग- भूमि अधिग्रहण की बात आप ने की, आप ने कहा कि ये किसान हित में है, देश हित में है और फिर एक तरीके से सरकार ने घुटने टेके उसमे. आप एक तरीके बिल का चेहरा थे.

नितिन गडकरी- देखिए पहली बात तो ये कि जो वस्तुस्थिति नहीं थी वो बातें बताई गई. हम अंबानी और अडानी को जमीन देने वाले हैं, उद्योगपति को जमीन देने वाले हैं, हम किसानों की जमीन छीनने वाले हैं और इन बातों का प्रचार काफी लोगों ने किया और जब ये प्रचार हुआ तो हमने इसका जवाब देने की पूरी कोशिश भी की. सबसे पहली बात मैं आप को बता देना चाहता हूं कि हमने घुटने नहीं टेके. भूमि अधिग्रहण जो है, हमारे देश में तीन सुचियां हैं, केंद्र सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची है. इसमें रूल बनाने का आधिकार राज्य सरकार का होता है, और जब नीति आयोग में मुख्यमंत्रियों की मीटिंग बुलाई थी तो  देवेंद्र फडनवीस, प्रकाश सिंह बादल, शिवराज सिंह चौहान, चंद्रबाबू नायडू, प्रकाश सिंह बादल जी इन सब ने कहा कि आप क्यों विवाद में पड़ रहे हो. राज्यसभा में इनको बहुमत है और ये बार-बार आप को तकलीफ दे रहे हैं. हम अपनी तरफ से नियम बना सकते हैं. तो इसका मतलब कि हम किसी के सामने झुके हैं तो ऐसी कोई बात नहीं है.

 

सवाल- क्या बेहतर नहीं रहता कि बिल को संसद में लाने से पहले यदि आप नेताओं से बातचीत कर लेते और फिर लाते क्योंकि कि ये सच है कि आप के पास बहुमत है और जो आप का एजेंडा है आप उसको बढ़ाएंगे. मगर ये लोकतंत्र है और आप को विपक्ष के साथ बात करनी चाहिए.

 

नितिन गडकरी- आप की बात बिलकुल सही है. इस बिल पर बार-बार बातचीत हुई. चर्चा हुई, सुझाव मांगे गए, इतना ही नहीं प्रधानमंत्री ने नीति आयोग मीटिंग इसी लिए बुलाई और सभी राज्यों के मुख्यमंत्री को बुलाया और कांग्रेस पार्टी के मुख्यमंत्रियों ने बहिष्कार किया. हम चर्चा भी नहीं करेंगे, हम सुझाव भी नहीं देंगे, हम बहिष्कार करेंगे और आप के बिल का विरोध करेंगे. ऐसी भूमिका कांग्रेस पार्टी की थी.

 

सवाल- बीजेपी छोटे राज्यों की पक्षधर है और बीजेपी ने अलग विदर्भ राज्य का वादा भी किया था. आज जब केंद्र में आप की सरकार है तो क्या उस वादे को पूरा करेंगे.

 

नितिन गडकरी- जब मुरली मनोहर जोशी जी हमारे अध्यक्ष थे तो राष्ट्रीयकार्यकारिणी में विदर्भ के अलग राज्य का प्रस्ताव पास हुआ है. इसलिए हमारी पार्टी की कटिबद्धता विदर्भ राज्य के लिए है. लेकिन जब संसद में ये बिल पास कराना होगा तो दो तिहायी बहुत से पास कराना होगा क्योंकि संविधान संसोधन का मामला है, तब कांग्रेस पार्टी के सहयोग के बिना हम नहीं कर पाएंगे. इसलिए जब भी अनुकूल परिस्थिति होगी तो हमारी पार्टी आगे आएगी और विदर्भ के अलग राज्य पर निर्णय करेगी.

 

सवाल नं.1- आपकी नजर में अच्छे प्रधानमंत्री कौन रहे. अटल बिहारी वाजपेयी या नरेंद्र मोदी.

नितिन गडकरी- दोनो ही मुझे अच्छे प्रधानमंत्री लगते हैं, अटल जी से प्रेरणा लेकर नरेंद्र मोदी आज काम कर रहे हैं. और विश्व में उन्होंने भारत की प्रतिष्ठा को बढ़ाया है.

 

सवाल नं 2- आप ज्यादा सही किसको मानते हैं, एक शादी हुई  जिसमें 43 चार्टेड प्लेन थे, 1400 पुलिस वाले थे. आप की बेटी की और दूसरी शादी हुई बहुत सादगी से, दोनों में से आप ज्यादा सही किसको मानते हैं.

 

नितिन गडकरी- देखिए चार्टेड प्लेन के पैसे कोई मैंने दिए नहीं थे, ना किसी को मैंने बुलाया था. मैंने पत्रिका दी थी और हमारे यहां तो है कि पत्रिका दी तो पूरा गांव खाने के लिए इक्कठा होकर आता है. तो गांव में मैदान में सब खाने के लिए आए थे. ना मंडप था, ना पंडाल था तो मैंने कोई गलत नहीं किया शादी हुई सब लोग खाना खाने के लिए आए थे, बड़े-बड़े लोग आए इसके लिए न्यूज बनी.

 

दिबांग- आप आरएसएस से जुड़े हुए हैं और वहां सादगी की बात बहुत आती है. इसमें वो गडकरी नहीं थे जो स्कूटर चलाते हुए चले जाते हैं. इसमें वो गडकरी थे जिसमें विजय माल्या थे, हिंदुजा थे, इतने बड़े-बड़े लोग थे.

 

नितिन गडकरी- लालू प्रसाद यादव भी थे, वहां चौटाला भी थे. देखिए एक बात समझिए राजनीति को परिवार से नहीं जोड़ना चाहिए और परिवार को राजनीति से नहीं जोड़ना चाहिए. शादी मेरे घर का कार्यक्रम था. मेरे घर में 24 लोगों का डाइनिंग टेबल है. सुबह नाश्ता करते समय 50 लोग नाश्ता करते हैं और खाना खाते समय 40 लोग खाते हैं. घर में सब आते हैं, खाते-पीते हैं. हमारा स्वभाव ऐसे ही रहेगा, हम ऐसे ही चलेंगे. शादी में सादा खाना था. मुझे लगता है ये मेरे परिवार का निजी मामला है.

 

दिबांग- जी इस सवाल को छोड़ देता हूं.

 

सवाल नं3- आप के दिल के करीब कौन है. उद्धव ठाकरे या राज ठाकरे.

नितिन गडकरी- राज ठाकरे.

दिबांग- सीधा जवाब देते हैं आप

नितिन गडकरी- जो सच है वो सच है, पर उद्धव ठाकरे को भी मैं चाहता हूं लेकिन राज से मेरा ज्यादा दोस्ताना है.

 

सवाल नं 4-  दो पार्टी अध्यक्ष आप के अगल-बगल रहे. राजनाथ सिंह और अमित शाह. आप ज्यादा प्रभावशाली किसको मानते हैं.

नितिन गडकरी- दोनों ही अच्छे अध्यक्ष रहे. दोनों की अपनी विशेषता रही है. दोनों ने अपने हिसाब से पार्टी के लिए अच्छा कार्य किया.

 

सवाल नं 5- आप के राजनीतिक जीवन में आप को ज्यादा अफसोस किस बात का है. आप दोबारा पार्टी के अध्यक्ष नहीं बन पाए या आप हाल में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री नहीं बन पाए.

 

नितिन गडकरी- मुझे दोनों बातों का कोई दुख और दर्द नहीं है. महाराष्ट्र का सीएम तो मैं कभी बनना ही नहीं चाहता था. मुझे पार्टी का अध्यक्ष बनने या ना बनने का कोई दुख नहीं है. लेकिन मेरे ऊपर झूठे आरोप लगे हैं, एक दिन पहले मेरे खिलाफ षणयंत्र किया गया. उसका दुख और दर्द मेरे मन पर क्योंकि जब ईमानदारी पर आंच आती है, उसका दुख और दर्द मुझे रहा. बाकी दोनों बातों के बारे में तो साफ है. सीएम तो मैं बनना ही नहीं चाहता था और जहां तक अध्यक्ष की बात है तो एक बार अध्यक्ष बना. एक बात मैं आप को दिल से बता देना चाहता हूं कि जो कुछ मिला वो मेरी हैसियत और औकात से बहुत ज्यादा मिला. मैं पूरी तरह से संतुष्ट हूं और मेरी किसी के प्रति कोई तकरार नहीं है.

दिबांग- अफसोस आप को इस बात का है कि आप पार्टी के दोबारा अध्यक्ष नहीं बन पाए.

 

नितिन गडकरी- बिल्कुल नहीं. मुझे इस बात का कोई अफसोस नहीं है. झूठे आरोप लगे इस बात का दुख जरूर है.

 

दिबांग-  आप को कभी दोबारा मौका मिला तो क्या आप पार्टी के अध्यक्ष बनना चाहेंगे.

 

नितिन गडकरी- बिलकुल नहीं बनना चाहूंगा. एकबात दिल से उतर गई. अब मैं फिर से अध्यक्ष कभी नहीं बनना चाहता.

दिबांग- लोग जवाब देते हैं कि पार्टी मुझे जिम्मेदारी देगी तो करूंगा आप बिलकुल नहीं क्यों बोल रहे हैं.

नितिन गडकरी- आप ने मुझ से कहा जो बात मन में हो वो कहना चाहिए, जो सही है वो मैंने कह दिया. 

 

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