... जब नीतीश कुमार ने संसद में मुस्लिमों के लिए मांगा था आरक्षण !

By: | Last Updated: Friday, 30 October 2015 2:56 PM

नई दिल्ली: संसद का दस्तावेज दिखाकर प्रधानमंत्री मोदी ने आज फिर लालू-नीतीश पर दलित-पिछड़ों का आरक्षण छीनकर मुस्लिमों को देने का आरोप लगाया. कल ही बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह कह चुके हैं कि बिहार में बीजेपी हारी तो पाकिस्तान में पटाखे फूटेंगे.

 

कल ही बीजेपी ने विज्ञापन के जरिये भी नीतीश को आतंक को पनाह देने का आरोप लगाया था. गोपालगंज की सभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाथ में जिस भाषण की कॉपी को लेकर नीतीश कुमार को चुनौती दे रहे हैं वो भाषण नीतीश ने सांसद रहते हुए लोकसभा में  24 अगस्त 2005 को दिया था .

 

पढ़ें 2005 में लोकसभा में नीतीश कुमार का लोकसभा में भाषण जिसमें उन्होंने मुस्लिमों को आरक्षण देने की बात

 

श्री नीतीश कुमार (नालन्दा) : अध्यक्ष महोदय,  एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्रश्न पर आपने सभी पक्ष के माननीय सदस्यों को अपनी राय प्रकट करने का अवसर दिया, इसके लिए आप बधाई के पात्र हैं. यह एक संवेदनशील मसला है और हम लोगों के लिए सौभाग्य की बात है कि आप सांसद हैं इसलिए स्पीकर हैं और साथ-साथ पेशे से वकील भी हैं.…(व्यवधान)  इसलिए आप दोनों क्षेत्र को ठीक ढंग से समझ सकते हैं.…

 

अध्यक्ष महोदय  : अभी तो सब चला गया.

 

श्री नीतीश कुमार  : इसलिए आपने इस विषय पर सबको अपनी राय रखने का अवसर दिया.  राम गोपाल जी ने ठीक कहा और मैं उनसे सहमत हूं कि यह प्रश्न किसी भी प्रकार से न्यायपालिका या संसद के बीच टकराव का नहीं है और कोई ऐसा प्रश्न भी पैदा नहीं हुआ, ऐसी परिस्थिति भी पैदा नहीं हुई.

 

जो कुछ भी समाचार पत्रों में आज पढ़ने को मिला, उसके हिसाब से सुप्रीम कोर्ट ने  सरकार को कोई बात कही है. सरकार के पास उनके लॉ ऑफिसर्स होते हैं, सबसे बड़े लॉ ऑफिसर मौजूद रहते हैं, वे किस प्रकार अपनी बात रख रहे हैं, यह देखना उनका काम है. संयोग से कानून मंत्री जी यहां बैठे हुए हैं. यह भी विलक्षण प्रतिभा के धनी कानून दा हैं.

 

इनको भी देखना चाहिए कि आखिर कौन से निर्णय हैं जिन्हें आप महीनों लंबित रखते हैं. उसके चलते भी कभी-कभी विवादास्पद स्थिति पैदा होती है. यह अलग बात है. इसलिए सरकार को अपना पक्ष ठीक ढंग से रखना चाहिए और न्यायपालिका को अपना काम करने में सरकार को ठीक ढंग से सहयोग भी प्रदान करना चाहिए. यह देखना सरकार का काम है. मेरी समझ से संसद से किसी भी प्रकार के टकराव की बात उभरकर सामने नहीं आई.

 

 इस विषय पर दो बातें हैं. संसद के अपने अधिकार हैं, संविधान सर्वोच्च है. न्यायपालिका को संविधान ने अधिकार दिया है और संसद के भी कुछ दायित्व  और अधिकार हैं. कानून बनाना संसद का काम है. हमने उस दिन अपनी राय रखी थी. कल भी एक सर्वदलीय बैठक हुई थी, एक प्रश्न उभरकर सामने आया था, जिसमें सामाजिक न्याय के सिद्धान्त को अमली जामा पहनाने की बात थी.

 

सभी पक्ष के लोगों ने इस पर सहमति प्रकट की है और उसके लिए सरकार को आगे बढ़कर कानून लाना चाहिए. सरकार तो पहले हाथ खड़ा कर देती है. उसके बाद सभी दल के लोग उनको सलाह देते हैं तब उसके आधार पर सरकार आगे काम करती है, यह ठीक है. उस दिन हमने भी राय दी थी कि एक सर्वदलीय बैठक हो.  वह बैठक हो गयी है और उसमें एक राय उभरकर आयी है कि उस पर कार्रवाई होनी चाहिए. लेकिन किसी भी प्रकार से संसद और उच्चतम न्यायालय या न्यायपालिका के बीच टकराव की बात नहीं होनी चाहिए.

 

अध्यक्ष महोदय, मैं एक प्रश्न का उल्लेख यहां जरूर करना चाहूंगा. कल दलित क्रिश्चियन के मामले में वहां चर्चा हो रही थी. अध्यक्ष महोदय, हम कब तक निर्णय को टालते रहेंगे. इस देश में धर्म बदल लेने से व्यक्ति की जात नहीं बदलती. यह बापू जी ने भी कहा है. …(व्यवधान)

 

MR. SPEAKER: We are not going into the merits of the matter.

 

श्री नीतीश कुमार :  मैं तीन वाक्य में अपनी बात पूरी कर दूंगा, नहीं तो  इसके लिए मुझे अलग से आपसे मिलकर समय मांगना पड़ेगा. 

 

अध्यक्ष महोदय  :   आप समय मांगिये.

           

श्री नीतीश कुमार  : आपका ही समय बच गया. आज इस अवसर पर चर्चा चल रही है इसलिए मैं इस बात का उल्लेख करना चाहता हूं. यह प्रश्न ईसाइयों में भी है और मुसलमानों में भी है. हिन्दु धर्म में जो जातियां हैं, जो आज अनुसूचित जाति मानी जाती है,  उसी प्रकार की जातियां मुस्लिम सप्रदाय में है, उनको अनुसूचित जाति की सुविधा नहीं मिलती, यह अन्यायपूर्ण है.  वह हर प्रकार से शिकार होते रहे हैं. उनका पेशा एक है. इसलिए मुस्लिम समाज में इस प्रकार की जातियां हैं, इक्वलेंट जातियां हैं, …

 

अध्यक्ष महोदय  :   क्या बात कर रहे हैं ?   आप में थोड़ी सहनशक्ति होनी चाहिए..

 

श्री नीतीश कुमार  :  यह एक ऐसा प्रश्न है अध्यक्ष महोदय, हमारे कुछ मित्रों को एतराज हो रहा है. यह एक ऐसा प्रश्न है जिसका सीधा संबंध सिद्धांत से है, विचारधारा से है और मैं उस विचारधारा में विश्वास करता हूं जिसमें इनका विश्वास नहीं है. इसलिए हम खुले तौर पर कहना चाहते हैं कि मुसलमान में जो दलित जातियां हैं, उनको भी अनुसूचित जाति में शामिल करना चाहिए. यह एक प्रश्न है जिसका समाधान होना चाहिए. गांधी जी ने भी कहा है, मैं उसका उल्लेख करना चाहता हूं. …

 

MR. SPEAKER: Nitish ji, please cooperate.

 

श्री नीतीश कुमार :   अध्यक्ष महोदय, कालीन के नीचे किसी चीज को डालने से काम नहीं चलेगा. मैं पुनः दोहराना चाहता हूं कि धर्म बदलने से आदमी की जात नहीं बदलती है. यह सबको मालूम है कि यहां पर किस प्रकार से मुसलमानों की ज्यादा संख्या हुई या ईसाइयों की ज्यादा हुई,  यह सब धर्म परिवर्तन से हुआ.  ऐसी स्थिति में उनकी बुनियादी जात बदलती नहीं है. जिस प्रकार से भी उनको झेलना पड़ता है, उसी प्रकार की उपेक्षा का शिकार वह भी होता है चाहे वह ईसाई हो या मुसलमान हो, हर जगह होता है. … यह जो सिद्धांत है. …

 

अध्यक्ष महोदय  :  आप बैठिये.

 

श्री नीतीश कुमार  :  अध्यक्ष महोदय, किसी धर्म निरपेक्ष का कनफाइन नहीं होना चाहिए.  … यह आस्था का प्रश्न है.  उसमें भी सरकार को आगे बढ़कर जो अनुसूचित जाति में आने लायक मुस्लिम जमात की जातियां है, उनको भी अनुसूचित जाति का दर्जा दिलाये जाने के लिए  आपको आवश्यक विधेयक लाना चाहिए और उस पर                                        

 

MR. SPEAKER: Mr. Swain, why are you standing? Are you the Speaker? Merely by speaking you do not become the Speaker. I have started with your party leader although he has not given any notice. Therefore, I am trying to regulate it and last time we had a very dignified response to certain matters.  Mr. Nitish Kumar, please conclude.  आप बैठ जाइये.

 

श्री नीतीश कुमार  :  अध्यक्ष महोदय, आप जब खड़े होकर कुछ निर्देश दे रहे थे, तो उस बीच में उधर से कुछ आवाज आई कि वोट के लिए यह ऐसा कर रहे हैं. माफ करियेगा, वोट के लिए आप करते होंगे. …

 

MR. SPEAKER: Don’t take note of it? That is not being recorded.

 

श्री नीतीश कुमार  :  यह सिद्धांत का प्रश्न है. आप लोगों को हम लोगों की पृष्ठभूमि के बारे में मालूम नहीं है. …

 

MR. SPEAKER: Mr. Goel, you will be in trouble one day very soon.

 

MR. SPEAKER: I am very sorry. I am hurt today. I made an appeal to everybody in pursuance of your request. I thought it was an important request and I allowed it so that a reference could be made.

 

अध्यक्ष महोदय  :   मिस्टर मानवेन्द्र सिंह,  आपके साथ भी एक दिन ऐसा ही होगा.

 

श्री नीतीश कुमार  :  आप पावर में हैं तो क्यों नहीं कर लेते. …

 

अध्यक्ष महोदय  :  आप छोड़िये. वह बात रिकार्ड में नहीं आया.…

 

MR. SPEAKER: That is not recorded.

 

श्री नीतीश कुमार :  अब मैं कंक्लूड कर रहा हूं. यहां से कोई टकराव का संदेश नहीं जाना चाहिए …

 

MR. SPEAKER: I agree with it.

 

श्री नीतीश कुमार : वर्ना ऐसा एहसास होता है कि इस देश ने कई बार टकराव देखे हैं, इस देश में एमर्जेंसी लागू हुई है और इस देश में कमिटेड ज्यूडिशियरी की भी बात हुई है और आज वे लोग फिर से सत्ता में हैं. कहीं फिर से इस संसद का इस्तेमाल करके,…

 

MR. SPEAKER: Nitish Ji, you are an articulate Member.

 

श्री नीतीश कुमार : इसलिए निष्पक्ष ज्यूडिशियरी होनी चाहिए और सर्वोच्च न्यायालय या न्यायपालिका को जो अधिकार संविधान ने दिया है, हम उसमें किसी प्रकार से हस्तक्षेप नहीं कर सकते हैं.

 

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Web Title: nitisg kumar statement on muslim reservation in 2005
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