बिहार में नशे का राजनीतिक कनेक्शन

By: | Last Updated: Friday, 17 July 2015 3:32 PM
nitish kumar

बिहार सरकार को इस साल शराब से करीब 4 हजार करोड़ रुपये की कमाई होगी. लेकिन सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एलान किया है कि अगर फिर से उनकी सरकार बनी तो राज्य में शराब बेचने पर प्रतिबंध लगा देंगे. नीतीश कुमार अक्सर अपने भाषण में बिहार को एक पिछड़ा राज्य बता कर मदद की अपील करते हैं. आखिर सीएम मुख्यमंत्री शराब पर प्रतिबंध लगा कर नशे से होने वाली 4 हजार करोड़ रुपये की कमाई को गंवाने के लिए क्यों तैयार हैं?

 

शराब की वजह से बिहार में पिछले एक दशक के दौरान हजारों परिवार तबाह हो गए. शराब की वजह से सबसे ज्यादा महिलाएं प्रभावित हुईं. महिलाएं जिनके पति नशे के शिकार बन गए. बिहार में महिलाओं के एक बड़े तबके को लगता है कि उनकी बर्बादी की बड़ी वजह है नीतीश सरकार की नई आबकारी नीति. शराब से राजस्व की उगाही की वो नीति जिसके चलते बिहार के कोने-कोने में शराब की दुकानें न सिर्फ खुल गईं बल्कि खूब फल-फूल रही हैं.

 

आखिर नीतीश कुमार को क्यों कहना पड़ा कि जब अगली बार उनकी सरकार बनेगी तो बिहार में शराब बेचने पर रोक लगा देंगे? इस सवाल का जवाब छिपा है उन महिलाओं के वोट में जिसने 2010 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार को भारी जीत दिलाई थी.

 

2010 विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार की अगुवाई वाले एनडीए को 243 में से 206 सीटें मिली थीं. इस जीत में महिलाओं की भागीदारी को अहम माना गया था. 2005 में 45 फीसदी महिलाओं ने नीतीश के उस समय के गठबंधन को समर्थन दिया था जबकि 2010 के विधानसभा चुनाव में नीतीश को 55 फीसदी महिलाओं ने वोट दिया था. नीतीश को महिलाओं से मिलने वाले वोट में 10 फीसदी का इजाफा हुआ. नीतीश को महिलाओं ने जिस तरह से बढ़ चढ़ कर समर्थन दिया उसकी वजह मानी जाती है महिलाओं को मिलने वाली खास सुविधाएं. नीतीश ने हाई स्कूल में जाने वाली लड़कियों को जहां साइकिल दिलाया वहीं कानून व्यवस्था में सुधार लाकर महिलाओं को सुरक्षा का एहसास दिलाया. महिलाओं ने 2010 के विधानसभा चुनाव में तो जम कर समर्थन दिया लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में हाथ खींच लिया. 2014 लोकसभा चुनाव में महिलाओं ने नीतीश को सिर्फ 39 फीसदी वोट दिये जबकि 2010 में ये आंकड़ा 55 फीसदी था. महिलाओं के समर्थन में आई भारी कमी के चलते नीतीश को लोकसभा चुनाव में जबरदस्त नुकसान उठाना पड़ा. लोकसभा चुनाव में जेडीयू को बिहार में सिर्फ दो सीट मिली थी.  

 

नीतीश कुमार समझ चुके हैं कि महिलाओं ने अगर इस बार भी लोकसभा चुनाव की तरह मुंह फेर लिया तो विधानसभा चुनाव में जेडीयू की जीत मुश्किल हो जाएगी. महिलाएं नाराज हैं. महिलाएं इसलिए नाराज हैं क्योंकि नीतीश कुमार की शराब नीति की वजह से सबसे ज्यादा खामियाजा उन्हीं को उठाना पड़ रहा है.

 

बिहार में लालू राबड़ी के राज में यानि 1997-98 में शराब से राज्य सरकार को 231 करोड़ की कमाई होती थी. नीतीश के 10 साल के शासन के बाद आज बिहार में शराब से सरकार को इस साल 4 हजार करोड़ रुपये की कमाई का अनुमान है. कहा जाता है कि पिछ्ले दस वर्षों में नीतीश की शराब नीति ने लोगों को शराबी बना दिया. गरीब मजदूर से लेकर बड़े बड़े घर के लोग खुलकर शराब पीने लगे. दूध की जितनी दुकानें नहीं थी उससे ज्यादा शराब की दूकानें खुल गईं. 

 

बिहार में पटना डेयरी के सुधा ब्रांड के दूध को बेचने के लिए 400 बूथ हैं और छोटे बड़े मिलाकर बिहार में कुल 9000 बूथ ही हैं. जबकि शराब की कुल 5146 दुकानें हैं.

 

कुछ लोगों का मानना है कि पहले बिहार में अवैध शराब की बिक्री और कर की चोरी जमकर होती थी. कुछ खास लोगों और नेताओं के हाथ में शराब का कारोबार था और ऐसे लोगों को शराब माफ़िया बुलाते थे. नीतीश की नयी उत्पाद नीति ने नए कारोबारियों और बेरोज़गार लोगों को इस व्यवसाय से जुड़ने का मौका दिया. शराब माफ़िया के चंगुल से बिहार को मुक्त कराए जाने का नीतीश कुमार ने दावा किया. नीतीश ने ये भी कहा कि उनकी सरकार ने नई शराब नीति लाकर जहरीली शराब से लोगों को छुटकारा दिलाए हैं. पर सरकार इस मोर्चे पर भी फेल हो गई. पिछले तीन साल के दरम्यान जहरीली शराब से करीब 50 लोगों की मौत हो चुकी है. 

 

अब चुनाव जब नजदीक है तो नीतीश कुमार शराब पर रोक लगाने का वादा कर रहे हैं. विपक्षी पार्टी नीतीश के वादे को ढोंग करार दे रही है. बीजेपी नेता सुशील कुमार मोदी ने नीतीश को चुनौती दी है कि अगर रोक लगाना है तो अभी क्यों नहीं?

 

शराब से होने वाले नुकसान को लेकर कोई भी पार्टी और नेता गंभीर नहीं रहे हैं. आपको याद होगा कुछ महीने पहले जब जीतन राम मांझी बिहार के मुख्यमंत्री थे तो शराब को लेकर चुटकी ली थी. मांझी ने कहा था अगर कोई दवा के रूप में दारू ले तो बुराई नहीं है. मांझी का बयान हर किसी को सकते में डाल दिया था. मांझी ने अपने बयान में शराब की दुकानें बंद करने की बात नहीं कही थी.

 

नीतीश करीब 6 साल पहले विकास यात्रा पर निकले थे तभी उन्हें राज्य की जनता ने सावधान कर दिया था. समस्तीपुर में एक युवा ने उनसे साफ कहा था कि शराब से कमाई बंद कीजिए तब नीतीश ने कहा था लोग जितना शराब पियेंगे उतनी सरकार की अमदनी बढेगी. आरजेडी नेता रघुवंश प्रसाद सिंह तो आज भी नीतीश पर गांव गांव शराब की दुकानें खुलवाने पर चोट करते हैं. दिलचस्प है कि लालू जब नीतीश के विरोध में थे तब नीतीश पर शराब नीति को लेकर आरोप लगाए थे ये अलग बात है कि लालू ने अपने समय में ताड़ी को टैक्स फ़्री कर दिया था.

 

चुनाव से पहले नीतीश की शराब बंदी के वादे की बात का किसे फ़ायदा और किसे नुकसान होगा इस सवाल का जवाब तो चुनाव के बाद ही पता चलेगा लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में नीतीश का वादा व्यावहारिक नहीं है. बिहार के बगल के राज़्यों में शराब पर पाबंदी नहीं है ऐसे में शराब पर पाबंदी के बाद राज़्य में तस्करी का एक नया खेल शुरू हो सकता है.

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