नीतीश और लालू दोनों की राहें अलग-अलग!

By: | Last Updated: Tuesday, 2 June 2015 6:44 AM

नई दिल्ली: ये दोस्ती टूट गयी. नीतीश और लालू दोनों की राहें अलग हो गईं हैं. लालू नीतीश को मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में मानने को तैयार नहीं, तो नीतीश विलय के अलावा दूसरे विकल्प गठबंधन के पक्ष में नहीं. कांग्रेस ने नीतीश के नेतृत्व में चुनाव लड़ने की घोषणा के बाद ये तय हो गया कि लालू और नीतीश अब साथ-साथ नहीं रहेंगे.

 

हाजीपुर में लालू और नीतीश जब गले मिल रहे थे तो उस वक्त भी इनका दिल नहीं मिला था. राजनीतिक मजबूरी ने इन दोनों को एक साथ खड़ा कर दिया पर उस वक्त ही ये कयास लगाए जा रहे थे कि ये दोस्ती कब तक? आज दोनों की पार्टीयां एक-दूसरे के खिलाफ आग उगलने लग गईं हैं. आरजेडी नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने नीतीश को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने की बात तो दूर, उनकी वजह से वोट का नुकसान होने की बात कह दी.

 

लालू ने रघुवंश प्रसाद सिंह के बयान का खंडन तो दूर, उन्होंने यहां तक कह दिया कि अगर राजनीतिक सौदा नहीं पटा तो सबकी राहें अलग-अलग होंगी.

 

नीतीश और लालू दोनों एक साथ बैठने को तैयार नहीं हैं. नीतीश विलय से नीचे किसी बात पर मानने को तैयार नहीं और लालू अब विलय के पक्ष में नहीं. पिछले कई दिनों से लालू और उनकी पार्टी के नेता मीडिया के ज़रिये नीतीश सरकार को कठघरे में खड़ा कर रहे थे. लालू पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को अपने साथ लाने की पुरजोर कोशिश कर रहे थे. कुल मिलाकर नीतीश विरोधी नेताओं को साथ लेकर नीतीश पर दबाव बना रहे थे. पर नीतीश ने भी तय कर लिया है कि अब लालू के साथ जाना सम्भव नहीं. इसलिए नपे-तुले और सधे अंदाज़ में जवाब दे रहे हैं.

 

जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव लालू और नीतीश के बीच सहमति बनाने की कोशिश करते रहे पर बात नहीं बनी. आखिर दोनों की दोस्ती टूट ही गई.

 

नीतीश और लालू के शर्त क्या हैं ? 

1. नीतीश की पार्टी चाहती है कि गठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में उन्हें आगे किया जाए. पार्टी को उम्मीद है कि नीतीश की अच्छी छवि का फायदा होगा लेकिन लालू की पार्टी आरजेडी का मानना है कि नीतीश को उनके परम्परागत वोटर यानी यादव वोट का नुकसाब होगा.

2. लालू की पार्टी चाहती है कि लोकसभा चुनाव को आधार बनाकर सीट बंटवारे का फॉर्मूला तय हो लेकिन नीतीश विधान सभा चुनाव के आधार पर सीट-शेयरिंग की बात कर रहे हैं.

3. लालू आरजेडी और जेडीयू के विलय के पक्ष में नहीं हैं, वहीं नीतीश विलय ही चाहते हैं.

 

नीतीश की तीन गलतियां 

1. बीजेपी से अलग होने के बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पहली और सबसे बड़ी भूल थी.

2. जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाना राजनीतिक नासमझी थी.

3. लालू से समर्थन लेना और फिर उपचुनाव लड़ना गले की हड्डी साबित हुआ

 

नीतीश ने अपनी पहली दो गलतियां सुधार ली हैं और माफी भी मांग चुके हैं. अब सवाल ये है कि लालू से दोस्ती तोड़कर क्या नीतीश अब अपनी खोई हुई ज़मीन को वापस पा लेंगे ? 

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