नीतीश ने बिहार की राजनीतिक अनिश्चितता के लिए केन्द्र, बीजेपी पर लगाया आरोप

By: | Last Updated: Monday, 16 February 2015 3:22 AM
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पटना/नई दिल्ली: जेडीयू विधायक दल के नवनिर्वाचित नेता नीतीश कुमार में बिहार में राजनीतिक अनिश्चितता के लिए केंद्र और बीजेपी को जिम्मेवार ठहराते हुए कहा कि इसकी पूरी ‘‘स्क्रिप्ट’’ दिल्ली में लिखी गयी है.

 

नीतीश ने रविवार रात एक टीवी चैनल को दिये साक्षात्कार में कहा कि गत नौ फरवरी को राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी इस बात से सहमत थे कि बिहार विधानसभा के 20 फरवरी से पहले होने वाले बजट सत्र से पहले विश्वासमत हासिल किया जाये. लेकिन मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी के प्रधानमंत्री से मिलकर निकलने के बाद उन्होंने प्रेस वार्ता में जो बातें कहीं थी अब वे ही सारी बातें की जा रही हैं.

 

उन्होंने कहा कि ऐसे में जो कुछ भी हो रहा है वह केंद्र और बीजेपी की ओर से एक सोची समझी रणनीति के तहत हो रहा है. इसका मकसद है जदयू को कमजोर कराना.

 

मांझी को बीजेपी का गुप्त समर्थन प्राप्त होने का दावा करते हुए नीतीश ने आरोप लगाया कि बिहार में जो कुछ भी हो रहा है उसकी पूरी ‘स्क्रिप्ट’ दिल्ली में लिखी गयी है.

 

मांझी के रविवार दिल्ली के लिए रवाना होने के बारे में नीतीश ने कहा कि वे बीजेपी का समर्थन प्राप्त करने के लिए दिल्ली गए हैं गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मांझी के मुलाकात के बारे में नीतीश ने कहा कि उनकी मंशा सत्ता का दुरूपयोग करके बिहार विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी को फंसाने (राजद के पूर्व सांसद राजेश कुमार हत्या मामले में) की है ताकि ताकि वह सदन की कार्यवाही संचालित नहीं कर सकें.

 

उन्होंने कहा कि वह इन सारी परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार हैं और जनता देख रही है कि बहुमत कहां खडा है.

 

नीतीश ने आरोप लगाया कि मांझी को विश्वास मत प्राप्त करने के लिए अधिक समय देकर बीजेपी ने विधायकों की खरीद-फरोख्त का अवसर प्रदान किया है.

 

मांझी सरकार द्वारा किए जा रहे निर्णयों के बारे में पूछे जाने पर नीतीश ने कहा कि लोगों को समझ लेना चाहिए है जो सरकार अल्पमत में है. उसके द्वारा किए गए निर्णयों का कोई कोई मतलब नहीं. गत वर्ष लोकसभा चुनाव में जदयू की करारी हार की नैतिक जिम्मेवारी लेते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने वाले नीतीश ने कहा कि लोकसभा चुनाव के परिणाम से उन्हें लगा कि लोगों का विश्वास कम हुआ है. इसलिए उन्हें पद से अलग होकर लोगों उनके बीच जाना चाहिए और मेहनत करनी चाहिए. पार्टी में सभी लोग इसके खिलाफ थे और उन्होंने उनके फैसले को स्वीकार करने से इंकार कर दिया.

 

बाद में पार्टी नेताओं ने उनकी भावना का सम्मान रखते हुए उसे स्वीकार किया तथा ‘‘हमें ही अधिकृत कर दिया कि हम ही मुख्यमंत्री पद के लिए किसी को मनोनीत कर दें.’’

 

नीतीश ने मांझी के बारे में कहा कि उन्होंने ही मांझी को चुना पर बाद में पार्टी स्तर से लेकर हर तरफ से यह कहा जाने लगा कि बिहार में शासन का क्या हो रहा है. आपने बडी गलती कर दी. लोगों ने आप पर भरोसा किया था और इसे आपको ही ठीक करना चाहिए तथा काम को संभालना चाहिए.

 

नीतीश ने कहा कि पहले तो वह यह कहकर टालते रहे कि वे भ्रमण और प्रशिक्षण के कार्य में लगे हैं और राजकाज से अब उनका सरोकार नहीं. पर पिछले कुछ दिनों में हालात ऐसे बनते चले गए कि उन्हें इसे चुनौती के तौर पर स्वीकार करना पडा.

 

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