नीतीश ने मांझी मंत्रिपरिषद के 34 अनियमित निर्णयों को रद्द करने को सही ठहराया

By: | Last Updated: Thursday, 5 March 2015 1:29 PM

पटना/नई दिल्ली: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जीतनराम मांझी मंत्रिपरिषद के गत 10 से 19 फरवरी तक उनकी मंत्रिपरिषद की तीन बैठकों के दौरान लिए गए 34 निर्णयों को कल रद्द करने के निर्णय को सही ठहराते हुए आज कहा कि अनियमित तौर पर लिये गए निर्णय है.

 

नीतीश आज यहां पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि नियमत: कैबिनेट में संबंधित विभागों द्वारा विधि, वित्त और सामान्य प्रशासनक विभाग से राय लेने के बाद किसी विषय पर संलेख (नोट) पेश किए जाने की परंपरा है और मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग उनकी समीक्षा करने के बाद मुख्यमंत्री का निर्देश प्राप्त कर उसे मंत्रिपरिषद की कार्य सूची में शामिल करता है जिस पर मंत्रिपरिषद विचार करता है.

 

उन्होंने मांझी मंत्रिपरिषद द्वारा लिए गए 34 निर्णयों के बारे में मंत्रिपरिषद ने कल रद्द करते हुए कहा था कि इन सारे निर्णयों के बारे में पूर्व से कोई कैबिनेट नोट ही नहीं है. मंत्रिपरिषद की बैठक के दौरान कोई बात कर ली गयी और उसे मंत्रिपरिषद के फैसले का रूप दे दे दिया गया. न ही संबंध विभाग ने उसके बारे में कोई टिप्पणी की और प्रस्ताव दिया है.

 

नीतीश ने मांझी मंत्रिपरिषद द्वारा लिए गए निर्णयों को विचित्र परिस्थिति पैदा करने वाला बताते हुए कहा कि उनके राजनीतिक जीवन में इस तरह का प्रश्न पहली बार उनके समक्ष आया और उन्होंने इसको लेकर विधिक राय ली जिसके मुताबिक इन मामलों में कैबिनेट में निर्णय लेने के तौर-तरीकों को अपनाया नहीं गया था. ऐसे में मंत्रिपरिषद को उसे बदलने और रद्द करने का पूरा अधिकार है. उन्होंने कहा कि उनके मंत्रिमंडल ने उसी विधिक राय के आधार पर उन निर्णय को रद्द करते हुए संबंधित विभागों को स्वतंत्रता दी गयी कि वह उन मामलों को उचित समझने पर उन्हें महत्ता के आधार पर पूरी समीक्षा करें और अगर उसे फिर से नियमित रूप से मंत्रिपरिषद के समक्ष लाना चाहें तो ला सकते हैं.

 

नीतीश ने कहा कि अन्यान्य के तौर पर लिए ये निर्णय बुनियादी तौर अनियमित निर्णय थे और उसको लेकर संबंधित विभागों द्वारा न तो कोई प्रस्ताव लाया गया था और उनके बारे में विधि, वित्त सहित अन्य आवश्यक विभागों की राय ली गयी जिससे उनमें नियमों का पालन नहीं किया गया था.

 

उन्होंने कहा कि ऐसे में उनके मंत्रिमंडल के समक्ष उसे रद्द करने के अलावा दूसरा कोई विकल्प ही नहीं बचा था.

 

उन्होंने कहा कि कोई कल्पना भी नहीं कर सकता है कि कैबिनेट में इस प्रकार से निर्णय लिए जा सकते हैं. कोई बात कहकर उसे कैबिनेट के निर्णयों में शामिल करा दिया गया, पर लोकतंत्र में इस तरह से निर्णय नहीं लिए जाते और यदि उसे सुधारा नहीं जाएगा तो इससे एक ‘खतरनाक’ परंपरा की शुरूआत होगी.

 

नीतीश ने कहा कि मंत्रिपरिषद में शामिल मंत्री कोई भी निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र नहीं है और यह जीता जागता स्वछंदता का प्रतीक है. हम निर्णय लेने के लिए नियमों के मुताबिक स्वतंत्र हैं, स्वछंद नहीं हैं कि जो चाहें निर्णय लें, क्योंकि निर्णय लेने के लिए तरीका बना हुआ है और उसका पालन करके ही कोई निर्णय ले सकते हैं. उन्होंने कहा कि जिन लोगों से ऐसे निर्णय लिए अगर वे ही अभी में सत्ता में रहते तो वो भी इस बारे में कुछ नहीं कर सकते थे.

 

नीतीश ने कहा कि उनका यूएसपी सुशासन है हम पर कानून का राज स्थापित करने की जिम्मेदारी है और उसका हम सर्वोच्च स्तर पर उल्लंघन करें. अगर उसे निर्णय मान लें तो हम भी उस दोष में शामिल होंगे.

 

उल्लेखनीय है कि गत 10, 18 एवं 19 फरवरी को मांझी मंत्रिपरिषद द्वारा लिए गए 34 फैसलों को नीतीश मंत्रिपरिषद ने कल निरस्त करते हुए संबंधित विभागों को यह स्वतंत्रता दी कि इन प्रस्तावों में आवश्यक समझे जाने वाले प्रस्ताव को यथोचित प्रक्रिया अपनाकर उन्हें मंत्रिपरिषद के समक्ष विचार के लिए फिर से पेश सकते हैं.

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