किसान की आत्महत्या का फसल बर्बाद होने से संबंध नहीं: प्रशासन

By: | Last Updated: Friday, 1 May 2015 2:48 AM

सीकर: फसल बर्बाद होने पर मुआवजा नहीं मिलने से परेशान और कर्ज में डूबे तारपुरा गांव के किसान सांवरमल के आत्महत्या करने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया. प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों ने किसान के घर जाकर स्थिति का जायजा लिया.

 

जिलाधिकारी एल एन सोनी ने बताया कि किसान पर पुराना कर्ज था. उसने किसान क्रेडिट कार्ड से लोन ले रखा था. इसका फसल के नुकसान से कोई संबंध नहीं है. फसलों को हुए नुकसान के बाद तारपुरा गांव की गिरदावरी की करवाई गई थी. इसमें किसान के महज दस प्रतिशत नुकसान सामने आया था. ऐसे में मुआवजा मिलना संभव नहीं था.

 

वहीं उसके परिजनों का कहना है कि न तो कोई गिरदावरी के लिए आया और न ही कोई उनसे मिला. ऐसे में सवाल यह उठता है कि प्रशासन किस आधार पर कह रहा है कि नुकसान दस प्रतिशत ही हुआ है.

 

परिजनों के अनुसार सांवरमल ने चार बीघा में चने और गेहूं की फसल उगाई थी. 12 हजार रुपए खर्च करने पर उसे मात्र 3700 रुपए की फसल मिली थी. वहीं इस मामले में किसान संगठन भी सक्रिय हो गए. अखिल भारतीय किसान सभा ने इस मामले में कल जिला मुख्यालय पर धरना देने घोषणा की है.

 

गौरतलब है कि दादिया थाना इलाके के तारपुरा गांव के किसान सांवरमल पुत्र रामूराम जाट ने कर्जे व फसल बर्बाद होने के बाद तंगी की हालत के चलते मंगलवार रात कमरे में पंखे पर फंदा लगाकर जान दे दी थी.

 

परिजनों के अनुसार उसने जमीन पर क्रेडिट कार्ड से तीन लाख का लोन लिया था. पिछले दिनों हुई ओलावृष्टि से उसकी फसल नष्ट हो गई थी. इसके चलते उसका बिजली का बिल भी नहीं अदा हो पा रहा था. इससे वह बुरी तरह टूट गया और यह कदम उठा लिया. इधर, किसान सभा के पदाधिकारियों ने तारपुरा जाकर सांवरमल के परिजनों से मुलाकात की.

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Web Title: no connection between crops fail and farmer’s suicide: administration
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