अमित शाह की टीम में 6 उपाध्यक्ष, 8 महासचिव, 4 संयुक्त सचिव और 11 सचिव लेकिन इनमें से कोई दलित नेता नहीं | No Dalit leaders in Central office bearers in BJP

अमित शाह की टीम में 6 उपाध्यक्ष, 8 महासचिव, 4 संयुक्त सचिव और 11 सचिव लेकिन इनमें से कोई दलित नेता नहीं

जिस पार्टी की 22 राज्यों में सरकार है, उस पार्टी के संगठन में एक भी दलित नेता नहीं हैं. बीजेपी के संविधान के 12 नंबर पन्ने पर लिखा है, "पार्टी के केंद्रीय पदाधिकारियों में कम से कम 13 महिलायें और तीन-तीन दलित आदिवासी कोटे से होंगे.

By: | Updated: 06 Apr 2018 04:38 PM
No Dalit leaders in Central office bearers in BJP

लखनऊ: लोकसभा चुनाव कुछ ही महीने दूर हैं लेकिन बीजेपी के 'अपनों' से ही पार्टी के कर्ताधर्ता हैरान और परेशान हैं. बीजेपी के दलित सांसदों को घुटन होने लगी है. कुछ नेताओं के हाव भाव और बोलवचन अब बागी जैसे हो गए हैं. जिस यूपी की वजह से नरेंद्र मोदी पीएम बने, हालात वहीं सबसे खराब है. बीजेपी के तीन सांसद खुल कर मैदान में आ गए है. भगवाधारी सावित्री बाई फूले ने तो लखनऊ में रैली कर मोदी और योगी सरकार पर हल्ला बोल दिया.


छोटेलाल खरवार यूपी के रॉबर्ट्सगंज से सांसद हैं. उन्होंने चिट्ठी लिख कर पीएम नरेंद्र मोदी से सीएम योगी आदित्यनाथ की शिकायत की है. खरवार बताते हैं, "हम अपनी समस्या लेकर दो बार योगी जी से मिले, लेकिन मेरी मदद के बदले उन्होंने मुझे डांट कर भगा दिया". खरवार को शिकायत है समाजवादी पार्टी नेताओं के इशारे पर उनके भाई को सताया जा रहा है लेकिन प्रशासन की तरफ से उनकी कोई मदद नहीं की गयी. सोनभद्र के डीएम ने उनके घर को वन विभाग की ज़मीन बता दिया लेकिन अनुसूचित जाति आयोग के कहने पर जब ज़मीन की पैमाईश हुई तो वो खरवार की निकली. वे पार्टी की अनुसूचित जाति और जनजाति मोर्चा के अध्यक्ष हैं.


अशोक दोहरे इटावा से बीजेपी के लोकसभा सांसद हैं. उन्होंने सीएम योगी आदित्यनाथ के बदले सीधे पीएम को चिट्ठी लिख दी. दोहरे इस बात से परेशान हैं कि दलितों को बेवजह परेशान किया जा रहा है. दोहरे ने बताया, "2 अप्रैल के भारत बंद के बहाने दलितों पर झूठे मुक़दमे किये जा रहे हैं''. दलित सांसदों के आरोप पर योगी आदित्यनाथ ने कहा, "हमारी सरकार में किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं हो रहा है."


बीजेपी की फायरब्रांड दलित नेता सावित्री बाई फूले तो लखनऊ में पिछ्ड़ों और दलितों की रैली तक कर चुकी हैं. वे कहती हैं, "हमारे समाज के लोगों की अनदेखी हो रही है. योगी जी के राज में बाबा साहेब की मूर्तियां तोड़ी जा रही हैं. बिना बात के उनके नाम में रामजी जोड़ दिया गया." बहराईच से सावित्री पहली बार एमपी बनी हैं. वे घूम-घूम कर अपनी ही सरकार की बखिया उधेड़ रही हैं.


ये तो बीजेपी के तीन सांसद है जो लिखा पढ़ी में सरकार के खिलाफ खड़े हैं. सच तो ये है कि बीजेपी के अधिकतर नेता अब इसी मूड में हैं. यूपी से लोकसभा की 80 सीटें हैं. इनमें से सभी सुरक्षित 17 सीटों पर बीजेपी की जीत हुई. विधानसभा चुनाव में भी सुरक्षित 86 में से 76 सीटें बीजेपी को ही मिली लेकिन इतनी बंपर जीत के बाद भी पार्टी के दलित सांसद और विधायक अपने को लाचार और बेबस मान रहे हैं. वे सत्ता में अपनी भागीदारी चाहते हैं लेकिन ऐसा हुआ नहीं. ऐसे नेता बीएसपी और समाजवादी पार्टी के गठबंधन से घबराये हुए हैं. सीएम, डिप्टी सीएम, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष से लेकर बड़े बड़े विभागों के मंत्री में से कोई दलित नहीं है.


जिस पार्टी की 22 राज्यों में सरकार है,  उस पार्टी के संगठन में एक भी दलित नेता नहीं है. बीजेपी के संविधान के 12  नंबर पन्ने पर लिखा है, "पार्टी के केंद्रीय पदाधिकारियों में कम से कम 13 महिलायें और तीन-तीन दलित आदिवासी कोटे से होंगे. अभी बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की टीम में 6 उपाध्यक्ष,  8  महासचिव,  4 संयुक्त सचिव और 11  सचिव हैं लेकिन इनमें से कोई दलित नेता नहीं है. अब अगर हालात नहीं बदले तो पीएम मोदी का विजय रथ रास्ते में ही फंस सकता है.

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