अखलाक के गांव बिसाड़ा में केजरीवाल को नहीं मिली एंट्री

By: | Last Updated: Saturday, 3 October 2015 5:40 AM

नई दिल्लीः ग्रेटर नोएडा के बिसाढ़ा में गांव वालों मीडिया और नेताओं की एंट्री बंद कर दी है. आज दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पुलिस सुरक्षा के बीच बिसाड़ा गांव पहुंचे लेकिन केजरीवाल को गांव के बाहर ही रोक दिया गया.

 

केजरीवाल सहित दौरे पर पहुंचे संजय सिंह, आशुतोष, कुमार विश्वास को अब गेस्ट हाउस रवाना कर दिया गया है.  सुबह गांव की महिलाओं के विरोध के बाद मीडिया वालों को पुलिस ने गांव से बाहर कर दिया था.  खबर आ रही है कि  मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने गांव में मीडिया और राजनेताओं की एंट्री पर रोक लगा दी है.  केजरीवाल इस वक्त एनटीपीसी गेस्ट हाउस में रुके हुए हैं.  गांव के स्थानीय लोगों का हंगामा जारी है.

 

केजरीवाल ने सवाल किया कि जब असदुद्दीन ओवैसी और महेश शर्मा जैसे नेताओं को वहां जाने दिया गया तो उन्हें शोकसंतप्त परिवार से मिलने से क्यों रोका गया ? उन्होंने ट्विटर पर लिखा, ‘‘हमें पुलिस और प्रशासन ने रोक दिया. महेश शर्मा और ओवैसी को कल नहीं रोका था. फिर मुझे क्यों? मैं सबसे शांतिप्रिय हूं. केवल अखलाक के परिवार से मिलना चाहता हूं.’’ आप नेताओं ने दावा किया कि उन्हें गांववालों ने नहीं बल्कि पुलिस और प्रशासन ने रोका.

 

एसटीएफ करेगी केस की जांच

दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा के दादरी हत्याकांड की जांच यूपी एसटीएफ को सौंप दी गई है. सोमवार की रात पचास साल के अखलाक की भीड़ ने हत्या कर दी थी.

 

हिंदू परिवार ने दी थी अखलाक के परिवार को पनाह

नफरत की तमाम कहानियों के बीच गांव में सदभाव की बड़ी खबर पता चली है. गांव के हिंदुओं की उग्र भीड़ जब अखलाक के घर को घेरे हुए थी तब पड़ोस में रहने वाले राणा परिवार ने अखलाक के परिवार की तीन महिलाओं, एक पुरुष और एक छोटे बच्चे को अपने घर में शरण देकर जान बचाई. पड़ोस की शशि देवी और विष्णु राणा ने अपने घर में रात भर पहरा दिया और भीड़ से अखलाक के परिवार की हिफाजत की.

दादरी के बिसाड़ा गांव में जब शक के आधार पर अखलाक के घर को हत्यारी भीड़ ने घेर रखा था, उस शाम एक ऐसा हिन्दू परिवार भी था जिसने इखलाक के परिवार के लोगों को अपने यहां पनाह दी. एक छोटा बच्चा, तीन महिलाएं और एक आदमी कुल 5 लोगों ने पड़ोस में ही रहने वाले विष्णु राणा और शशि देवी के घर रात गुजारी.

 

एक ऐसी खौफनाक शाम जब गांव में एक मुस्लिम के घर को हिन्दू धर्म के लोगों ने चारों तरफ से घेर लिया हो, ऐसे में अखलाक के घर वाले दहशत में हों कि उनकी जान का क्या होगा? वो किस पर भरोसा करें? ऐसे में अखलाक के ही परिवार के 5 सदस्य शशि देवी के पास पहुंचते हैं और पनाह मांगते हैं. शशि देवी बिना संकोच उन लोगों को अपने कमरे में ले गईं और बेफिक्र होकर सोने को कहा. शशि देवी गांव के सामाजिक ताने बाने को बेहतर तरीके से जानती हैं लेकिन एक तो हिन्दू धर्म और ऊपर से उत्तेजित भीड़ उन्हें विचलित कर रही थी. उस समय तक उनके पति जो पेशे से प्रोडक्शन इंजीनियर हैं वो भी नहीं आये थे. तकरीबन 11 बजे रात में विष्णु राणा घर वापस आए. रात भर ये हिन्दू परिवार इसलिए जागता रहा ताकि घर में शरण लिए हुए लोग चैन से रह सकें. ये इंसानियत थी जिसने एक दूसरे की मदद की.

 

विष्णु राणा कहते हैं सालों से इस गांव में धर्म जात बिरादरी कोई मुद्दा ही नहीं रहा. अगर कुछ गलत हुआ भी था तो लोग कानून का रास्ता ले सकते थे.

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Web Title: No entry for media and Arvind Kejriwal in Bishada village
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