सरकार की सफाई- सेंसर बोर्ड में सरकारी हस्तक्षेप नहीं

By: | Last Updated: Friday, 16 January 2015 7:46 AM
No interference in certification process: Rathore

नई दिल्ली: केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के क्रिया-कलापों में हस्तक्षेप के बोर्ड अध्यक्ष लीला सैमसन के आरोपों से इनकार करते हुए सरकार ने आज कहा कि उसने हमेशा से समूची फिल्म प्रमाणन प्रक्रिया से एक दूरी बनाए रखी है.

 

लीला ने डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह अभिनीत विवादस्पद फिल्म ‘मैसेंजर ऑफ गॉड’ पर विवाद के बीच सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने का फैसला किया है.

 

सेंसर बोर्ड के क्रिया-कलापों में हस्तक्षेप के ‘हाल के मामलों’ के चलते इस्तीफा देने का फैसला करने संबंधित लीला के बयान पर सूचना एवं प्रसारण राज्यमंत्री राज्यवर्धन राठौड़ ने कहा कि उनके मंत्रालय ने हमेशा सेंसर बोर्ड से ‘दूरी बनाए रखी’ है.

 

राठौड़ ने यहां पत्रकारों से कहा, ‘(सेंसर बोर्ड की) अध्यक्ष के इस्तीफे का हालिया मुद्दा सामने आया है. मैं सभी लोगों के ध्यान में लाना चाहूंगा कि समूचा सेंसर बोर्ड और उसके सभी सदस्य पिछली सरकार द्वारा नियुक्त किए गए थे. उनमें से कोई नहीं बदला गया है. कोई अतिरिक्त सदस्य नहीं रखा गया है. जिस सेवा-विस्तार की चर्चा अध्यक्ष कर रही हैं वह समूचे सेंसर बोर्ड को प्रदान किया गया.’

 

लीला से जब पूछा गया कि क्या उन्हें इन मीडिया रिपोटरें की जानकारी है कि ‘मैसेंजर ऑफ गॉड’ को फिल्म प्रमाणन अपीली अधिकरण से मंजूरी मिली है तो उन्होंने कहा, ‘मैंने ऐसा सुना है. कुछ भी लिखित में नहीं है. यह केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड का मजाक है. मेरा त्यागपत्र अंतिम है. :सूचना एवं प्रसारण: सचिव को सूचित कर दिया है.’

 

राठौड़ ने कहा कि उनके मंत्रालय ने हमेशा सेंसर बोर्ड का सम्मान किया है और उसके फैसलों से दूरी बनाए रखी है. उन्होंने कहा, ‘अध्यक्ष दबाव की बात करती हैं. सरकार के बतौर हम वह एसएमएस, या पत्र देखना चाहेंगे जिनमें उनपर या किसी अन्य सदस्य पर दबाव डाला गया है. उसके बाद हम उचित कार्रवाई करेंगे.’ राठौड़ ने कहा कि सेंसर बोर्ड एक स्वतंत्र निकाय है और उसे उसी तरह बर्ताव करना चाहिए.

 

लीला ने कहा था कि सेंसर बोर्ड के सभी सदस्यों और अध्यक्ष का कार्यकाल ‘पूरा हो चुका है. लेकिन चूंकि नई सरकार नया बोर्ड और अध्यक्ष नियुक्त नहीं कर सकी, कुछ को सेवा-विस्तार दिया गया और कहा गया कि जबतक प्रक्रिया पूरी नहीं होती, वे काम करते रहें.’ उन्होंने आरोप लगाया है , ‘लेकिन एक अतिरिक्त प्रभार वाले सीईओ के जरिए ,मंत्रालय द्वारा सीबीएफसी के कामकाज में हस्तक्षेप के हालिया मामलों तथा पैनल के भ्रष्ट अधिकारियों ने उन मूल्यों का क्षरण किया है जिनकी रक्षा इस सीबीएफसी के बोर्ड के सदस्य और अध्यक्ष करते रहे हैं.’

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