महिलाओं की भावना के उलट पर्सनल लॉ बोर्ड का फरमान, 'तीन तलाक में बदलाव नहीं'

By: | Last Updated: Thursday, 3 September 2015 6:47 AM
No scope of change in triple talaq system: Qureshi

लखनऊ : ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और संबद्ध संगठनों ने तीन दफा तलाक कहने की परंपरा में बदलाव से इनकार कर दिया है. संगठनों की ओर से कहा गया है कि कुरान (अल्लाह की किताब) और हदीस (पैंगम्बर मोहम्मद  की कथनी) के मुताबिक एक बार में तीन तलाक कहना हालांकि जुर्म है लेकिन इससे तलाक हर हाल में मुकम्मल माना जाएगा. इस व्यवस्था में बदलाव मुमकिन नहीं है.

 

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ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना अब्दुल रहीम कुरैशी के अनुसार उन्हें अखबार की खबरों से पता लगा है कि ऑल इंडिया सुन्नी उलेमा काउंसिल ने बोर्ड के साथ-साथ देवबंदी और बरेलवी मसलक (संप्रदाय) को खत लिखा है. खत में कहा गया है कि अगर इस्लामी कानून में गुंजाइश हो तो किसी शख्स द्वारा एक ही मौके पर तीन बार तलाक कहे जाने को ‘एक बार कहा’ हुआ माना जाए, क्योंकि अक्सर लोग गुस्से में एक ही दफा तीन बार तलाक कहने के बाद पछताते हैं.

 

उन्होंने कहा कि खबरों के मुताबिक काउंसिल ने पाकिस्तान समेत कई मुल्कों में ऐसी व्यवस्था लागू होने की बात भी कही है. हालांकि बोर्ड को अभी ऐसा कोई पत्र नहीं मिला है लेकिन वह काउंसिल के सुझाव से सहमत नहीं है.

 

कुरैशी ने कहा, “कि किसी मुस्लिम मुल्क में क्या होता है, उससे हमें कोई लेना-देना नहीं है. पाकिस्तान, बांग्लादेश, ईरान, सूडान और दूसरे मुल्कों में क्या हो रहा है, वह हम नहीं देखते. हम तो यह देखते हैं कि कुरान शरीफ, हदीस और सुन्नत क्या कहती है.”

 

उन्होंने आगे कहा, “इस्लाम में एक ही मौके पर तीन बार तलाक कहना अच्छा नहीं माना गया है लेकिन इससे तलाक मुकम्मल माना जाएगा. इस व्यवस्था में बदलाव की कोई गुंजाइश नहीं है.”

 

कुरैशी ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड ने पिछले हफ्ते मुल्क के तमाम उलेमा के नाम एक सवालनामा भेजा है, जिसमें कहा गया है कि एक वक्त में तीन तलाक कहने वालों को क्या जुर्माने की कोई सजा दी जा सकती है.

 

इस बीच, बरेलवी मसलक के मुख्य केन्द्र दरगाह आला हजरत की मजहबी और समाजी मामलों की इकाई जमात रजा-ए-मुस्तफा के महासचिव मौलाना शहाबउद्दीन ने बताया कि एक बार में तीन तलाक कहने को अमान्य किये जाने की मांग पहले भी उठ चुकी है लेकिन हनफी, शाफई, मालिकी और हम्बली समेत चारों मसलक के धर्मगुरओं ने तय किया है कि एक बार में तीन दफा तलाक कहे जाने से तलाक मुकम्मल माना जाए.

 

आपको बता दें कि भारत में तीन तलाक की परंपरा पर बहस पुरानी है. एबीपी न्यूज़ ने जब इस सिलसिले में एक इस्लामिक मामलों के जानकार से बात की है तो उन्होंने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि कुरान और हदीस की रोशनी में तीन तलाक की परंपरा को रद्द करना मुमकिन है. उनका कहना था कि इस पर खुलकर बोलने से उनकी परेशानी बढ़ सकती है.

 

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