नो स्मोकिंग एड पर बंटा हुआ है बॉलीवुड

By: | Last Updated: Sunday, 29 June 2014 10:54 AM

नई दिल्ली: सिनेमाघरों में पिछले दो साल से पर्दे पर दिखाये जा रहे 30 सैकंड के नो स्मोकिंग एड के असर को लेकर फिल्म जगत के लोग बंटे हुए हैं.

 

राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देश प्रियदर्शन ने कहा, ‘‘ नो स्मोकिंग विज्ञापनों से धूम्रपान करने वालों का कोई भला नहीं होने वाला.’’ उन्होंने कहा, ‘‘इस तरह के इश्तहार में केवल एक अच्छी बात है कि इससे नयी पीढ़ी को धूम्रपान शुरू नहीं करने की प्रेरणा मिल सकती है और सबसे अच्छा उपाय है कि सिगरेटों की बिक्री बंद की जाए.’’

 

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय तथा राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम ने वर्ल्ड लंग फाउंडेशन-भारत के सहयोग से 2012-13 में तंबाकू नियंत्रण वाले विज्ञापनों की शुरूआत की थी.

 

वर्ल्ड लंग फाउंडेशन ने फिल्मों से पहले दिखाने के लिए दो विज्ञापन बनाये.

 

दो विज्ञापन ‘स्पंज’ और ‘मुकेश’ 2 अक्तूबर, 2013 तक सिनेमाघरों में चलाये गये और बाद में दूसरे दो विज्ञापनों ‘चाइल्ड’ और ‘धुआं’ ने इनकी जगह ले ली.

इन सभी विज्ञापनों में तंबाकू के अनेक नुकसानों को बताया गया है और दर्शकों से तंबाकू का इस्तेमाल नहीं करने या छोड़ देने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है. एक और राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म निर्देशक अंजलि मेनन ने विज्ञापनों की गुणवत्ता को लेकर चिंता जाहिर की है.

 

उन्होंने कहा, ‘‘ऑडियो विजुअल एड आमतौर पर प्रभावी होते हैं लेकिन इन विज्ञापनों की गुणवत्ता बहुत खराब है और इसलिए ये संदेश देने में निष्प्रभावी हैं.’’ अंजलि ने कहा,‘‘केवल करने के लिए विज्ञापन नहीं करना चाहिए.’’ उन्होंने कहा कि दुनियाभर में धूम्रपान के खिलाफ अधिक प्रभावी और सोचने पर मजबूर करने वाले विज्ञापन हैं.

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