‘नॉन रेजिडेंट बिहारी: कहीं पास, कहीं फेल’- पलायन, प्रेम और जद्दोजेहद की दास्तां

By: | Last Updated: Saturday, 24 October 2015 5:57 PM

नई दिल्ली: अपना घर परिवार छोड़कर करियर की तलाश में बाहर निकलनेवालों की अजीब दास्तां होती है. एक तरह अपनी माटी से जज्बाती रिश्ता, दूसरी तरफ दुनियादारी के तमाम दांवपेंच. एक तरफ जालिम जमाने से निपटने की चुनौती, दूसरी तरफ करियर और मोहब्बत के मायने तलाशने की जद्दोजहद और आखिर में नतीजा…!

 

राजकमल प्रकाशन संस्था के फंडा इम्प्रिंट से शीघ्र प्रकाशित होनेवाली ‘नॉन रेजिडेंट बिहारी: कहीं पास, कहीं फेल’ के नायक राहुल की यही कहानी है. दिमाग से शॉर्प, दिल से सच्चा और आंखों में जिंदगी के सतरंगी सपने संजोए राहुल बिहार से दिल्ली के मुखर्जीनगर आता है. डीएम-एसपी बनने. यूपीएसएसी उसके लिए महज प्रेस्टिज, पॉवर और पैसा का माध्यम नहीं हैं, जिंदगी से जुड़ने का जरिया है. जिंदगी मतलब शालू ! शालू का साथ तो जहां को जीतने को जज्बा, बिछड़ने का अहसास तो जिंदगी जिंदा लाश की तरह !

 

और शालू-एक आम हिंदुस्तानी लड़की. दिल के एक कोने में घर परिवार, दूसरे कोने में आशिक का बसेरा लेकिन एक म्यान में दो तलवार  कब रह पाये हैं ? प्यार, तकरार और तलवार की धार पर चलने की शालू के सामने चुनौती ! लब पर बस एक दुआ- मोहब्बत को मकाम मिले लेकिन दुआ से इस जालिम जहां में सब ठीक हो जाता तो फिर दुनिया को कड़वी दवा की क्या जरुरत थी ?

 

आखिर में आता है फैसले का दिन. कयामत का दिन ! कुछ कर गुजरने का दिन ! एक तरफ जिंदगी, दूसरी तरफ जिंदगी की ‘जिंदगी’ ! लेकिन इसमें भी जबरदस्त प्रैक्टिल लोचा ! जिंदगी की बागडोर जिंदगी की ‘जिंदगी’ के पास होती है लेकिन उस ‘जिंदगी’ पर किसी का जोर नहीं चलता है.

           

जीवन के इसी दंद्ध को उकेरती रचना है-‘नॉन रेजिडेंट बिहारी: कहीं पास, कहीं फेल’. स्टूडेंट लाइफ की फूल टू मस्ती के बीच मोहब्बत की एक मर्मस्पर्शी दास्तां. मोहब्बत-राहुल और शालू के बीच, मोहब्बत- राहुल और संजय के बीच, मोहब्बत- अब्दुल और गोपी के बीच, मोहब्बत अल्ला मियां और बजरंग बली के बीच ! मोहब्बत के इस रूमानी अहसास के बीच है टिपिकल बिहारी कास्ट, कम्यूनिल पॉलिटिक्स और दकियानूसी सामाजिक सोच की कड़वी सच्चाई .

             

और आखिर में दो शब्द उपन्यास के लेखक और एबीपी न्यूज के पत्रकार शशिकांत के बारे में. तमाम दूसरे बिहारी स्टूडेंट की तरह ये भी बिहार से दिल्ली के मुखर्जी नगर पहुंचे थे यूपीएससी की तैयारी करने. लालबत्ती नहीं मिली तो उठा लिए लैपटॉप और लिख दिए- ‘नॉन रेजिडेंट बिहारी: कहीं पास, कहीं फेल’. आधी हकीकत, आधा फसाना ! नॉन रेजिडेंट बिहारी कहां पास हुआ है, कहां फेल ? इसका आखिरी फैसला आपके हाथों में.

 

लेखक और पत्रकार शशिकांत से आप फेसबुक और ट्विटर के जरिए सीधे जुड़ सकते हैं और ‘नॉन रेजिडेंट बिहारी: कहीं पास, कहीं फेल’ से संबंधित हर जानकारी ले सकते हैं. उनका फेसबुक पेज है- नॉन रेज़िडेन्ट बिहारी: कहीं पास कहीं फेल . इस पेज को लाइक कर आप उपन्यास से संबंधित सभी जानकारियां हासिल कर सकते हैं.

 

वहीं ट्वीटर से जुड़ने के लिए यहां क्लिक करें- Shashi Kant Mishra ‘नॉन रेजिडेंट बिहारी: कहीं पास, कहीं फेल’.

 

अगर आप इस उपन्यास को खरीदना चाहते हैं तो Amazon की साइट पर जाकर प्री-बुकिंग कर सकते हैं. या फिर एक क्लिक के साथ आप यहां से केवल 94 रुपये में किताब घर बैठे मंगवा सकते हैं. लिंक- Pre booking for Non resident Bihari

 

आप ‘नॉन रेजिडेंट बिहारी: कहीं पास, कहीं फेल’ के यू-ट्यूब चैनल को भी सब्सक्राइब कर सकते हैं. लिंक है- ‘नॉन रेजिडेंट बिहारी: कहीं पास, कहीं फेल’ .

 

यहां देखें उनकी किताब से जुड़ी हुई एक दिलचस्प वीडियो-