पृथ्वीराज ने नोटबंदी को अमेरिकी साजिश बताया, 'दबाव में लिया गया था फैसला'

पृथ्वीराज ने नोटबंदी को अमेरिकी साजिश बताया, 'दबाव में लिया गया था फैसला'

चव्हाण ने नोटबंदी को एक साजिश बताते हुए इसके पीछे अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा का हाथ होने का आरोप लगाया है. च्वहाण के मुताबिक जब ओबामा भारत आए थे तब उन्होंने नोटबंदी का सुझाव सरकार को दिया.

By: | Updated: 27 Sep 2017 09:49 AM

नई दिल्ली: महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने नोटबंदी को लेकर मोदी सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है. पृथ्वीराज चव्हाण ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा पर भी आरोप लगाए हैं. चव्हाण का आरोप है कि ओबामा ने साजिश कर देश में नोटबंदी लागू करवाई.


पृथ्वीराज च्वाहाण ने नोटबिंदी को अमेरिकी साजिश बताते हुए कहा, ''मोबाइल पेमेंट कंपनी जिसको वहां पेमेंट सेक्टर कहा जाता है उन पर अमेरिका में कुछ कानून बने हैं, जिसमें उनको कमीशन मिलने का प्रावधान है वहीं से भारत ने नियम लिया है.''


पृथ्वीराज च्वहाण के मुताबिक, ''इस नियम को अमेरिका में टॉड फ्रैंक एक्ट के नाम से जाना जाता है. उसके अंदर एक डर्किन अमेंडमेंट हैं. जिसमें वहां पर क्रेडिट कार्ड कंपनियों का कमीशन करीब-करीब आधा कर दिया था. जिससे 10 अरब डॉलर का नुकसान अमेरिका में हुआ था. नए मार्केट की खोज में थे और भारत से नया कोई मार्केट था नहीं.''


नोटबंदी का 'साजिश' में ओबामा शामिल
चव्हाण ने नोटबंदी को एक साजिश बताते हुए इसके पीछे अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा का हाथ होने का आरोप लगाया है. च्वहाण के मुताबिक जब ओबामा भारत आए थे तब उन्होंने नोटबंदी का सुझाव सरकार को दिया. पृथ्वीराज चव्हाण के मुताबिक भारत ने अमेरिका के कहने पर ही डिजिटल पेमेंट की ओर कदम बढ़ाया जिसके लिए नोटबंदी की जरूरत थी.


पृथ्वीराज च्वाहाण ने कहा, ''बराक ओबामा अमेरिका से जब भारत आए थे उन्होंने शुरूआत की और भारत से गुजारिश की कि आप डिजिटलाइजेशन की तरफ जाइए और एक संगठन है, जो क्रेडिट कार्ड कंपनियों का संगठन है, भारत उनसी सदस्यता ले ले.''


अब क्या मांग कर रहे हैं पृथ्वीराज च्वहाण?
पृथ्वीराज च्वहाण अब नोटबंदी को लेकर पूरे मामले की जांच संस्दीय समिति से कराए जाने की मांग कर रहे हैं. पृथ्वीराज च्वहाण ने कहा, ''क्रेडिट कार्ड की तरफ जाना या पेटीएम या मोबाइल पेमेंट की तरफ जाना उसके लिए नोट गायब करने पड़ेंगे जो उसका उद्देश्य था. इसीलिए हम संसदीय समिति से इसकी जांच की मांग कर रहे हैं.''


नोटबंदी पर सरकार और आरबीआई क्या कहते हैं?
पिछले साल 8 नवंबर को 500 और हजार रुपये का नोटबंद करने का एलान हुआ था. सरकार ने नोटबंदी को कालेधन के खिलाफ अहम कदम बताया था. नोटबंदी के नौ महीने बाद आरबीआई ने जो आंकड़े जारी किए उसके मुताबिक 30 जून तक कुल मिलाकर 15 लाख 28 हज़ार करोड़ रुपये के पांच सौ और हज़ार रूपए के पुराने नोट वापस आए. जबकि बंद हुए कुल नोटों की संख्या 15 लाख 44 हज़ार करोड़ थी, यानी सिर्फ 16 हज़ार करोड़ रूपए ही वापस नहीं आए, हालांकि इसमें सहकारी बैंकों में और नेपाल में जमा कराए गए नोट शामिल नहीं थे.


सरकार अभी भी नोटबंदी तो सफल कदम बता रही है. इसके पीछे कि सरकार का तर्क है कि नोटबंदी के बाद करीब 2 लाख फर्जी कंपनियां पकड़ में आयीं, नगद लेन देन कम हुआ और डिजिटल ट्रांजैक्शन में इज़ाफा हुआ और 56 लाख नए करदाता जुड़े.''

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