एनएसए अजीत डोभाल ने की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात

By: | Last Updated: Saturday, 22 August 2015 7:55 AM
nsa ajeet dobhal meets pm modi

नई दिल्लीः भारत और पाकिस्तान के बीच कल यानी 23 अगस्त से  होने वाली राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) बैठक खतरे में पड़ती नजर आ रही है दोनों देशों के बीच बात-चीत के मुद्दों को लेकर मत भेद बढ़ता ही जा रहा है.

 

भारत जहां आतंकवाद, अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद के ठिकाने जैसे मुद्दों पर बात करना चाहता है वहीं पाकिस्तान कश्मीर पर ही बात करना चाह रहा है. इस गंभीर स्थिति में भारतीय एनएसए अजीत डोभाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की है. डोभाल ने पीएम से मिलकर इस बैठक को लेकर चल रहे विवाद पर बात की है. हालांकि दोनों के बीच क्या बात हुई है इसके बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है.

 

आज डेढ़ बजे पाक एनएसए सरताज अजीज प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करने वाले हैं.   पाकिस्तान को भारत जहां यह स्पष्ट कर चुका है कि अलगाववादियों और अजीज के बीच मुलाकात उचित नहीं होगी, वहीं पाकिस्तान इस बात पर अड़ा है कि वह अलगाववादी हुर्रियत नेताओं से वार्ता करने की अपनी ‘‘विगत समय से चली आ रही परिपाटी’’ से पीछे नहीं हटेगा.

 

भारत ने हुर्रियत प्रतिनिधियों को पाकिस्तान के आमंत्रण को ‘‘भड़काउ कदम’’ करार दिया है और आरोप लगाया कि इस्लामाबाद आतंकवाद पर वास्तविक चर्चा करने की अपनी प्रतिबद्धता से बचने की कोशिश कर रहा है जिस पर वह पिछले महीने रूस के ऊफा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नवाज शरीफ के बीच हुई बैठक में सहमत हुआ था .

 

शब्बीर शाह को एयरपोर्ट पर रोका गया

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार  स्तरीय वार्ता से पहले शनिवार को हुर्रियत नेता शब्बीर शाह दोपहर बाद करीब साढ़े 12 बजे दिल्ली पहुंचे. एयरपोर्ट पर ही प्रशासन ने उन्हें रोक लिया है. सूत्रों के अनुसार सरकार उन्हें वापस कश्मीर भेजने की तैयारी में है. उनके साथ जेकेएलएफ का दो सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भी है.

 

शब्बीर ने दिल्ली के लिए रवाना होने से पहले कहा  वे रविवार को पाकिस्तान हाउस में पाकिस्तानी एनएसए सरताज अजीज से मुलाकात करेंगे. उनके मुताबिक, वे पिछले 25 साल से अटल और यूपीए सरकार के दौरान भी पाकिस्तान से वार्ता करते आए हैं.

 

क्या है अब तक की बड़ी अपडेट

सूत्रों के मुताबिक भारत ने पाकिस्तान के साथ होने वाली बातचीत का एजेंडा तय कर दिया है. भारत वार्ता से पीछे नहीं हटेगा भारत ने कहा है कि सिर्फ आतंकवाद पर बात होगी. सूत्रों के मुतबिक दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बातचीत रविवार को सुबह दस बजे से हैदराबाद हाउस में शुरू होगी. एबीपी न्यूज को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक ये भी तय हुआ है कि हुर्रियत के नेताओं को किसी भी कीमत पर दिल्ली नहीं आने दिया जाएगा.

 

रविवार से शुरू होने वाली भारत और पाकिस्तान के बीच एनएसए स्तर की बातचीत से ठीक पहले भारत सरकार ने दो टूक लफ्जों में साफ कर दिया है कि बातचीत से पहले हुर्रियत नेताओं से बात ठीक नहीं है. बात सिर्फ आतंकवाद पर होगी और भारत ने अपना एजेंडा तय कर लिया है.

 

NSA बातचीत से पहले भारत ने पाकिस्तान से कहा कि सरताज अजीज का हुर्रियत नेताओं से मिलना ठीक नहीं होगा. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि ऊफा समझौते के खिलाफ ऐसी मुलाकात होगी.

 

10 जुलाई को रूस के ऊफा शहर में पीएम मोदी और पाकिस्तान के पीएम नवाज शरीफ की मुलाकात हुई थी जिसमें दोनों देशों के बीच NSA स्तर की बातचीत का फैसला हुआ था.

 

भारत सरकार पाकिस्तान को ऊफा समझौते की याद दिला रही है कि आतंकवाद के अलावा कोई और मुद्दा बात का नहीं हो सकता. भारत ने बातचीत का एजेंडा पाकिस्तान को अट्ठारह अगस्त को ही दे दिया है लेकिन पाकिस्तान ने अपनी तरफ से कोई एजेंडा भारत के सामने पेश नहीं किया है. पाकिस्तानी सुरक्षा सलाहकार के सरताज अजीज हुर्रियत नेताओं से मिलने पर अड़े हैं. पाकिस्तान कह रहा है कि उसे भारत की शर्तें मंजूर नहीं हैं और अलगाववादी नेता भी अजीज से मिलने की तैयारी में जुटे हैं.

 

हालांकि भारत सरकार साफ कर चुकी है कि अलगाववादी नेताओं को दिल्ली आने की इजाजत नहीं दी जाएगी. सूत्रों के मुताबिक अलगाववादी नेताओं को श्रीनगर से बाहर नहीं निकलने दिया जाएगा और अगर वो किसी तरह दिल्ली पहुंच भी गए तो उन्हें एयरपोर्ट पर हिरासत में ले लिया जाएगा.

 

भारत सरकार हर हाल में बातचीत को अंजाम तक पहुंचाना चाहती है जबकि कांग्रेस कह रही है कि बातचीत की तस्वीर ही साफ नहीं है. पूर्व राजनयिक जी पार्थ सारथी मानते हैं कि विदेश नीति से कन्फ्यूजन फैला हुआ है.

 

पिछले साल बासित की हुर्रियत नेताओं से मुलाकात के बाद भारत ने विदेशसचिव स्तरीय बातचीत बंद कर दी थी लेकिन अब उसने रुख बदल दिया है. इससे लगता है कि मोदी सरकार की नीति ही स्पष्ट नहीं है. तब सोचा ही नहीं था कि आगे यदि इस तरह की परिस्थिति बनी तो कैसे निपटेंगे. विदेश नीति में इस तरह के फैसले अच्छी बात नहीं है. अब यदि आपने अलगाववादियों को मिलने दिया तो लोग कहेंगे कि पहले आपने विदेश सचिव स्तरीय बातचीत क्यों बद की?

 

कुल मिलाकर जो हालात नजर आ रहे हैं उसमें पाक कश्मीर के मुद्दे को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है और भारत इस मुंद्दे पर बात नहीं करना चाहता.

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