NSCN(K) कर सकता है हमला, पूरे पूर्वोत्तर में हाई अलर्ट

By: | Last Updated: Thursday, 11 June 2015 1:55 PM
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फ़ाइल

नई दिल्ली: पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में हाई अलर्ट बरता जा रहा है क्योंकि ऐसी खबरें मिली हैं कि एनएससीएन.के उग्रवादी विद्रोही शिविरों पर सेना द्वारा किये गये हमले का बदला लेने के लिए भारत में प्रवेश कर गये हैं.

 

यह कदम गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद उठाया गया है. बैठक में रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, उप सेना प्रमुख लेफ्टीनेंट जनरल फिलिप केम्पोस भी मौजूद थे. इसमें खुफिया सूचनाओं को साझा किया गया.

 

सूत्रों ने बताया कि खुफिया सूचनाओं के अनुसार एनएससीएन.के, पीएलए, उल्फा तथा नव गठित यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट आफ साउथ एशिया सहित अन्य समूहों के करीब 20 उग्रवादी सेना द्वारा मंगलवार को किये गये सटीक हमले का बदला लेने के मकसद से भारत-म्यामांर की सीमा पार कर हमारे क्षेत्र में घुस आये हैं.

 

शीर्ष सुरक्षा प्रतिष्ठान ने समूचे पूर्वोत्तर क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति तथा सेना हमले के नतीजों का जायजा लिया.

 

सूत्रों ने कहा कि सरकार ने ‘‘संतोष’’ व्यक्त किया और जरूरत पड़ने की स्थिति में वह भविष्य में भी इसी प्रकार के हमलों का आदेश दे सकती है क्योंकि मंगलवार सुबह हुआ सैन्य अभियान सफल रहा था.

 

बहरहाल, सरकार म्यांमार के सिलसिले में शामिल संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए एहतियात बरत सकती है. म्यांमार में जल्द ही चुनाव होने वाले हैं. सूत्रों ने बताया कि डोभाल जल्द ही म्यांमार जायेंगे. डोभाल उन परिस्थितियों के बारे में म्यांमार के नेतृत्व को बतायेंगे जिनके चलते भारत को उसकी भूमि से परिचालन करने वाले उग्रवादियों के खिलाफ सटीक हमले का आदेश देना पड़ा था.

 

इस बात को लेकर भी रिपोर्ट हैं कि भारत ने अभियान समाप्त होने के बाद ही म्यामांर को सेना के हमले के बारे में सूचित किया था और इसके कारण म्यामांर का नेतृत्व खिन्न था.

 

बहरहाल, सरकार इस बात पर कायम है कि सीमा के पास होने वाले सेना के हमले के बारे में म्यामांर को काफी पहले से ही सूचित कर दिया गया था.

 

बैठक में इस तथ्य पर भी संज्ञान लिया गया कि एनएससीएन.के ने चार जून के बाद से सुरक्षा बलों को निशाना बनाने का प्रयास किया है. चार जून को मणिपुर के चंदेल जिले में उग्रवादियों द्वारा घात लगाकर किये गये हमले में सेना के 18 जवान शहीद हुए थे.

 

सूत्रों ने बताया कि चार जून के बाद से सुरक्षा बलों को निशाना बनाने की कम से कम पांच घटनाएं हो चुकी हैं.

 

शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों ने इस जरूरत पर बल दिया कि पूर्वोत्तर में उग्रवादियों के कोई बड़ा हमला करने को लेकर व्यग्र होने के संबंध में खुफिया सूचनाओं के मद्देनजर बचाव एवं आक्रामक दोनों ही कदम उठाये जाने चाहिए.

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