100 साल की उम्र में गुजर गए बाबरी लड़ाई के सबसे पुराने सिपाही मोहम्मद फारुक

By: | Last Updated: Friday, 26 December 2014 2:27 AM

नई दिल्ली/फैजाबाद: सुप्रीम कोर्ट में बाबरी मस्जिद मामले में सबसे पुराने वादी मोहम्मद फारुक का बुढ़ापे से जुड़ी बीमारियों की वजह से निधन हो गया. वे अपने 100वें वसंत में थे. फारुक का बीती शाम को निधन हुआ. विवादित स्थल (बाबारी मस्जिद/राम जन्मभूमी) के नजदीक एक कब्रिस्तान में उन्हें दफनाया दिया गया. उनके पिता मोहम्मद जहूर दिसंबर 1949 में बाबरी मस्जिद में राम की मूर्तियां रखे जाने के मामले में मूल शिकायकर्ताओं में शामिल थे.

 

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उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त महाधिवक्ता और बाबरी मस्जिद कार्य समिति के संयोजक जफरयाब जिलानी ने कहा कि फारुक के निधन के बाद उनके सबसे बडे पुत्र मोहम्मद सलीम मामले में अपने पिता की जगह वादी बन सकते हैं. फारुक इस मामले में मुस्लिम पक्ष के सात मुख्य वादियों में एक थे. अब, मामले के अन्य छह वादियों में हाशिम अंसारी, अशाद राशिदी, मौलाना महफूजुरुर रहमान, मुफ्ती हसबुल्ला, महमूद और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड हैं.

 

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फारुक के पांचों बेटे खडाउं बनाते है जिसे मंदिरों में पूजा के समय साधु और महंत पहनते हैं. इनके द्वारा बनाए गए खडाउं को अयोध्या के कई मंदिरों में भेजा जाता है.

 

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Web Title: Oldest litigant in Babri Masjid case passes away
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