उमर के निर्णय से जम्मू-कश्मीर राजनीति में नया मोड़

By: | Last Updated: Thursday, 8 January 2015 2:37 PM
omar abdulla

श्रीनगर: जम्मू कश्मीर में राजनीतिक गतिरोध ने आज एक नया मोड़ ले लिया जब उमर अब्दुल्ला ने कार्यवाहक मुख्यमंत्री के तौर पर हटने का निर्णय किया और कहा कि पाकिस्तान से लगने वाली सीमा पर स्थिति से निबटने के लिए पूर्ण कालिक प्रशासक की आवश्यकता है.

 

उमर ने राज्य के राज्यपाल एन एन वोहरा से कल रात लंदन से लौटने के बाद दिल्ली में मुलाकात की और समझा जाता है कि उन्होंने कार्यवाहक मुख्यमंत्री के पद से हटने की अपनी मंशा जतायी. उमर अपने बीमार अभिभावकों को देखने के लिए 12 दिन के लिये लंदन गये थे.

 

उमर ने आज ट्वीट कर कहा, ‘‘महज यह पुष्टि करना चाहता हूं कि मैं कल रात राज्यपाल वोहरा साहिब से मिला था और कहा कि मुझे कार्यवाहक मुख्यमंत्री के दायित्व से मुक्त किया जाये. मैंने अस्थायी रूप से रहने की सहमति जतायी थी.’’ विधानसभा चुनाव के 23 दिसंबर को आये नतीजों में उनकी पार्टी नेशनल कांफ्रेंस की पराजय के बाद उमर ने 24 दिसंबर को इस्तीफा दे दिया था और उनसे कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में काम देखने को कहा गया था. विधानसभा चुनाव में नेशनल कांफ्रेंस को महज 15 सीटें मिली थीं. 87 सदस्यीय विधानसभा में 28 सीटों के साथ पीडीपी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सामने आयी जबकि बीजेपी को 25 सीटें मिली.

 

उमर ने कहा कि उनकी यह धारणा थी कि सरकार एक हफ्ते या 10 दिनों में गठित हो जायेगी. ‘‘आज हमें लग रहा है कि 10 दिन पहले हम जहां थे, आज हम लक्ष्य से और भी दूर चले गये हैं.’’ उन्होंने कई अन्य ट्वीट में कहा, ‘‘सीमा की स्थिति को देखते हुए जहां 10 हजार लोग विस्थापित हुए, जाड़े की दुश्वारियां तथा बाढ़ प्रभावितों की राहत के लिए लगातार जरूरतों के मद्देनजर मेरा मानना है कि राज्य के हित पूर्ण कालिक प्रशासक के जरिये ही पूरे किये जा सकेंगे, किसी ऐसे कार्यवाहक के जरिये नहीं जिसके पास शासन का जनादेश नहीं है.’’ उमर ने अपनी चिरप्रतिद्वंद्वी पीपीडी को निशाने पर लेते हुए कहा कि पार्टी को यह सफाई देनी होगी कि 28 विधायकों और अन्य दो पार्टियों के समर्थन की पेशकश के बाद भी राज्य में केन्द्रीय शासन क्यों लग रहा है. एनसी एवं कांग्रेस ने पीडीपी को समर्थन देने की पेशकश की है. खंडित जनादेश के बाद बीजेपी सरकार गठन के लिए एनसी एवं पीडीपी दोनों से संपर्क बनाये हुए है लेकिन गतिरोध समाप्त करने के लिए अभी तक कुछ भी सामने नहीं आ पाया है.

 

एनसी  के साथ हाथ मिलाने के पक्ष में प्रतीत नहीं हो रही है जबकि पीडीपी को भगवा पार्टी के साथ हाथ मिलाने के लिए अपने कार्यकर्ताओं को मनाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है.

 

नई सरकार का गठन 19 जनवरी से पहले किया जाना जरूरी है जब मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल समाप्त हो रहा है. तब तक नयी सरकार का गठन नहीं होने की स्थिति में राज्यपाल शासन अपरिहार्य लग रहा है. उमर के इस फैसले का अर्थ होगा कि इस प्रकार का शासन पहले लागू किया जाये.

 

सूत्रों के अनुसार राज्यपाल को अब एक रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौंपनी होगी जिसमें वह संवैधानिक गतिरोध को दूर करने के लिए राज्यपाल के शासन की सिफारिश कर सकते हैं.

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