एक दिन के बंद में देश को 25 हजार करोड़ का नुकसान

By: | Last Updated: Thursday, 3 September 2015 3:49 AM
One day strike cost economy Rs 25,000cr: ASSOCHAM

नई दिल्ली : श्रमिक सगठनों की ओर से आहूत देशव्यापी हड़ताल का बुधवार को व्यापक असर रहा. देश की अर्थव्यवस्था को इससे भारी नुकसान पहुंचा है. बंद का असर बैंकिंग, बिजली आपूर्ति, तेल और गैस, परिवहन, भंडारण और अन्य महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवाओं पर देखा गया.

 

एसोसिएटेड चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) ने दिन भर की हड़ताल के कारण देश को 25,000 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया है. क्योंकि रक्षा उत्पादन, बैंक, बीमा कंपनियां और डाक घर, खदानों, इस्पात उद्योग और बिजली क्षेत्र लगभग ठप-से हो गए थे. कारखानों में बुधवार को अधिकतर लोग काम पर नहीं आए.

 

यह हड़ताल 10 केंद्रीय श्रमिक संघों की 12 सूत्री मांगों के पक्ष में की गई., जिसमें श्रम कानून संशोधनों को वापस लेने, न्यूनतम वेतन 15,000 रुपये तय करने और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों का निजीकरण न करने जैसी मांगे शामिल थीं. श्रमिक नेताओं ने दावा किया कि हड़ताल में लगभग 30 करोड़ श्रमिकों ने हिस्सा लिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मई 2014 में सत्ता संभालने के बाद देश में श्रमिकों की इस दर्जे की पहली हड़ताल रही है.

 

इस बीच सरकार ने जहां इस हड़ताल को कमतर बताने की कोशिश की है, वहीं श्रमिक संगठनों ने इसे अभूतपूर्व रूप से सफल करार दिया है. वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेता गुरुदास दासगुप्ता ने कहा कि हड़ताल अभूतपूर्व रही. दिल्ली में हम पहली बार इस तरह का असर देख रहे हैं. जबकि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बुधवार की हड़ताल को आंशिक असर वाला बताया. उन्होंने कहा कि भारत बंद का आह्वान किया गया था. कुछ दशक पहले ट्रेड यूनियनों ने देश को पंगु बना दिया था. मैं समझता हूं कि आप को भारत बंद नहीं लगा होगा.

 

सरकार द्वारा संचालित कोल इंडिया में उत्पादन बुरी तरह प्रभावित रहा. कंपनी के एक अधिकारी ने कहा कि हड़ताल कुल मिलाकर 80 प्रतिशत सफल रही. पश्चिम बंगाल को छोड़कर बाकी देश भर में हड़ताल लगभग शांतिपूर्ण रही. पश्चिम बंगाल में वाम कार्यकर्ताओं ने बंद कराने की कोशिश की, जिसके कारण उनका सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों के साथ संघर्ष हुआ, जिसमें कई लोग घायल हो गए.

 

वित्तीय क्षेत्र में बैंक और बीमा उद्योग के भी लाखों कर्मचारी हड़ताल पर रहे. ऑल इंडिया बैंक एंप्लाईज एसोसिएशन (एआईबीइईए) के महासचिव सी.एच. वेंकटचलम ने  कहा कि 3,70,000 करोड़ रुपये मूल्य के चेक का निस्तारण प्रभावित हुआ.

 

उन्होंने कहा कि बैंकों की करीब 75 हजार शाखाओं में कामकाज नहीं हुआ और करीब पांच लाख बैंककर्मी हड़ताल पर रहे. वेंकटचलम ने कहा कि जिला बैंकों के अलावा सभी 52 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में हड़ताल रही. आईडीबीआई और नाबार्ड के कर्मचारी भी हड़ताल पर रहे. कोटक बैंक में भी हड़ताल रही.

 

बैंकिंग क्षेत्र के 14 संगठनों ने भी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सरकार द्वारा श्रम कानून, निविदा कानून, बिजली कानून और कंपनी कानून में बदलाव करने के विरोध में हड़ताल का साथ दिया. बैंक एंप्लाईज फेडरेशन ऑफ इंडिया (बीईएफआई) के महासचिव प्रदीप विश्वास ने कहा कि पश्चिम बंगाल में 100 फीसदी कर्मचारी हड़ताल पर रहे. सरकारी और निजी दोनों बैंकों के कर्मचारी इसमें शामिल हुए. सभी बैंकों के कामकाज प्रभावित हुए.

 

लेकिन देश के सबसे बड़े भारतीय स्टेट बैंक, और इंडियन ओवरसीज बैंक के श्रमिक संघों ने हड़ताल में हिस्सा नहीं लिया. सरकारी जीवन और गैर-जीवन बीमा कंपनियों में भी हड़ताल सफल रही. ऑल इंडिया इंश्योरेंस एंप्लाईज एसोसिएशन (एआईआईईए) के महासचिव वी. रमेश ने कहा कि भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) और चार सरकारी गैर-जीवन बीमा कंपनियों में भी हड़ताल पूर्ण सफल रही. देशभर में बीमा क्षेत्र के करीब एक लाख कर्मचारी हड़ताल पर थे.

 

दिल्ली में बैंक, बीमा कंपनियों और औद्योगिक क्षेत्रों ने बंद रखा. अधिकांश ऑटोरिक्शा सड़कों पर नहीं उतरे. हालांकि दिल्ली मेट्रो का परिचालन सामान्य तौर पर जारी रहा. केरल में अधिकांश आईटी कंपनियों में उपस्थिति नगण्य रही. कर्नाटक में बंद का मिला-जुला असर रहा.

 

जबकि तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में परिवहन और बैंकिंग सेवा बुरी तरह प्रभावित रही. बिहार में सामान्य जनजीवन प्रभावित रहा. हड़तालियों ने कई स्थानों पर सड़कें जाम कर दी और रेलगाड़ियां रोक दी. उत्तर प्रदेश में भी हड़ताल का व्यापक असर रहा. परिवहन सेवा ठप थी, यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ी.

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